बीड़ ~मांधाता  कांग्रेस विधायक पटेल के  इस्तीफे के बाद ~~

सौशल मिडिया पर टाईगर जिंदा है के पोस्टर हो रहे वायरल.~~

यह पोस्टर किसी और का नहीं मांधाता निमाड़ खेड़ी के पूर्व कांग्रेसी विधायक के चाहते कर रहे हैं वायरल..~~

रवि सलुजा  बीड़ ~~

खंडवा जिले की मांधाता विधानसभा 175 जहां से कांग्रेस के विधायक नारायण पटेल थे जो  कांग्रेस के पूर्व केंद्रीय मंत्री व प्रदेश अध्यक्ष रह चुके अरुण यादव के बहुत ही करीबी और खास समर्थक में से एक माने जाते थे उनके द्वारा गुरुवार को कांग्रेस से इस्तीफा देने के बाद उन्होंने बीजेपी की सदस्यता ले ली अब आने वाले दिनों में मांधाता विधानसभा सीट पर भी इस्तीफे के बाद रिक्त हुई सीट पर भी उपचुनाव होंगे  अब सभी राजनीतिक समीकरण को देखते हुए आने वाले दिनों में भाजपा और कांग्रेस के नेता उन्हें अपनी सक्रियता  जोर अजमाइश मे लगना शुरु हो गए है दिखाएंगे जो कि यह तय है। क्योंकि अब इस  सीट पर  फिर बीजेपी और कांग्रेस की कांटे की टक्कर होना तय है , -शुक्रवार को भी मांधाता विधानसभा में राजनीतिक सरगर्मियां तेज रही बीजेपी व कांग्रेस नेता क्षेत्र में पुन नगर व ग्रामों में घूमते  बैठते दिखाई दिए। शुक्रवार को कांग्रेस के पूर्व विधायक राज नारायण सिंह वह सुपुत्र मांधाता यूथ कांग्रेस के अध्यक्ष उत्तम पाल सिंह सिंगाजी समाधि स्थल पहुंचे पूजा अर्चना कर संत सिंगाजी महाराज का आशीर्वाद लिया क्षेत्र की उन्नति प्रगति की कामना की वही अब तरह-तरह के कयास लगाए जा रहे हैं,  वह आम जनों में चर्चा है कि कांग्रेस बीजेपी से टिकट के दावेदार सक्रिय हो गए हैं । जो कि आने वाले दिनों में होने वाले चुनाव में अपनी  मजबूत दावेदारी करेंगे । वही कई प्रकार के बनते बिगड़ते समीकरणों का दौर भी आएगा वह टिकट व चुनाव तक क ई प्रकार की चर्चाएं सामने  देखने सुनने  को मिलेगी । प्रमुख दोनों दलो में दावेदार की लंबी लाइन व क ई  दावेदार है,  जैसा कि बाकी टिकट तो  एक का ही फाइनल होगा अन्य को मायुसी का दंश झेलना होगा । इस बार 2018 के विधानसभा चुनाव में मांधाता विधानसभा  से नारायण पटेल  कांग्रेस के विधायक बने थे । तब भी बीजेपी उम्मीदवार नरेंद्र सिंह तोमर व कांग्रेस उम्मीदवार  नारायण पटेल में कड़ा मुकाबला हुआ था । कांग्रेस विधायक नारायण पटेल द्वारा कांग्रेस छोड़ बीजेपी का दामन थामने के बाद आने वाले दिनों में होने वाले उपचुनाव में  पुन तय  होने वाले उम्मीदवारों में कांटे की टक्कर होना तय है , सभी  अपने अपने राजनीतिक आकाओं से संपर्क कर दिल्ली भोपाल भी एक करने से भी नहीं चूकेगे वही आने वाले दिनों में होने वाले चुनाव में दोनों दलों में किस प्रकार के समीकरण बैठते हैं , वह तस्वीर कुछ दिनों में साफ होगी पर एक बड़ा मुद्दा अभी से जोर पकड़ चुका है वह आम जनता में चर्चा का विषय है कि दोनों ही दलों में प्रबल संभावनाएं हैं कि विधानसभा टिकट व चुनाव को लेकर  विरोध, भितरघात और समन्वय का खतरा मंडरा सकता है, इन  मंडराने वाले बादल कौन छाट पाएगा यह तो आने वाला समय  बताएगा ।


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