*19 साल के बाद दो अश्विन माह का अधिमास, साथ मे चतुर्मास* ( डाँ. अशोक शास्त्री )

            19 वर्षों बाद दो अश्विन माह का अधिमास इस साल मिल रहा है। ऐसे में इस साल श्राद्ध पक्ष के तुरंत बाद नवरात्र पूजन नहीं शुरू होंगे, बल्कि एक महीने का अंतर रहेगा । मालवा के प्रसिद्ध ज्योतिषाचार्य डाँ. अशोक शास्त्री ने एक चर्चा में बताया कि वर्तमान विक्रम संवत 2077 है। इस वर्ष आश्विन मास में अधिमास पड़ा है। इससे पहले 2058 और 2039 में आश्विन मास में अधिमास का योग मिला था। अब 2096 विक्रम संवत में आश्विन मास में अधिमास आएगा। लगभग 19 साल के अंतराल पर मध्यमान से आश्विन मास में अधिमास आता है। उसके अनुसार साल 2001 के 19 साल बाद 2020 में यह योग बना है। अब यह योग 2039 में फिर मिलेगा।

             *पांच महीने का चतुर्मास*
ज्योतिषाचार्य डाँ. अशोक शास्त्री के अनुसार 19 साल के बाद दो अश्विन मास का विशेष योग मिल रहा है। निर्णय-सिंधु ग्रंथ के अनुसार अधिमास में भी श्राद्ध करने का अवसर मिलेगा पर तिथि को शुद्ध मास में ही ग्रहण करना उचित रहेगा। पं.सियाराम तिवारी अनुसार, इस साल चतुर्मास 5 महीने का है, जो 1 जुलाई से शुरू होकर 25 नवंबर तक चलेगा। 17 सितंबर को पितृ विसर्जन से श्राद्ध क्रम विराम लेंगे ।

*18 सितंबर से शुरू होगा अधिकमास*
आश्विन महीने में अधिमास 18 सितंबर से शुरू होकर 16 अक्टूबर तक चलेगा। इसके कारण श्राद्ध अनुष्ठान के बाद तुरंत नवरात्र पूजन नहीं शुरू हो सकेंगे। नवरात्र 17 अक्टूबर से शुरू होंगे। इस क्रम में 26 अक्टूबर को दशहरा और 14 नवंबर को दीपावली होगी। इसके बाद 25 नवंबर को देवउठनी एकादशी के साथ ही चातुर्मास समाप्त होगा।

                *क्या है अधिमास?*
ज्योतिषाचार्य डाँ. अशोक शास्त्री ने बताया कि हिंदू पंचांग के अनुसार सूरज के आधार पर साल की गणना 365 दिन और करीब 06 घंटे की होती हैं । वहीं चंद्र के आधार पर साल 354 दिन का होता हैं । दोनो का अंतर लगभग 11 दिनों का आता है । हर तीन वर्ष के अंतर को एक माह बढाकर दूर कर लिया जाता हैं । इसलिए उसे अधिमास कहा जाता हैं । ( डाँ. अशोक शास्त्री )

                  *ज्योतिषाचार्य*
          डाँ. पं. अशोक नारायण शास्त्री
         श्री मंगलप्रद् ज्योतिष कार्यालय
245, एम. जी. रोड ( आनंद चौपाटी ) धार , एम. पी.
                  मो. नं.  9425491351

               *--:  शुभम्   भवतु  :--*


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