झाबुआ~मनरेगा योजना के अंतर्गत आखिर मजदूरो के स्थान पर मशीनो से से काम करने का लगाया आरोप-तालाब निर्माण में आरईएस एसडीओ धीरत कुमार की मनमानी ~|





झाबुआ। संजय जैन~~

एक तरफ  देश कोरोना वायरस से जूझ रहा है वही दूसरी और ग्रामीण क्षेत्र के लोग विशेषकर मजदूरी कर जीवन यापन करने वाले आमजन लॉकडाउन के बाद रोजगार न मिलने के कारण दर-दर भटकने को मजबूर है शासन द्वारा मनरेगा के तहत कार्य इसलिए प्रारंभ किए जाते हैं ताकि ग्रामीणों को रोजगार के अवसर अपने गांव में ही मिल सके। लेकिन झाबुआ जिले के राणापुर तहसील अंतर्गत तालाब निर्माण कार्य में आरईएस झाबुआ के अनुविभागीय अधिकारी द्वारा गांव के लोगों को रोजगार न देते हुए, तालाब निर्माण कार्य को मशीनों से पूण करवाया गया द्यसाथ ही साथ फर्जी मस्टर लगाकर,फर्जी ट्रैक्टरों के बिलो को लगाकर भुगतान किया गया और इस तरह शासन को चुना लगाया गया। 




-मशीनों से काम करने का आरोप लगाया....





झाबुआ जिले की राणापुर तहसील अंतर्गत ग्राम पंचायत भूतभयडा के ग्राम थुवादरा के ग्रामीणों ने ने ग्रामीण यांत्रिकी सेवा संभाग झाबुआ के अनुविभागीय अधिकारी धीरज कुमार अखंड पर ग्राम पंचायत अंतर्गत तालाब निर्माण पर गांव के लोगों को रोजगार न देते हुए मशीनों से काम करने का आरोप लगाया। गांव की महिलाओं और पुरुषों ने आरोप लगाते हुए यह भी बताया जबकि शासन प्रशासन द्वारा निर्देश है कि मनरेगा के तहत जो भी निर्माण कार्य हो- चाहे रोड निर्माण हो,चाहे तालाब निर्माण हो ,चाहे नाला निर्माण हो या अन्य निर्माण कार्य हो ,इन निर्माण कार्य के लिए व रोजगार के अवसर गांवों में ही उपलब्ध कराने के लिए उसी गांव के लोगों को ही इस तरह के निर्माण कार्यों में रोजगार दिया जाना चाहिए ,ताकि ग्रामीणों को रोजगार के लिए भटकना ना पड़े।




-ट्रैक्टर चालको ने  निर्माण पर कार्य किया उन्हें भुगतान प्राप्त नहीं हुआ....





ग्रामीणों का यह भी कहना है कि इन निर्माण कार्यों में गांव में ही उपलब्ध संसाधन जैसे ट्रैक्टर,ट्राली,टैंकर आदि का ही उपयोग किया जाना चाहिए। ताकि ग्रामवासियों को संसाधनों से आय प्राप्त हो सके। ग्रामीणों ने आरईएस के एसडीओ धीरज कुमार अखंड पर आरोप लगाते हुए कहा कि शासन के नियमों के विपरीत करीब 50 लाख की लागत से बनाए जाने वाला तालाब निर्माण कार्य पर मजदूरों से कम और मशीनों से ज्यादा काम किया गया। गांव के लोगों को रोजगार देने के बजाय मशीनों से काम पूर्ण किया गया। गांव की महिलाओं ने यह भी आरोप लगाया कि उन्होंने 9 सप्ताह तक इस तालाब निर्माण कार्य पर काम किया ,लेकिन भुगतान अभी तक प्राप्त नहीं हुआ। इसके अलावा ना ही गांव में उपलब्ध संसाधन ट्रैक्टर,ट्राली आदि का उपयोग उस निर्माण कार्य हेतु किया। ट्रैक्टर चालको ने तालाब निर्माण पर कार्य किया उन्हें भुगतान प्राप्त नहीं हुआ। 




क्या अधिकारी यू ही अपनी मनमानी कर मशीनों से काम करता रहेगा और भुगतान भी करता रहेगा.....?





जनपद सदस्य मथियास भूरिया ने यह भी आरोप लगाया कि जब इसके तालाब निर्माण कार्य हेतु भुगतान, पेमेंट की बात आई तो मजदूरी के नाम पर अनुविभागीय अधिकारी ने फर्जी मास्टर लगाकर,जिसमें कई ऐसे लोगों के नाम है जिन्होंने इस तालाब निर्माण पर कार्य ही नहीं किया है या मजदूरी ही नहीं की उनके नाम मस्टर में शामिल है । मसटरो मे थादला ब्लॉक ,पेटलावद ब्लॉक ,झाबुआ ब्लॉक आदि अन्य ब्लाक के मजदूरों के नाम शामिल हैं । कई ऐसे ट्रैक्टरों के बिल भी लगे है जिन्होंने कभी तालाब निर्माण पर कार्य ही नहीं किया है। लेकिन उनके बिल भुगतान हेतु लगाए गए हैं। यह भी आरोप लगाया कि अनुविभागीय अधिकारी ने मशीनों से काम कर फर्जी मस्टर लगाकर,ट्रैक्टरों के बील लगाकर भुगतान किया है और गांव के लोगों को रोजगार के नाम पर भ्रमित किया। इस तरह की कार्यप्रणाली के कारण ही ग्रामीणों को रोजगार के लिए पलायन करना पड़ता है और कई बार दर-दर की ठोकरें भी खाना पड़ती है । कई बार गांव में रोजगार उपलब्ध न होने के कारण गांव के लोग ,अन्य प्रदेशों में रोजगार हेतु जाते हैं । क्या शासन प्रशासन इस ओर ध्यान देकर इस तरह के अधिकारियों पर कोई कार्यवाही करेगा और फर्जी मस्टरो के भुगतान की भी जांच पड़ताल कर ,ग्रामीणों को रोजगार न उपलब्ध कराने के लिए दोषी पाए जाने पर कोई कार्रवाई करेगा या फिर यह अधिकारी यू ही अपनी मनमानी कर मनरेगा के तहत मशीनों से काम करता रहेगा और भुगतान करता रहेगा.....?




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