झाबुआ~बनें जागरूक- प्लाट खरीदी के समय विशेष रूप से इन बातों का रखें ध्यान.....मुख्यत: जिसके नाम ज़मीन हो उसी के साथ अपना अनुबंध आवश्यक रूप से करे.~~





प्लॉटिंग करते वक्त बिजली,पानी,सड़क जैसी मूलभूत सुविधाओं का नहीं रखा जा रहा ध्यान,इससे प्लॉट लेने वाले होते हैं परेशान.~~





झाबुआ। संजय जैन~~

जिले में खेती की जमीन पर प्लॉटिंग का कारोबार जोरशोर से चल रहा है। खेतों में कॉलोनियां ऐसी बनाई जा रही हैं,जहां डायवर्सन-कृषि भूमि को आवासीय में बदलने की अनुमति नहीं कराया गयी है। अधिकतर ने टाउन एंड कंट्री प्लानिंग की अनुमति भी नहीं है। ग्राहकों को सब्जबाग दिखाकर प्लॉट बेचे जा रहे हैं लेकिन अफसर इस ओर कतई गंभीर नहीं हैं। 




-क्या है डायवर्सन-परिवर्तन...?





मध्यप्रदेश भू राजस्व संहिता में डायवर्सन का उल्लेख किया गया है। इसमें बताया गया है कि जब कृषि योग्य भूमि को कॉमर्शियल रूप में उपयोग किया जाता है,तो इसके लिए एक निर्धारित शुल्क शासन को जमा करनी होती है। उसे ही डायवर्सन शुल्क कहते हैं। इसको ही बोलचाल की भाषा में लोग डायवर्सन-परिवर्तन कहते हैं। खेती की भूमि का कॉमर्शियल उपयोग ही भूमि का डायवर्सन कहा जाता है। 




-आसानी से आ जाते झांसे में गरीब और मध्यमवर्गी परिवार के लोग.....





कॉलोनाईजरों पर अंकुश लगाने के लिए स्थाई रूप से कोई हल नहीं निकल सका है। अवैध कालोनाईजरों की झांसे में गरीब और मध्यमवर्गी परिवार के लोग आसानी से आ जाते हैं। कम कीमत या किश्तों में प्लाट देने की स्कीम के चलते ये लोग प्लाट तो ले लेते हैं लेकिन इसके बाद सुविधाओं के लिए परेशान होते रहते हैं। 




-रजिस्ट्री पर लगे रोक .....





अवैध कॉलोनियों में प्लाट लेने वाले लोग मकान की अनुमति न मिलने से परेशान होगे। यदि प्रशासन अवैध कॉलोनियों पर रोक लगाना चाहता है,तो रजिस्ट्री पर ही रोक लगाना चाहिए। रोकते भी है प्रशासन रजिस्ट्री से मिलने वाला राजस्व तो कमा कमाना चाहता है ,लेकिन लोगों को मकान बनाने से रोकते भी है। 




-यहां बनाई जा रही हैं कॉलोनी,डायवर्सन नही कराया-बोर्ड लगाकर खेतों में शुरू कर दी प्लॉटिंग ....





जिले में मुख्यत:बाढ़कुआ,रतनपुरा,कॉलेज रोड़,उदयपुरिया,हाउसिंग बोर्ड के पीछे और किशनपुरी इन जगहों पर रहवासी अधिक होने के कारण यहां पर अवैध तरीके से कॉलोनियों और मकान बनाने का काम किया जा रहा है। ऐसा ही व्यापार जिले में थांदला,पेटलावद,मेघनगर एवं राणापुर में भी धड़ल्ले से चल रहा है जिसकी ओर देखने वाला कोई नही है। खेती की जमीन को लेकर प्लाट बेचे जा रहे हैं। 





                                    ***** यह है कॉलोनी बनाने के नियम .......*****





-पर्याप्त चौड़ी सड़क की व्यवस्था। 





-पीने के पानी और बिजली की सुविधा। 





-कॉलोनी में पार्क के लिए जगह होनी चाहिए। 





-राजस्व विभाग नजूल की फीस जमा करना। 





-प्लॉट की भूमि का डायवर्सन होना चाहिए। 





-गृह निर्माण समिति रजिस्टर्ड होनी चाहिए। 





-गांव व नगर निवेश-टीएंडसीपी से नक्शा पास होना चाहिए। 





-कुछ प्लाट पिछड़े और गरीब वर्ग के लिए आरक्षित होना चाहिए। 





                             ****** बनें जागरूक- खरीदी के समय रखें ध्यान ......*****





-भू-स्वामित्व संबंधी राजस्व अभिलेख हैं या नहीं। 





-भूमि का व्यय परिवर्तन आदेश की प्रति जरूर देखें। 





-कॉलोनाइजर का रजिस्ट्रेशन प्रमाण-पत्र है या नहीं। 





-टाउन ऑफ कंट्री कार्यालय से अनुमोदित मानचित्र। 





-नगर पालिका, नगर परिषद,ग्राम पंचायत की कालोनी निर्माण संबंधी स्वीकृति। 





-नगरीय निकाय में जमा शुल्क की रसीदें। 





-अनुमति के अनुरूप ही भवन या कॉलोनी निर्माण संबंधी जानकारी। 





-मुख्यत: जिसके नाम ज़मीन हो उसीके साथ अपना अनुबंध आवश्यक रूप से करे.....।  





                                            




अवैध कॉलोनियों और अतिक्रमण के विरुद्ध चलाएंगे अभियान ......





क्षेत्र में अवैध कॉलोनियों के निर्माण और अतिक्रमण को रोकना हमारे एजेंडे में है। कस्बे में अवैध कॉलोनियों और अतिक्रमण के खिलाफ  कार्रवाई का अभियान चलाया जाएगा।  





..........एम .एल .मालवीय-एसडीएम




Post A Comment:

0 comments: