बीड ~सिंगाजी परियोजना मे मौजूद स्टोर के टूटे ताले~~

जबलपुर से आई सिक्योरिटी की टीम करती रही जांच.~~

लगे 400 सीसीटीवी कैमरे में 4 भी नहीं है चालू फिर यह कैसी सुरक्षा नजर~~

रवि सलुजा बीड ~~

संत सिंगाजी पांवर परियोजना में सोमवार मंगलवार की देर रात को मौजुद कंपनियों की बने स्टोर के ताले टूटने की घटना हुई  घटना के चार दिन जवाबदार अफसर जागे और  सुरक्षा जबलपुर के अधिकारी ए के मुत्ति,सहित बल  शुक्रवार को सिंगाजी परियोजना पहुंचा मिली जानकारी के अनुसार बताया की संत सिंगाजी परियोजना में कार्यरत एलएनटी पांवर ,भेल सहित अन्य कंपनियों के मोजुद स्टोर के लगे ताले टूटने की घटना घटित हुई यह स्टोर एमपीपीजीसीएल की सुपुर्त मे है जिसको लेकर परियोजना सूत्रों के हवाले से बताया कि मुंदी थाने में भी ताले टुटने का  आवेदन दिया गया है वहीं पूरे घटनाक्रम की जांच  जबलपुर की टीम ने की वही परियोजना के चीफ इंजीनियर ने बताया कि स्वीच यार्ड में एलएनटी पॉवर भेल कंपनी के स्टोर मौजूद थे जो एमपी पीसीएल के सुपुर्द में दिए गए हैं इसमें हमारा कुछ सामान रखा हुआ था कुछ चोरी होने की संभावना लग रही है पर अभी पूर्णता स्पष्ट नहीं हो पा रहा है टीम जांच कर रही है
पर एक बड़ा सवाल यह है कि परियोजना में टूटे ताले के बाद क्या सामग्री चोरी हुई है इसकी जानकारी नही दी गई वही मौजुद स्टोर में स्टॉक रजिस्टर में कौन सी सामग्री मौके पर मौजूद नहीं है कौन सी साम्रगी चोरी हुई  इस पर निष्कर्ष नही निकल पाया  चर्चा यह है कि संत सिंगाजी परियोजना में कुछ सालों से चोरी की घटनाओं विराम लगा  था वह कई समय से चोरी का कोई मामला सामने भी नहीं आया था  फिर अचानक इतने सालो के बाद तीन जगहों के अलग-अलग ताले तोड़ जाना कई सवालों को जन्म देता है या फिर यह कोई आपसी खींचतान का नतीजा या किसी प्रकार का रचा गया षड्यंत्र भी है पूरे मामले में बीड़ पुलिस चौकी प्रभारी विक्रम धारवे ने मौके पर पहुंचे घटनास्थल का मुआयना किया।

400 में से चार भी चालू नहीं सीसीटीवी कैमरे --
संत सिंगाजी परियोजना में कैमरे लगवाने से लेकर मेंटेनेस करने तक में लाखों रुप ए प्रतिमाह खर्च किए जा रहे है लाखों करोड़ों रुपए के लगे सीसी फुटेज के हालात ये बयां करते हैं परियोजना फेस वन ,फेस टू ,के कुल मिलाकर 400 के लगभग  सीसीटीवी कैमरे परियोजना में लगे हैं पर जानकारी लेने पर पता चलता है कि 4 सीसीटीवी कैमरे भी चालू नहीं है फिर परियोजना की कैसी सुरक्षा हो रही है प्रदेश की सबसे बडी बिजली उत्तपादन की परियोजना है वही सुरक्षा के लिए लगे कैमरे बंद होना  एक बड़ा सवाल है  जिम्मेदारों के ऊपर क ई सवाल खडे होते नजर आ रहे  किस प्रकार से परियोजना की सुरक्षा व्यवस्था करवाई जा रही है  प्रतिमाह लाखों कैमरो पर खर्च करने के बाद भी कैमरे बंद फुटेज क्यों है  क्या कारण है क्या मेंटेनेंस  सिर्फ कागज पर ही हो पाया हैफिर  लाखों रुपए का भुगतान कैमरे का मेनटेनेस करने मे कंपनी को कैसे कर दिया क ई अनसुलझे सवाल जिस पर मध्य प्रदेश पांवर जनरेटिंग कंपनी के जवाबदार नही बता पा रहे है   सीधा सीधा शासकीय रुपयो का दुर उपयोग किया गया है जो जांच का विषय भी है

इनका कहना:- ताले टूटने की घटना पर बताया कि स्वीच याडं में बने स्टोर से कुछ सामान चोरी होने की आशंका जरूर लग रही है परंतु जबलपुर से आई टीम जांच कर रही है अभी स्पष्ट नहीं हो पाया है क्या चोरी हुआ है वही लगे कैमरे के बारे में बताया कि हमारे बहुत से कैमरे चालू है वह कहीं बंद भी पढ़े हुए हैं मेंटेनेंस कराना है कोरोना के चलते मेनटेनेस नहीं हो पाए हैं जल्द बंद पड़े कैमरे चालू हो सकेंगे .

वीके कैलासिया चीफ इंजीनियर सिंगाजी परियोजना.

इनक कहना :- मौके का मुआयना करने पर स्टोर में ताले टुटे पाए गए है  हम एम पीपीजीसीएल से स्टोर मे रखी सामग्री का स्टाक रजिस्टर लेगे फिर जांच कर रखे सामान का मिलान किया जाएगा जांच के बाद ही कुछ कहां जा सकता है
विक्रम धारवे चौकी प्रभारी बीड़


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