झाबुआ~सड़कों पर मवेशियों का राज, नपा ने 3 साल से कार्रवाई तक नहीं की, क्योंकि कांजी हाउस सिर्फ  कागजों पर ही है~~





पुराने कांजी हाउस की फाइल गुम, जिम्मेदारों ने कहा- ढूंढवाएंगे-पूर्व मे लक्ष्मीपति मदिर के पीछे के आखिर काजी हाउस का हुआ क्या~~





झाबुआ। संजय जैन~~

आवारा मवेशियों के कारण शहर की सड़कों पर चलना मुश्किल हो गया है। कई घटनाएं इनके कारण हो चुकी है। यातायात के लिए दिक्कत और सड़कों पर चलने वालों की जान को खतरा बनने के बावजूद आवारा मवेशियों पर नगर पालिका ने तीन साल से कार्रवाई नहीं की। सड़कों पर इनकी तादाद बढ़ती जा रही है। नगर पालिका ने इसलिए इतने लंबे समय से कार्रवाई नहीं की, क्योंकि शहर में कांजी हाउस सिर्फ  कागजों पर चल रहा है। इसकी जमीन पर कब्जे हो चुके हैं। दूसरा गोशाला वाले भी इन्हें लेने को तैयार नहीं हो रहे। 




-जरूरी है कांजी हाउस की जमीन से कब्जे हटाना.....





आवारा पशुओ से राहत एव सभावित एक्सीडेट से निजात दिलाने की दृष्टि से जरूरी है कि कांजी हाउस की जमीन से कब्जे हटाकर,यहां मवेशियों को रखने की व्यवस्था की जा सकती है। दशकों पहले जगह तय की गई थी। नगर पालिका का कहना है, इसके लिए अलग से कोई बजट नहीं होता। हो सकता है न भी होता हो, लेकिन अपनी जमीन तो नपा खाली करा ही सकती है। वही सरकार स्तर भी गोशालाएं बनवाने की बात कर रही है। पहले से चल रही गोशालाओं को भी मदद की बात की जा रही है। 




-की जाए मवेशी मालिकों पर कार्रवाई .....





नगर पालिका ने अभी तक राणापुर, झाबुआ के लक्ष्मीनगर और भूराडाबरा की गोशाला वालों से बात की थी किन्तु उन्होंने जगह नहीं होने से इंकार कर दिया। ऐसे में नई गोशालाएं बनवाकर या सरकारी मदद लेने वाली गोशालाओं पर यहां के मवेशी लेने की बाध्यता की बाध्यता कर काम किया जा सकता है। साथ ही जो आवारा मवेशी बाजार में घूमते हैं, उनमें से कई पालतू हैं। पशु मालिक उन्हें दिनभर खुला छोड़ देते हैं। ऐसे मवेशी मालिकों पर कार्रवाई की जाए। साथ ही पशुओं के कारण दुर्घटना की स्थिति में पशु मालिक पर भी प्रकरण दर्ज किया जाए।




-क्या हो चुकी है पुराने कांजी हाउस की फाइल गुम .....?





वर्षों से खंडहर पड़े पुराने कांजी हाउस के आसपास धीरे-धीरे कब्जा होता जा रहा है। यहां तक कि पुराने कांजी हाउस की फाईल तक नपा कार्यालय से गुम हो चुकी है। पिछले दिनों एक नागरिक ने स्वच्छंद घूमने वाले मवेशियों व पागल कुत्तों के आतंक को लेकर जनसुनवाई में आवेदन दिया था। इस दौरान उच्च अधिकारी ने नपा कार्यालय संपर्क कर कांजी हाउस के संबंध में जानकारी ली थी, लेकिन फाइल गुम होने के कारण इस ओर आगे की कार्रवाई नहीं हो पाई है। नगर पालिका परिषद कार्यालय के पास कांजी हाउस बनाने की तैयारी की बात भी अर्ब आई गई हो चुकी है। पुराने कांजी हाउस को लेकर तरह-तरह की बातें सामने आ रही हैं।




-पूर्व कलेक्टर बी चंद्रशेखर ने आवारा पशुओं पर कार्रवाई के आदेश दिए थे ....





नगरपालिका पिछले 6 बरसों से  कांजी हाउस के लिये जमीन की तलाश करने की बात कर रही है । ज्ञातव्य है कि पूर्व कलेक्टर बी चंद्रशेखर ने आवारा पशुओं पर कार्रवाई के आदेश दिए थे और इस दौरान परिषद के कर्मचारियों ने आवारा पशुओं को ढूंढ ढूंढकर पकड़ा था। पशु मालिकों पर जुर्माना भी लगाया गया था। उनके कार्यकाल के दौरान तो बाजार में एक भी आवारा पशु नहीं दिखाई देता था, लेकिन उनके स्थानांतरण के बाद स्थिति जस की तस हो चुकी है। शहर के किसी भी क्षेत्र में अगर आप चले जाएं तो आवारा पशु सड़कों पर बैठे हुए दिखाई पड़ जाएंगे।




-तरह -तरह की हो रही है बातें.....





इस संबंध में जब नगर पालिका कार्यालय संपर्क किया गया तो पुराने कांजी हाउस को लेकर तरह -तरह की बातें सामने आई है। कोई पुराने कांजी हाउस की जमीन लीज पर दे देने की बात कह रहा है,तो कुछ लोग पुराने कांजी हाउस की फाइल गुम होने का कारण भी जमीन को बिकना बता रहे है। वही पहले भी एकाधिक बार नगर पालिका परिसर में ही कांजी हाउस बनाने की तैयारी की बात करता रहा है पिछले कई वर्षों से जमीन नहीं मिलना सबसे बड़ा कारण बताया जा रहा है।




-जनसुनवाई में की थी शिकायत-फाइल को ढूंढवा रहे .....





चालक -परिचालक संघ के हाजीलाला पठान आवारा प्शुओं को लेकर जनसुनवाई मे पहले आवेदन दिया था। जिस पर संबंधित अधिकारी ने नगरपालिका से कांजी हाउस को लेकर जानकारी मांगी थी। पुराने कांजी हाउस की फाइल गुम होने की सूचना उन्हें दी गई थी। तथा स्वय मुख्य नगरपालिका अधिकारी एलएस डोंडिया ने कहा था कि  पुराने कांजी हाउस की वास्तविक स्थिति का पता फाइल मिलने पर ही बताया जा सकता है। वे फाइल को ढूंढवा रहे हैं। किन्तु पिछले दो बरसो से उस फाईल की खोजबीन जारी है किन्तु आज तक वह फाईल नही मिल पाई है। 




-कोई भी जिम्मवारी औढने को तैेयार नही ..... 





आज स्थिति यह है कि उक्त कांजी हाउस को लेकर नगरपालिका मे हालात यह हो चुके है कि कोई भी अपने माथे पर बात लेना नही चाहता है। सीएमओ कभी इन्जिनियार से मिलने बात करते है, तो इन्जिनियर कार्यालय मे अयुब भाई से मिलने की बात करते है  कुल मिला कर नगरपालिका के कांजी हाउस की फाईल ही फिलहाल तो गुमी हुई ही मानी जा रही है या गुमा दी गई है और चर्चाओ का बाजार यदि सही माने तो काजी हाउंस को ही जिम्मेवारो न े बेच दिया है ।आज नगरपालिका के पास आवारा पशुओ को पकड कर कांजी हाउस में बंद करने तक की जगह नही है। इसे लेकर जीवदया मडल की ओर से संजय मेहता ने भी माग की है कि नगर मे कांजी हाउस का यथाशीघ्र निर्माण करावे तथा नगर मे कथित तौर पर आवारा या कहें पालतु जानवर जिन्हे पशुमालिक खुला सडको पर छाड देते है । कांजी हाउस का निर्माण प्राथमिकता से करावे ताकि नगरपालिका को राजस्व भी प्राप्त हो सके और नगर की सुदरता को भी ग्रहण नही लगे।




प्रशासन को कार्यवाही करने की है दरकार........





कांजी हाउस की चिर यौवन समस्या को लेकर नगर के कतिपय लोग कांजी हाउस की जमीन एव उस पर हुए अतिक्रमण या नपा द्वारा बेच दिये जाने आदि मुद्दो को लेकर जनहित याचिका भी लगाने की सौच रहे है। जिला प्रशासन को इसे गभीरता से लेते हुए इस समस्या को हल करने में अपनी प्रखर भूमिका का निर्वाह करना जनहित मे जरूरी है ।




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