*टांडा~आखिरकार प्रशासन कृषि दवा विक्रेताओ की जाँच क्यों नही कर पा रहा है?*~~

दीपक जायसवाल टांडा मो9685833838~~

टांडा–एक और वर्षा की खेंच,दुसरी और धरतीमाता की कोख से खिलवाड़ करनें वालें,बाग के वे नामी गिरामी,जो राजनीति की आड़ मे,अपनी कृषि खाद बीज व दवाई की दुकानों से किसानों के साथ धोखाधड़ी करनें से बाज नही आ रहें है,मैदानेंजंग सक्रिय है? सबंधित विभाग इस मामलें मे चुप क्यों बैठा है,अपने आपको किं कर्तव्य विमूढ़ नजर क्यों कर रियाँ रहा है,बताया जाता है कि इसके भी कई कारण है? उन्हीं  कारणों से धरतीपुत्र अपनी धरतीमाता के साथ हो रही धोखाधड़ी से मनमसोस कर रह जाता है।क्योंकि वह अपनी पूश्तैनी खेती, अपना परम्परागत खाद-बीज-दवाइयों से मुँह मोड़ चुका है,उसका खामियाजा भी भुगत रहा है,वह उस आधुनिक खेती की परंपराओं मे उतर पड़ा है,जहाँ वह धरतीमाता को,अपनें स्वार्थपरता के अनुसार खेती करनें के लालच मे वह अंधा होकर,इन चालाकबाजों, शातिरबाजों,धोखेबाजों व्यापारियों के चंगुल मे ऐसे फँसा गया है कि,उस धरतीपुत्र को कही से भी न्याय नही मिल पा रहा है।
शासन ने इन धरतीपुत्रों व धरतीमाता की कोख के साथ,स्वार्थी मानवरूपी दानवों द्धारा शोषण न हो,इसलिये प्रशासन का एक अमला इस काम की निगरानी के लिये लगाया था,परन्तु दुर्भाग्य यह है कि,कृषि विभाग का यह अमला भी,इन शातिरबाजों की गोद मे,अपने स्वार्थ की सवारी कर रहा है,और किसान आधुनिक खेती,अधिक उपज के लालच मे,कृषि खाद बीज के ठगबाजों से ठगा रहा है।इस ठगबाजी मे,व्यापारी ने,ईन जिम्मेदार अधिकारियों को भी,अपने मुनाफे का भागीदार बना लिया लगता है?इसलिये बाग के चुनिंदा ठगबाज कृषि खाद बीज दवा के व्यापारी जमकर किसानों का शोषण कर रहें है।
अब किसान जहाँ प्राकृतिक प्रकोप से तो जूझता ही है।परन्तु कृषि विभाग के संरक्षण मे,कृत्रिम आपदाओं से भी जुझना भी उसकी मजबूरी बन गई लगती है?
अब आखिरकार इन कृषि व्यवसाईयों के खिलाफ कार्यवाही करें तो कौन करे,समझसे परे है?
*अगली पोस्ट मे पढ़िएगा व्यापारी किस तरह शासन के टैक्स को चूना लगा रहे है।*


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