*कुक्षी~रक्षाबंधन के पर्व पर कोरोना का असर नहीं दिखी दुकानों पर रौनक*~~

*रक्षाबंधन पर्व पर मिठाई की मिठास रही फीकी*~~

*प्रतिवर्ष की तरह इस वर्ष नहीं दिखाई दिया उत्साह*~~

*सत्येंद्र मिश्रा*कुक्षी~~

कुक्षी -रक्षाबंधन के पर्व को भाई और बहन के अटूट प्रेम की निशानी का प्रतीक माना जाता है। इस त्यौहार के लिए उत्साह हर किसी के दिल में साफ दिखाई देता है लेकिन बाजारों में इसकी रौनक नहीं देखी जा रही है। इस बार रक्षाबंधन त्यौहार पर कोरोना महामारी का असर साफ दिखाई दे रहा है। आमतौर पर रक्षाबंधन में लगभग आठ दिन पहले से रंग बिरंगी राखियों से बाजारों में रौनक दिखने लगती थी लेकिन इस बार ऐसा कुछ भी नहीं दिखाई दिया वहीं रक्षाबंधन के  बाजारों पर कोरोना महामारी का बहुत बुरा असर पड़ा है। जिसके चलते राखियों की दुकानो मे जो प्रतिवर्ष चहल-पहल दिखाई देती थी वह इस वर्ष नहीं दिखाई दी राखियों की दुकान पर आज रक्षाबंधन के पर्व पर इक्का-दुक्का लोग दिखाई दिए रक्षाबंधन पर्व पर दुकानदारों में व्यापार को लेकर जो उत्साह प्रतिवर्ष दिखाई देता था वह इस वर्ष नहीं देखने को मिला वहीं रक्षाबंधन पर्व पर मिठाई की दुकानों पर जो भीड़ देखने को मिलती थी वह भी इस बार नहीं दिखाई दी राशियों की मिठास इस वर्ष फीकी दिखाई दी सिनेमा चौपाटी स्थित कृष्णा स्वीट्स के शांतिलाल धनगर ने बताया प्रतिवर्ष रक्षाबंधन पर जो व्यापार होता रहा है वह इस वर्ष नहीं है कोरोना वायरस के चलते रक्षाबंधन के त्यौहार पर बहुत बड़ा असर पड़ रहा है।

*बस स्टैंड सहित मुख्य बाजारों पर प्रति वर्ष की तरह इस वर्ष नहीं दिखाई दिया रक्षाबंधन का उत्साह*
बसों के आवागमन बंद होने के कारण बस स्टैंड पर जो चहल-पहल रक्षाबंधन के पर्व पर दिखाई देती थी वह इस बार नहीं दिखाई दी शहर के विजय स्तंभ चौराहे से लगाकर सिनेमा चौपाटी तक राखियों का बाजार भरा हुआ दिखाई देता था लेकिन इस वर्ष कम दुकाने दिखाई दी शहर के जवाहर चौक में प्रतिवर्ष राखियों को लेकर जो व्यापार दुकानदारों द्वारा किया जाता था वह इस वर्ष नहीं दिखाई दिया


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