झाबुआ~पीने के पानी के तरस रहे भर्ती हुये ग्रामीण मरीज-अस्पताल प्रबंधन का नही है इस ओर ध्यान~~





सैया भये कोतवाल तो अब डर काहे का कहावत हो रही चरितार्थ....





झाबुआ। संजय जैन~~

 सैया भये कोतवाल तो अब डर काहे का कहावत जिला अस्पताल पर पूर्ण रूप से सटिक साबित हो रही है। जिला चिकित्सालय में इन दिनो रावण राज चल रहा है। वही अधिकारियो से ज्यादा कर्मचारियो को रौब इन दिनो दिखाई दे रहा है। जिम्मेदार अधिकारी अपने कार्यो से मुंह मोड रहे है ओर कर्मचारी उसी का फायदा उठाकर मौज कर रहे है। 




-चुना लगा रहे है शासन के पैसो को ....





पूर्व में जिला चिकित्सालय की अव्यवस्थाओ के बारे में अखबारेा मे प्रकाशन किया गया था कि भर्ती मरिजो को पीने के पानी तक के लिये उन्हे दूर दराज तक जाना पडता है। जहां एक ओर जिला अस्पताल पानी के नाम पर महंगे आरओ सिस्टम लगाकर शासन के पैसो को चुना लगा रहे है। वही गरीब मरिजो को पीने का पानी तक नसीब नही हो पा रहा है। ऐसे में जिला अस्पताल की अव्यवस्थाओ पर संवाल खडे उठते है। आखिर क्यो गरीब मरिजो को चाहे वह भर्ती हो या नही उन्हे पीने का पानी नही मिल पा रहा है.......? 




-पूर्व कलेक्टर चन्द्रशेखर बोरकर जेसे निर्डर ओर ईमानदार अफसरो की जरूरत.....





जिला चिकित्सालय में जहां इन मरिजो के साथ भेदभावपूर्व व्यवहार किया जा रहा है। वही दूसरी ओर जिला चिकित्सालय के एक वार्ड बॉय भी आरओ का पानी पी रहे है। यही नही जिला चिकित्सालय में अव्यवस्थाओ को घेरा इतना बडा हो चुका है। इसे भरने के लिये पूर्व कलेक्टर चन्द्रशेखर बोरकर जेसे निर्डर ओर ईमानदार अफसरो की जरूरत है। जिससे की पुरा जिला चिकित्सालय कापता था। लेकिन आज ये हालत हो चुकी है कि अधिकारियो को अपने काम ओर निजी प्रैक्टिसो से फुरसत नही है ओर कर्मचारी अपने अनुसार कार्य कर अच्छा खासा पैसा कमाने मे लगे हुये है। वही शासन की योजनाओ के साथ ही शासन के पैसो को बर्बाद कर रहे है। 




-नही सुधर रहे जनरेटर....





जिला चिकित्सालय में पूर्व में अखबारो के माध्यम से जनरेटर के विषय मे वरिष्ठ अधिकारियो से चर्चा की गई थी जिस पर से उनके द्वारा सटिक उत्तर नही मिलने के कारण इस मामले की कोई जांच नही हो पाई। प्राप्त जानकारी के अनुसार जिला चिकित्सालय में तीन जनरेटर बाहर पडे हुये है जिनके कनेक्शन अभी तक जिला अस्पताल मे नही किये हुये है। इस पर से यदि कभी दो से चार घंटो के लिये विद्युत प्रवाह बंद होता है तो मरिजो को परेशानी के अलावा कुछ नही मिलेगा। जिस पर से यदि कोई व्यक्ति आईसीयू मे यदि इमरजेन्सी में भर्ती हो तो है तो उसे भी जिला अस्पताल की इस अव्यवस्था का खामियाजा भूगतना पडेगा। 





-क्या जिला अस्पताल की व्यवस्था मे कोई सुधार होगा?...





वर्तमान मे कोरोना वायरस संक्रमण का प्रकोप दिनो दिन बढ रहा है। वही अधिकारी एवं कर्मचारियो ने इसे एक बहाना बनाकर अपने कार्य से सभी का ध्यान हटाने जैसी निति अपना रखी है। जिस पर से लोगो का ध्यान उन पर नही जाये ओर वे अपनी मर्जी के हिसाब से ही अपना काम करे जिसमे किसी की भी दखलअंदाजी ना हो। अब देखना यह है कि आने वाले दिनो मे क्या जिला अस्पताल की व्यवस्था मे कोई सुधार आता है या फिर इसी तरह अव्यवस्थाओ की जडे ओर मजबूत होगी। 




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