किसी के ज़ख़्म पर चाहत से
         पट्टी कौन बाँधेगा
  अगर बहनें नहीं होंगी तो
          राखी कौन बाँधेगा (सैयद अखलाक अली) l

जान से ज्यादा प्यारा था,भाई हमारा  यह लेख उन बहनों के लिए जिन्होंने अपने भाइयों को खोया है ,रक्षाबंधन वाले दिन बहुत याद आएंगे भाई हमारे।
बहन बार-बार दरवाजे की ओर  ताकेगी, जरा सी आहट पर दरवाजे की तरफ दौड़ती हुई जाएगी फिर याद आएगा भाई तो अब नहीं रहा, किसको बंधेगी राखी, आंखों में आंसू ,दिल में भाई की तड़प,कभी भाई के फोटो को उठा कर चूमती, कभी बचपन की यादों में खो जाती, बचपन के दिन याद आ जाते  भाई को राखी बांधना और उपहार के लिए भाई से लड़ना ।
“कुछ खट्टी कुछ मिट्ठी” कुछ ऐसी ही होती है ना, भाई-बहन की जोड़ी? पर भाई-बहन के इस प्यार भरे रिश्ते में दरार डाली चीन ने पाकिस्तान ने आतंकवाद ने और कोरोना ने ,हमारे सैनिक जिन्होंने देश के नाम पर अपनी जान कुर्बान कर दी, चीन हो,या पाकिस्तान,या हो आतंकवाद, इनसे मुकाबला करते हुए कई हमारे सैनिक शहीद हुए,सलाम है, शहीद हुए हमारे सैनिकों को ।
वही हमारे खाकी वर्दी और सफेद कोर्ट के नायक  जिन्होंने इस महामारी में अपनी जाने गवाई आज उनकी बहने भी बहुत याद करेंगी अपने भाइयों को, जो देश के नाम पर शहीद हुए या जिनकी कोरोना ने ली जान,जब देखेंगे दूसरी बहनों को अपने भाई को राखी बांधते हुए आंखों से आंसू छलकते जाएंगे ।
चीन ने छीने सैनिक हमारे, कोरोना महामारी ने 37364  लोगों की ली जान, कई डॉक्टर हुए शहीद, नही रहे कई हमारे जांबाज पुलिस के जवान ।
जब जब रक्षाबंधन आएगा,दिल में भाई की यादों की चिंगारियां सुलगती रहेंगी, राखी को देखकर आंसू बहते रहेंगे, भाई पर गर्व होगा जिसने देश के लिए  न्यॊछावर कर दी अपनी जान ।
वही चार बहनों में इकलौता भाई सुशांत सिंह राजपूत जिसने हाल ही में आत्महत्या की थी । हमारे देश के नेताओं को एक और  चुनावी मुद्दा मिल गया। बिहार सरकार जो कोरोना और बाढ़ जैसे मुद्दों में बुरी तरीके से नाकाम हुई है, बिहार में कोरोना ने तबाही मचा दी ,और स्वास्थ्य व्यवस्थाओं की कलई  खुल गई हैं । बिहार में बाढ़ की वजह से हजारों परिवार बर्बाद हो गए ,कोरोना और बाढ़ से जनता का ध्यान भटकाने के लिए, बिहार सरकार को सुशांत सिंह राजपूत की आत्महत्या का सहारा लेना पड़ रहा है । सुशांत सिंह राजपूत का कमरा अंदर से बंद था, फंदे पर लटका हुआ था उसका शव,कमरे से कोई सुसाइड नोट बरामद नहीं हुआ ना ही कमरे में कोई हथियार पुलिस ने बरामद  किया, घर के कोने कोने में सीसीटीवी कैमरे लगे हुए थे ,सीधा-सीधा आत्महत्या का मामला था, पर इस मामले को पेचीदा बनाते हुए हत्या का नाम दिया जा रहा है, वही हमारे देश में हर घंटे 3 लोग आत्महत्या करते हैं, पर सुशांत सिंह राजपूत की आत्महत्या कहीं ना कहीं बिहार चुनाव का मुद्दा बनता नजर आ रहा है, नेताओं ने फैसला कर लिया हैं की सुशांत सिंह राजपूत के नाम की फसल चुनाव में काटेंगे । मुझे संवेदना है, सुशांत सिंह राजपूत के पिता एवं बहनों के लिए पर सुशांत की तरह बहुत सारे लोग आत्महत्या करते हैं, जिन की फाइलें बंद कर दी जाती है। मैं ऊपर वाले से यही दुआ करूंगा सुशांत सिंह राजपूत के पिता एवं बहनों को हिम्मत दे इस दुख भरी घटना का सामना करने के लिए ।
अब हम बात करते हैं हमारे देश के सच्चे नायकों की जिन्होंने इस महामारी में अपनी जिंदगी को  देश की जनता की सेवा में समर्पित कर दिया है, डॉक्टर  पुलिस के जवान और देश की सीमाओं पर दिन-रात डटे हमारे सैनिक 
भारत का राष्ट्रीय प्रतीक  स्तंभ पर शेर खड़े हैं , यह शेर भारतीय सैनिक,पुलिस और डॉक्टर के हैं ऐसा मेरा मानना है ।
सैनिक,पुलिस और डॉक्टर जो अपने कार्यो के प्रति वफादार हैं, देश के लिए अपनी जान को न्यॊछावर करने के लिए हर पल तैयार । खाकी कफन ओढे हमारे पुलिस के जवान 365 दिन काम करते हैं। कोई छुट्टी नहीं इनको कोरोना  महामारी में ।
आओ आओ कोरोना के खिलाफ  रपट लिखवाए इस को सूली पर चढ़ाए इस कोरोना ने छीना बहुत सारी बहनों से भाइयों को ।
कोरोना  महामारी ने छीनी त्यॏहारों की रौनक  फीकी रही ईद अब रक्षाबंधन की बारी, काहे को पीछे पड़े हो कोरोना महाराज लौट जाओ अपने घर चीन ।
   *खुशनसीब हैं, वो जो वतन*
           *पर मिट जाते हैं ।*
     *मर कर भी वो लोग अमर*
              *हो जाते हैं ।*
    *करता हूँ ,तुम्हे सलाम ऐ*
       *वतन पर मिटने वालो ।*


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