झाबुआ~पूर्व मे लक्ष्मीपति मदिर के पीछे के आखिर काजी हाउस का हुआ क्या.~~

आवारा पशुओ के लिये यहा बना कांजी हाउस ही,हो चुका है गुम...~~

बडे तालाब एव छतरियो के कायाकल्प मे उदासीन है नगरपालिका-नगर की सुंदरता को लग रहा ग्रहण~~

झाबुआ। संजय जैन~~

नगरपालिका की अनदेखी एवे बहादूर सागर तालाब के किनारो पर स्थित घाट पर पसरी गदगी नगर की स्वच्छता के दावों को चिढा रही है। अब तो हालात यह है कि तालाब का सौदर्य दिखाई देने की बजाय अब तो तालाब में जहा जल कुंभी एव कमल से तालाब ढक चुका है तो,तालाब के किनारे स्थित पुरातन कालीन छतरियो के आस पास गाजर घास इतनी अधिक बढ चुकी है कि इस वार्ड का विकास ही थम सा गया नजर आने लगा है । 


कालेेज एव सर्कीट हाउस को जाडने वाला पुल भी अभी तक नही बन पाया....

बडे तालाब पर राम शरणम के निकट कालेेज एव सर्कीट हाउस को जाडने वाला पुल भी अभी तक नही बन पाया है,जबकि काग्रेस सरकार मे विधायक कातिलाल भूरिया ने दावे के साथ कहा था कि तीन माह मे यह पुल बन कर मार्ग चालु हो जावेगा। प्रदेश की सरकार बदल गई किन्तु काग्रेस शाषित नगरपालिका ने इस पुल निर्माण की दिशा मे मानों ढील ही दे दी है । वार्ड के पार्षद पपीश पानेरी का कहना है कि पहले काग्रेस की सरकार होने के कारण यह वार्ड उपेक्षित था,लेकिन अब प्रदेश मे भाजपा की सरकार बन चुकी है। वार्ड से लेकर आदर्श रोड का निर्माण,बडे तालाब का सौदर्यीकरण,छतरियो के रख रखाव के अलावा वार्ड की नालियो व सडक के निर्माण की स्वीकृति हो चुकी है । हमारा प्रयास रहेगा कि जल्द ही आगामी बजट आने के बाद निर्माण कार्य शुरू करवा दिया जावेगा ताकि लोगो को राहत मिल सके। उन्होने वार्ड मे आगनवाडी भवन बनाने के प्रयास किये जाने की जानकारी भी दी । सबसे महत्वपूर्ण तो बात यह है कि तालाब के किनारें बनी ऐतिहासिक छतरियो का सौदर्यीकरण भी अभी तक नही हो पाया है ।


दुर्भर हो चुका सडको पर लोगो का निकलना तक ........

नगर मे आवारा पशुओ की इतनी अधिक भरमार हो चुकी है कि सडको पर लोगो का निकलना तक दुर्भर हो चुका है । सज्जन रोड हो या थादला गेट, राजवाडा चौक हो या राजगढ नाका, सभी दूर स्वच्छद तरीके से आवारा पशुओ का जमावडा नगर मे दिखाई देना आम बात हो गई है। विवेकानन्द कालोनी मे तो श्रीमती यशोदाबाई गवली के करीब एक दर्जन पशु सडकों पर ही स्वच्छद विचरण करते हुए दिखाई देते है । इसे लेकर पूर्व मे नगरपालिका सहित प्रशासन को भी वार्ड मोहल्लेवालो ने शिकायत भी की थी किन्तु आज तक कुछ भी नही हुआ है। 


पूर्व मे लक्ष्मीपति मदिर के पीछे के आखिर काजी हाउस का हुआ क्या.....?नगरपालिका अभी तक नही बना पाई कांजी हाउस.....

नगर मे पूर्व मे लक्ष्मीपति मदिर के पीछे नगरपालिका का कांजी हाउस था जो न जाने किन कारणो से ेअब अन्तध्र्यान ही हो गया है....? लोगो मे चर्चा है कि उक्त काजी हाउस नगरपालिका द्वारा बेच दिया गया है। जिसके चलते नगर मे आवारा पशुओं के लिये अब कोई जगह ऐसी नही है,जहा आवारा पशुओ को बद करके पशुपालको से पेनेल्टी वसुल की जा सके। इस समस्या को लेकर नगरपालिका के सीएमओ से मिल कर वस्तुस्थिति जानना चाही कि आखिर काजी हाउस का हुआ क्या.....? तो वे इन्जिनियर के पास जाने का बोलते है और इन्जिनियर से मिलने पर वे अयुब खान के पास जाने की बात कहते है। इस काजी हाउस का रेकार्ड ही नपा मे उपलब्ध नही हो पा रहा है। जिससे आवारा पशु मालिको पर नकेल नही कसी जा सकी है। जिला प्रशासन को इस काजी हाउस के बारे मे विस्तृत जाच करवाई जाना चाहिये ताकि वास्तविकता का पता चल सके।


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