*झाबुआ~क्या मध्यम वर्गीय व्यापारी एवं मेहनत कश इंसान आगे आएंगे*~~

*आखिर कैसे बनेगा प्रदेश आत्मनिर्भर*~~

झाबुआ जिला ब्युरो दशरत सिंह कट्ठा...9685952025~~

माननीय प्रधानमंत्री एवं प्रदेश के मुख्यमंत्री दोनों ही आत्मनिर्भर भारत का नारा दे रहे हैं लेकिन प्रदेश शासन की जटिलता को देखते हुए खाली कागज पर ही आत्मनिर्भर बनाना संभव है। जब तक हमारे मध्यम वर्गीय व्यापारी एवं मेहनत कश इंसान आगे नहीं आएंगे, समृद्धि हासिल नहीं कर पाएंगे तब तक आत्मनिर्भर प्रदेश एवं देश का सपना पुरा हो पाना बहुत ही मुश्किल है। जनता पिछले पाँच माह से कोरोना जैसी महामारी से लड़ रही हैं, व्यापार बंद है, रोजगार नहीं है, खर्चे सभी चालू है लाइट बिल हो, टेलीफोन बिल हो, दुकान किराया हो, कर्मचारी का वेतन हो सभी से निपटते हुए कोरोना से भी निपटना, मध्य वर्गीय के लिए काफी मुश्किल भरा समय है ऐसी स्थिति में व्यापारी को एक राहत भरी खबर मिलती है कि स्कूल ड्रेस का सप्लाई कपड़ा व्यापारी द्वारा हर ब्लाक स्तर पर किया जाएगा एवं उसकी सिलाई का कार्य महिला स्वयं सहायता समूह द्वारा किया जाएगा लेकिन इन्हें निराशा तब हाथ लगती है जब टेंडर फॉर्म के ऊपर नियम को पढ़ा जाता है। नियम के अनुसार कपड़े से लगाकर धागा चैन बटन हुक सहित कंप्लीट राशि टेंडर में भरना है जिस के नियम अनुसार आपका टर्नओवर प्रतिवर्ष दो करोड़ का होना आवश्यक है, जीएसटी नंबर होना आवश्यक है एवं पिछले 3 वर्ष के रिटर्न भरे हुए होना आवश्यक है ऐसी स्थिति में जिले के कुछ ही नहीं अपितु सभी व्यापारीयों का इस प्रक्रिया को पूरा करने में सफल होना मुश्किल है जब इसकी सूचना स्थानीय विधायक वीरसिंह भुरिया को मिली तो उन्होंने तुरंत व्यापारीयों की सुध लेते हुए झाबुआ कलेक्टर को पत्र लिखकर इस जटिल प्रक्रिया मे थोड़ा सुधार किए जाने की बात कही ताकि जिले के व्यापारी भी इस टेंडर प्रक्रिया में हिस्सेदारी ले सके। शुक्रवार सुबह टेंडर खुलने के समय बेड़ावाली रोड पर आजीविका मिशन के भवन में जिले द्वारा बनाई गई टीम जिसमें सीओ मेघनगर, बीआरसी मेघनगर एवं तहसीलदार मेघनगर के साथ फॉरेस्ट विभाग के अधिकारी को जोड़ा गया लेकिन वहां का नजारा जब देखा गया तो तकनीकी लिफाफा खोलते वक्त शासन द्वारा जो निर्धारित पेपर्स मांगे गए थे उसमें पिछले 3 वर्ष के रिटर्न अर्थात 2017-18,18-19, 19-20 का रिटर्न देना जरूरी है फाइनैंशल ईयर के अनुसार,  लेकिन एसेसमेंट ईयर के अनुसार इन्हीं का रिटर्न 1 साल बाद भरा जाता है तो वह वर्ष चेंज होकर 18-19, 19-20 और 20-21 का मांगा जाएगा लेकिन पिछले वर्ष का ऑडिट अभी होने के कारण यह रिटर्न व्यापारियों के टेक्निकल लिफाफे में नहीं निकले। अब ऐसी स्थिति में टेक्निकल टीम बनाई गई जिन्हें कन्फ्यूजन के साथ-साथ अनुभव भी नहीं था, उन्होंने भी अपना पल्ला झाड़ते हुए झंझट से दूर होना चाहा और सभी लिफाफे कलेक्टर महोदय के निर्णय पर छोड़ दिए। क्योंकि फोरम पूरा नहीं हो रहा था ऐसी स्थिति में एक ही व्यापारी पार्टीसिपेट कर पाया था बाकी सब व्यापारी ने विरोध करते हुए इसे कैंसल करने को कहा अब आगे देखना है कि कलेक्टर द्वारा क्या निर्णय लिया जाता है एवं इस प्रक्रिया को कैसे पूरा किया जाता है। या तो मेघनगर ब्लॉक में फिर से टेंडर होंगे या फिर बचे हुए  एक व्यापारी को दिया जाता है इस प्रक्रिया में भाग लेने के लिए दाहोद भीलवाड़ा इंदौर जैसे शहर से व्यापारी आए थे, जो निश्चित ही सभी तरह से सक्षम है और भी सक्षम बनेंगे लेकिन छोटे व्यापारी गड्ढे में उतर जाएंगे। अब देखना यह है कि यें व्यापारी पूरे नियम अनुसार पारदर्शिता को ध्यान में रखते हुए वही कपड़ा वही केटेगरी का दे पाएंगे या फिर पूरे बाँस पोले की तर्ज पर पिछले वर्ष की तरह गुणवत्ताहिन माल देकर कई नेताओं और अधिकारीयों की जेबें भरी जाएगी।


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