।।  *सुप्रभातम्*  ।।
                ।।  *संस्था  जय  हो*  ।।
        ।।  *दैनिक  राशि  -  फल*  ।।
        आज दिनांक 03 अगस्त 2020 सोमवार संवत् 2077 मास श्रावण शुक्ल पक्ष की पूर्णिमा तिथि रात्रि 09:30 बजे तक रहेगी पश्चात प्रतिपदा तिथि लगेगी । आज सूर्योदय प्रात: काल 05:53 बजे एवं सूर्यास्त सायं 07:13 बजे होगा । उत्तरा षाढा नक्षत्र प्रातः 07:19 बजे तक रहेगा पश्चात् श्रवण नक्षत्र आरंभ होगा । आज का चंद्रमा मकर राशि मे दिन रात भ्रमण करते रहेंगे । आज का राहुकाल प्रातः काल 07:43 से 09:20 बजे तक रहेगा । अभिजीत् मुहूर्त दोपहर 12:09 से 01:01 बजे तक रहेगा । दिशाशूल पूर्व दिशा में रहेगा यदि आवश्यक होतो दर्पण देख कर यात्रा आरंभ करें । जय हो।

                    --:  *विशेष*  :--

आज भद्रा प्रातःकाल 09:29 बजे तक रहेगा । श्रावणी पूर्णिमा , सत्य पूर्णिमा , रक्षाबंधन भद्रा पश्चात् , शुक्ल  कृष्ण यजुर्वेदी उपाकर्म , संस्कृत दिवस , पंचम श्रावण वन सोमवार व्रत , नारोली पूर्णिमा । जय हो

                  *श्रावणी -*
श्रावणी पर्व से वेदाध्ययन का सीधा संबंध है। स्वाध्याय जीवन का अंग होना चाहिए। स्वाध्याय आर्यों के जीवन का एक महत्वपूर्ण अंग है। वेद का पढ़ना-पढ़ाना, सुनना-सुनाना आर्यों का परम धर्म है।
शतपक्षब्राह्मण में स्वाध्याय की प्रशंसा करते हुए लिखा गया है कि स्वाध्याय करने वाला सुख की नींद सोता है, युक्तमना होता है, अपना परम चिकित्सक होता है, उसमें इंन्द्रियों का संयम और एकाग्रता आती है और प्रज्ञा की अभिवृद्धि होती है। कहा गया है कि स्वाध्याय न करनेवाला अब्राह्मण हो जाता है। अतः प्रतिदिन स्वाध्याय करना चाहिए।
श्रद्धालु उनके पास आकर वेदाध्ययन और उपदेशों में अपना समय लगाते थे और ऋषिजनों की सेवा करते थे। इसलिए यह समय ऋषि तर्पण भी कहलाता है। यह वेदाध्ययन, श्रावण शुक्ल पूर्णिमा को आरंभ किया जाता था, अतः इसे *श्रावणी उपाकर्म* कहा जाता है।
पारस्करगृह्यसूत्र में लिखा है-
*'अथातोऽध्यायोपाकर्म।, ओषधीनां प्रादुर्भावे वणेन श्रावण्यां पौर्णमास्याम्‌।'*
मनुस्मृति में उपाकर्म और उत्सर्जन का आदेश दिया गया है-
*श्रावण्यां प्रौष्ठपद्यां वाऽप्युपाकृत्य यथाविधि।*
*युक्तश्छन्दांस्यधीयीत मासान्‌ विप्रोऽर्धपचंमान्‌।*
*पुष्ये तु छन्दसां कुर्याद्बहिरुत्सर्जनं द्विजः।*
*माघशुक्लस्य वा प्राप्ते पूर्वाह्वे प्रथमेऽहनि।*

अर्थात्‌ श्रावणी या भाद्रपदी पूर्णिमा को उपाकर्म करके साढ़े चार मास में ध्यानपूर्वक वेदाध्ययन करें। पुष्य नक्षत्रवाली पूर्णिमा में वेद का उत्सर्जन नामक कर्म ग्राम के बाहर जाकर करें या माघ शुक्ल के प्रथम दिन के पूर्वाह्व में करें।
चिरकाल के पश्चात वेद के पठन-पाठन का प्रचार न्यून हो जाने पर साढ़े चार मास तक नित्य वेदपारायण की परिपाटी गई और लोग प्राचीन उपाकर्म और उत्सर्जन के स्मारकरूप में श्रावण शुक्ल पूर्णिमा को एक ही दिन उपाकर्म तथा उत्सर्जन की विधियों को पूरा करने लगे।
काल के प्रभाव से इस पर्व पर वेद स्वाध्यायात्मक ऋषि तर्पण का लोप-सा हो गया। होमयज्ञ का प्रचार भी उठ गया।
आजकल श्रावणी कर्म का स्वरूप यह है कि धार्मिक आस्थावान्‌ यज्ञोपवीतधारी द्विज श्रावण शुक्ल पूर्णिमा को गंगा आदि नदी अथवा किसी पवित्र सरोवर तालाब या जलाशय पर जाकर सामूहिक रूप से पंचगव्य प्राशनकर प्रायश्चित संकल्प करके मंत्रों द्वारा दशविध स्नान कर शुद्ध हो जाते हैं।
तदनन्तर समीप के किसी देवालय आदि पवित्र स्थल पर आकर अरुन्धीसहित सप्तर्षियों का पूजन, सूर्योपस्थान, ऋथ्षतर्पण आदि कृत्य संपन्न करते हैं। तदुपरांत नवीन यज्ञोपवीत का पूजन, पितरों तथा गुरुजनों को यज्ञोपवीत दान कर स्वयं नवीन यज्ञोपवीत धारण करते हैं।

*रक्षाबंधन -*
सनातन परंपरा में किसी भी कर्मकांड व अनुष्ठान की पूर्णाहुति बिना रक्षासूत्र बांधे पूरी नहीं होती। प्रातः स्नानादि से निवृत्त होकर लड़कियां और महिलाएं पूजा की थाली सजाती हैं।
थाली में राखी के साथ रोली या हल्दी, चावल, दीपक व मिष्ठान्न आदि होते हैं। पहले अभीष्ट देवता और कुल देवता की पूजा की जाती है, इसके बाद रोली या हल्दी से भाई का टीका करके उसकी आरती उतारी जाती है व दाहिनी कलाई पर राखी बांधी जाती है।
भाई, बहन को उपहार अथवा शुभकामना प्रतीक कुछ न कुछ भेंट अवश्य देते हैं और उनकी रक्षा की प्रतिज्ञा लेते हैं। यह एक ऐसा पावन पर्व है, जो भाई-बहन के पवित्र रिश्ते को पूरा आदर और सम्मान देता है। रक्षाबंधन के अनुष्ठान के पूरा होने तक व्रत रखने की भी परंपरा है।
यह रक्षाबंधन का अभीष्ट मंत्र है :-
*'येन बद्धो बलि राजा दानवेन्द्रो महाबल |*
*तेन त्वामभिबध्नामि रक्षे मा चल मा चल' ||*

अर्थात जिस रक्षासूत्र से महान शक्तिशाली दानवेन्द्र राजा बलि को बांधा गया था, उसी रक्षाबंधन से मैं तुम्हें बांधता हूं, जो तुम्हारी रक्षा करेगा ।
              *रक्षाबंधन शुभ मुहूर्त*
      
       आज भद्रा प्रातःकाल 09:29 बजे तक रहेगा । सुबह 09:30 से 10:46 , दोपहर 01:37 से सायं 07:17 बजे तक , सायं 07:17 से 08:57 बजे तक श्रेष्ठ समय रहेगा ।

                  *ज्योतिषाचार्य*
          डाँ. पं. अशोक नारायण शास्त्री
          श्रीमंगलप्रद् ज्योतिष कार्यालय
245 , एम, जी, रोड ( आनंद चौपाटी ) धार , एम, पी,
                  मो, नं,  9425491351

                    *आज का राशिफल*

          मेष :~ साहित्य और कलात्मकता के लिए आज का दिन शुभ है । स्नेहीजन के साथ हुई भेंट से प्रसन्न होंगे । शत्रु और प्रतिस्पर्धीयों के साथ भावनाओं का संघर्ष होगा । कार्यालय में तथा ऊपरी अधिकारियों के समक्ष सावधानी बरते ।

          वृषभ :~ आज माता के स्वास्थ्य की चिंता रहेगी । स्थावर संपत्ति के दस्तावेज पर हस्ताक्षर करना टाले । नकारात्मक विचारों से बचे परंतु मध्याहन के बाद शारीरिक और मानसिक स्वास्थ्य में सुधार होगा ।सृजनात्मकता में वृद्धि होगी । आज कोई धार्मिक कार्य होगा ।

          मिथुन :~ कार्यसफलता से आप आज प्रसन्न रहेंगे । प्रतिस्पर्धी भी पराजित होंगे । परंतु मध्याहन के बाद घर में विसंवादिता का वातावरण रहेगा । परिवारजनों के साथ तूतू - मैंमैं हो सकती है और इससे मन में ग्लानि बढेगी । माता का स्वास्थ्य बिगडे़गा । मध्याहन से पूर्व भाग्यवृद्धि के संकेत है ।

          कर्क :~ लंबे समय की योजनाओं के विषय में सोचते - सोचते आप दुविधा में  रहेंगे । परिवार में वातावरण तनावपूर्ण रहेगा । निर्धारित कार्यों में अपेक्षा से कम सफलता मिलेगी । मध्याहन के बाद समय अच्छा रहेगा । शारीरिक और मानसिक स्वास्थ्य अच्छा रहेगा । भाई - बहेनों से लाभ मिलेगा ।

          सिंह :~ आज आप आत्मविश्वास से भरे रहेंगे । आप प्रत्येक कार्य दृढ निर्णयशक्ति से करेंगे । फिर भी क्रोध अधिक रहेगा , इसलिए मन शांत रखें । सरकारी कार्यों में लाभ होगा । परिवारजनों का सहयोग अच्छा मिलेगा । आय की अपेक्षा व्यय अधिक होगा ।

          कन्या :~ आज आपका मन भावनाशील रहेगा । चर्चा और विवाद से दूर रहे फिर भी किसी के साथ उग्रतापूर्ण व्यवहार हो सकता है । मध्याहन के बाद आप के अंदर आत्मविश्वास बढेगा । समाज में आपकी मान - प्रतिष्ठा बढेगी । फिर भी क्रोध पर संयम रखें ।

          तुला :~ व्यापार के क्षेत्र में आपको लाभ होगा । संतानों के सम्बंध सुमधुर रहेंगे । परंतु मध्याहन के बाद मानसिक और शारीरिक स्वास्थ्य बिगडेगा । उग्र चर्चा - विवाद से बचे । भ्रांति से दूर रहे । कानूनी विषयो में निर्णय सोच - समझकर करें ।

          वृश्चिक :~ दृढ़ मनोबल और आत्मविश्वास से आप प्रत्येक कार्य सरलतापूर्वक पूर्ण करेंगे । व्यवसाय और व्यापार में आपकी बुद्धि - प्रतिभा को प्रशंसित किया जाएगा । उच्च अधिकारीगण आपकी कार्यवाही से आनंदित होंगे और पदोन्नति की संभावना बढेगी । व्यापार में आर्थिक लाभ है । मित्रों से लाभ होगा ।

          धनु :~ आपका व्यवहार आज कुछ न्यायप्रिय रहेगा । हानिकर कार्यों से दूर रहे । क्रोध पर संयम रखे । लेकिन मध्याहन के बाद आपका दिन बहुत अच्छा और सफलताभरा रहेगा । आपके कार्य सरलतापूर्वक पूर्ण होंगे । व्यवसाय में उच्च अधिकारीयो को प्रोत्साहन आनंददायी होगा । पदोन्नति होगी ।

          मकर :~ आजके दिन के लिए संभलकर चले । स्वास्थ्य के विषय में लापरवाह न रहे और निषेधात्मक विचारों को अपने पर हावी न होने दे । आकस्मिक व्यय के लिए तैयार रहे । फिर मध्याहन के बाद परिस्थिति में कुछ हलकापन होगा । स्वभाव में क्रोध और उग्रता रहेगी , फिर भी उस पर संयम रखे ।

          कुंभ :~ सांसारिक प्रश्नों और विषयों के लिए आज उदासीनवृत्ति से व्यवहार करेंगे तो अच्छा रहेगा । अदालती कार्यवाही से संभलकर चले । सामाजिक दृष्टि से अपमानित न हो सावधानी बरते । शारीरिक स्फूर्ति और प्रफुल्लितता का अभाव रहेगा । प्रभुभक्ति और आध्यात्मिकता आपको मानसिक शांति देंगे ।

          मीन :~ आपका मन आज चिंतामुक्त रहेगा । शंका - कुशंकाओं के कारण प्रफुल्लितता का अनुभव नहीं होगा । आपके कार्यो में विध्न होने से कार्यपूर्ति में विलंब होगा ।  दांपत्यजीवन में तकरार लंबे समय तक न रहे सावधानी रखे । व्यापार में भागीदारों से संभलकर रहे । सांसारिकता से मन अलिप्त रहेगा । ( डाँ. अशोक शास्त्री )

।।  शुभम्  भवतु  ।।  जय  सियाराम  ।।
।।  जय  श्री  कृष्ण  ।।  जय  गुरुदेव  ।।


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