बड़वानी~118 वीं पुण्यतिथि पर स्वामी विवेकानन्द को किया नमन~~

अंतिम दिन भी ध्यान, अध्ययन और अध्यापन में व्यस्त रहे स्वामी जी~~

बड़वानी / प्राचार्य डाॅ. आर. एन. शुक्ल के मार्गदर्षन में वर्क फ्राम होम के अंतर्गत निरंतर कार्यरत शहीद भीमा नायक शासकीय स्नातकोत्तर महाविद्यालय, बड़वानी के स्वामी विवेकानन्द कॅरियर मार्गदर्षन प्रकोष्ठ द्वारा स्वामी विवेकानन्द जी की 118 वीं पुण्य तिथि के अवसर पर उनके व्यक्तित्व तथा योगदान पर आॅनलाइन चर्चा करते हुए उनके योगदान को नमन किया। कार्यकतार्य प्रीति गुलवानिया, किरण वर्मा, राहुल मालवीया, सलोनी शर्मा, जितेंद्र चैहान ने बताया कि स्वामीजी 12 जनवरी, 1863 में जन्मे और 4 जुलाई, 1902 को उन्होंने देह त्याग दी। वे कम जिए पर खूब जिए। 39 वर्ष 05 माह और 23 दिन की अल्प प्रतीत होने वाली जिन्दगी में वे इतना कार्य और उच्च कोटि का ऐसा चिन्तन कर गए, जितना अन्य व्यक्ति सैकड़ों वर्षों में नहीं कर पाते। कॅरियर काउंसलर डाॅ. मधुसूदन चैबे ने बताया कि  उनका मूल नाम नरेन्द्र नाथ दत्त था। संन्यास ग्रहण करने के बाद उन्होंने विविदिषानंद नाम रखा। खेतड़ी के राजा अजीतसिंह ने उन्हें विवेकानन्द का नाम दिया था। 11 सितम्बर, 1893 को षिकागो की विष्व धर्म संसद में विवेकानंद जी ने भारतीय सभ्यता और संस्कृति का गहरा प्रभाव स्थापित किया था। 4 जुलाई, 1902 को अर्थात् अपने जीवन के अंतिम दिन भी विवेकानंदजी सक्रिय रहे। उन्होंने नित्य की भांति ध्यान, अध्ययन-अध्यापन और षिष्यों से सम्वाद किया। आखिरी दिन उन्होंने संस्कृत व्याकरण के गं्रथ लघु सिद्धांत कौमुदी की व्याख्या की थी।


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