हरदा ~ हिंदुत्व एक जीवन पद्धति है ,एक दर्शन है --एडव्होकेट सुश्री प्रियंका दुवे ~~

अंकुश विश्वकर्मा हरदा ~~

हरदा। मध्यभारत दुर्गावाहिनी की प्रान्त सह संयोजिका सुश्री एडव्होकेट प्रियंका दुवे ने अपने उद्गार में यहाँ कहा किहिन्दुत्व एक उद्विकासी व्यवस्था है जिसमें अभिव्यक्ति की स्वतन्त्रता रही है। इसे समझने के लिए हम किसी एक ऋषि या द्रष्टा अथवा किसी एक पुस्तक पर निर्भर नहीं रह सकते। यहाँ विचारों, दृष्टिकोणों और मार्गों में विविधता है किन्तु नदियों की गति की तरह इनमें निरन्तरता है तथा समुद्र में मिलने की उत्कण्ठा की तरह आनन्द और मोक्ष का परम लक्ष्य है।
हिन्दुत्व एक जीवन पद्धति अथवा जीवन दर्शन है जो धर्म, अर्थ, काम, मोक्ष को परम लक्ष्य मानकर व्यक्ति या समाज को नैतिक, भौतिक, मानसिक एवं आध्यात्मिक उन्नति के अवसर प्रदान करता है। हिन्दू समाज किसी एक भगवान की पूजा नहीं करता, किसी एक मत का अनुयायी नहीं हैं, किसी एक व्यक्ति द्वारा प्रतिपादित या किसी एक पुस्तक में संकलित विचारों या मान्यताओं से बँधा हुआ नहीं है। वह किसी एक दार्शनिक विचारधारा को नहीं मानता, किसी एक प्रकार की धार्मिक पूजा पद्धति या रीति-रिवाज को नहीं मानता। वह किसी धर्म या सम्प्रदाय की परम्पराओं की संतुष्टि नहीं करता है।सुश्री दुवे ने स्पष्ट तौर पर कहा कि आज हम जिस संस्कृति को हिन्दू संस्कृति के रूप में जानते हैं और जिसे भारतीय या भारतीय मूल के लोग सनातन धर्म या शाश्वत नियम कहते हैं वह उस मजहब से बड़ा सिद्धान्त है जिसे पश्चिम के लोग समझते हैं । कोई किसी भगवान में विश्वास करे या किसी ईश्वर में विश्वास नहीं करे फिर भी वह हिन्दू है।यह एक जीवन पद्धति है; यह मस्तिष्क की एक दशा है। हिन्दुत्व एक दर्शन है जो मनुष्य की भौतिक आवश्यकताओं के अतिरिक्त उसकी मानसिक, बौद्धिक एवं आध्यात्मिक आवश्यकता की भी पूर्ति करता।दुर्गावाहिनी सह संयोजिका सुश्री दुवे  ने बताया कि फ्रांस के नोबल पुरस्कार विजेता दार्शनिक रोमा रोला ने अपनी किताब प्रोफेट्स ऑफ द न्यू इंडिया के प्रिल्यूड पृष्ठ संख्या 51 पर लिखकर माना कि विश्व में हिन्दू धर्म ही सर्वश्रेष्ठ  है।
उन्होंने लिखा, 'मैंने यूरोप और मध्य एशिया के सभी मतों का अध्ययन किया है, परंतु मुझे उन सब में हिन्दू धर्म ही सर्वश्रेष्ठ दिखाई देता है...मेरा विश्वास है कि इसके सामने एक दिन समस्त जगत को झुकना पड़ेगा। पृथ्वी पर केवल एक स्थान है जहां के जीवित व्यक्तियों ने प्राचीन काल में अपने स्वप्नों को साकार किया, वह है भारत यहां झुकने का अर्थ हिंसा या धर्मांतरण के बल पर नहीं, बल्कि सच्चे ज्ञान के आगे झुकने की बात है। सत्य, अहिंसा, प्रेम, स्वतंत्रता और मोक्ष ही धर्म का सच्चा मार्ग होता है। असल में धर्म के यही आधार होना चाहिये। हिन्दू धर्म में व्यक्ति की निजता का सम्मान किया जाता है। वहां किसी भी प्रकार का सामाजिक दबाव नहीं बल्कि स्वयं की खोज पर बल दिया जाता है।उन्होंने  कहा कि विनायक दामोदर सावरकर के अनुसार हिंदू वह व्यक्ति है जो सिंधु नदी से समुद्र तक के भारत को अपनी पितृभूमि और पुण्यभूमि माने।
इस प्रकार से ही  देश में हिंदुत्व की विचारधारा का समर्थन “विश्व हिंदू परिषद” और “राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ” करता है। 1995 में सुप्रीम कोर्ट ने हिंदुत्व को जीवन जीने की एक शैली बताया है ना कि कोई धर्म। हिंदुत्व से आशय हिंदू होने की अवस्था से है।इस प्रकार दुनियां भर आज चर्चा का विषय हिंदुत्व बना हुआ है फिर चाहे वह हिंदुत्व का पक्ष को या विपक्ष ।


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