झाबुआ~प्रसुता वार्डो की हालत हो रही सबसे खराब-ग्रामीण महिलाये आखिर करे भी तो क्या करे~~





अव्यवस्थाओ के घेरे मे जिला अस्पताल नही दे रहे ध्यान-डॉक्टर आज भी समय से पूर्व अस्पताल से जा रहे घर~~





झाबुआ। संजय जैन~~

जिला चिकित्सालय में अव्यवस्थाओ के चलते मरिजो को आये दिन परेशान होन पड रहा है। वही जहां महिला प्रसुता वार्ड में महिलाओ को सबसे ज्यादा परेशानी हो रही है। जहां एक ओर वार्ड में चार पंख ओर दो एसी लगे हुये है। लेकिन बंद पडे पंखे के नीचे महिलाओ को मजबूरी में सोना पडता है। वर्तमान में बरसात के मौसम में सही तरीके से बरसात नही होने के कारण गर्मी ओर उमस दिनो दिन बढ रही है। जिसके कारण बिना पंखो के तो रहा ही नही जा सकता है।




-ग्रामीण महिलाये आखिर करे भी तो क्या करे....? 





प्रसुता वार्डो में बंद पंखो के नीचे प्रसुता महिलाओ को वार्ड मे रख रखा है। लेकिन ग्रामीण महिलाये आखिर करे भी तो क्या करे....? जब कभी वे अपनी आवाज उठाती है तो उनकी आवाज को या तो कोई नर्स या तो कोई डॉक्टर दबा देते है। ओर तो ओर डॉक्टरेा के द्वारा यह भी कह दिया जाता है कि ज्यादा गर्मी लग रही हो तो अपने घर चले जाओ या फिर अपने घर से पंखा लेकर आओ। इतना ही नही डॉक्टरो के द्वारा सही ईलाज भी नही किया जाता है। 




-ध्यान नही दे पा रहे जिम्मेदार 





जिला चिकित्सालय में बढती अव्यवस्थाओ के कारण अस्पताल प्रबंधन को इस बारे मे कई बार सुचित भी किया गया है लेकिन उनके द्वारा इस ओर ध्यान न देकर सिर्फ  कागजी कार्यवाही करने मे लगे हुये है। ऐसे मे जहां सही मायने मे व्यवस्था सुधारने की जरूरत है उस ओर कोई भी जिम्मेदार ध्यान नही दे पा रहे है। पूर्व में सिविल सर्जन आरएस प्रभाकर के द्वारा भी व्यवस्थाओ की ओर ध्यान नही दिया जा पा रहा था। लेकिन उनके रिटायमेन्ट के कुछ समय पूर्व ही थोडी व्यवस्था सुधरने लगी थी। लेकिन उनके रिटायरमेन्ट के बाद नविन सिविल सर्जन डॉ बीएस बघेल आने के बाद भी जिला चिकित्सालय में अव्यवस्था मे कोई सुधार नही हुआ है।




-डॉक्टरो की उपस्थिती को लेकर भी कई सवाल खडे...





 जिला चिकित्सालय में डॉक्टरो की उपस्थिती को लेकर भी कई सवाल खडे हुये थे,जिस पर शिकायत के बाद दर्जनो डॉक्टरो को नोटिस भी जारी किये गये थे,जिसमे उनसे जवाब मांगा गया था। लेकिन उसके बाद भी अभी भी वर्तमान में डॉक्टरो की मनमानी के चलते वे अपने ही हिसाब से अपने ड्यूटी समय से पूर्व ही अपने घरो की ओर रवाना हो जाते है। वही कुछ डॉक्टर तो ऐसे है जो अस्पताल समय में घर मे बैठे मरिजो को देखने के लिये चले जाते है। लेकिन इस ओर किसी भी जिम्मेदार अधिकारी का कोई ध्यान नही है। जिसके कारण जिला अस्पताल में मरिजो की संख्या में अब कम होने लगी है। 




-ग्रामीण मरिजो की संख्या होती है ज्यादा....





जिला अस्पताल में अपना ईलाज कराने के लिये ग्रामीण क्षेत्रो से सैकडो की तादात में मरिजो को आना जाना लगा रहता है। जिसमे करीब 100 मे से 95 प्रतिशत ग्रामीण क्षेत्रो से ही मरीज अपना ईलाज कराने के लिये अस्पताल आते है। वही कुछ 5 प्रतिशत ही मरीज अस्पताल में अपना ईलाज कराने एवं भर्ती होते है। वही नगर के सभी मरिज डॉक्टर को घर पर जाकर प्रायवेट बताना ही उचित समझते है। मरिजो की संख्या में दिनो-दिन कमी भी आती गई है। जिससे साफ  तौर पर यह लगता है कि जिला अस्पताल में व्यवस्थाओ के नाम पर कुछ भी नही है सिर्फ  कागजी कार्यवाही कर इतिश्री कर रहे है। 




- सिक्यूरेटी गार्ड की नही है कोई व्यवस्था....





प्राप्त जानकारी के अनुसार जिला अस्पताल में सिक्यूरेटी गार्ड की व्यवस्था के नाम पर अस्पताल प्रबंधन हजारो रूपये खर्च कर रहा है। लेकिन जहां तक सुत्रो की माने तो जिला अस्पताल मे ं40 सिक्यूरेटी गार्डो की भर्ती हुई है,जिनमे से महज कुछ ही सिक्यूरेटी गार्ड सामने दिखाई देते है। जिनमे से कुछ एक तो अपनी मर्जी के मालिक है उनकी इच्छा होती है तो ही वे काम करते है। वरिष्ठ अधिकारियो से कुछ ऐसी सेटिंग अपना कार्य कर रहे है। वही नौकरी के नाम पर सिर्फ  आराम कर रहे है। जहां एक ओर कोविड-19 वायरस संक्रमण के चलते सिक्यूरेटी गार्डो की भी भर्ती की गई थी। लेकिन दिन पे दिन वे भी बदलते हुये दिखाई दे रहे है। 




-विषय विचाराधीन है.....





जिला चिकित्सालय में अव्यवस्थाओ का अंबार सा लगा हुआ है। लेकिन इस ओर वरिष्ठ अधिकारियो के द्वारा कोई ध्यान नही दिया जा रहा है। ऐसे मे जिला अस्पताल का ढॉचा दिनो दिन बिगडता जा रहा है। वही व्यवस्थाओ मे सुधार को लेकर जिला अस्पताल प्रबंधन आगे क्या कार्यवाही करता है ये विषय विचाराधीन है।




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