झाबुआ~आखिर कहां से आ रहीं नाईट्रावेट की गोलियां~~





नाईट्रावेट के नशे में अभी भी बेखोफ हो रहे अपराध-पुलिस की पकड़ से अभी भी ऐसे युवा बाहर ~~





पर्चेी बिना दवाएं नहीं बेचने के सख्त निर्देश के बाद भी मेडिकल दुकानों में आसानी से उपलब्ध,एमआरपी से अधिक करते हैं वसूली~~





झाबुआ। संजय जैन~~

जिले में नाईट्रावेट जैसे खतरनाक पदार्थ की अवैध तस्करी अभी भी बेखोफ  जारी है। पुलिस के शिकंजे से इसका सप्लाय करने वाली गैंग अभी भी पहुंच से बाहर है। नाईट्रावेट का सेवन कर अपराध करने वाले युवकों की संख्या में भी निरंतर इजाफा हो रहा है। 




 -आखिर आ कहां से रहीं है नाईट्रावेट...? 





यहां यह प्रश्न उठना भी लाजमी है कि आखिर जिले में आखिर नाईट्रावेट आ कहां से रहीं है...? सूत्रों से जो जानकारी प्राप्त हुई है, उसके अनुसार शहर के कुछ युवा गुजरात के दाहौद एवं उसके आसपास के शहरों से नाईट्रावेट की खरीदी कर यहां ला रहे है। चूंकि गुजरात राज्य में नाईट्रावेट मेडीकल दुकानों पर खुले रूप से बिकती है। जिसे शहर के कुछ शरारती एवं खुरापाती युवक बड़ी मात्रा में खरीदकर इन्हें पूरे जिले में सप्लाय करते है। जिसके बाद युवक नशे में आकर अपने होश-हवाश खो बैठते है और बड़ी से बड़ी घटना को बिल्कुल निडर होकर अंजाम देते है।




-तीन वर्ष पूर्व दो युवकों को मिली थी आजीवन कारावास की सजा...





तीन वर्ष पूर्व में नाईट्रावेट के नशे में स्थानीय कैथोलिक मिशन के एक छात्र राधुसिंह की अयोध्या बस्ती में रहने वाले दो युवकों ने चाकू से गोदकर निर्मम हत्या कर दी थी। जिसके बाद पुलिस द्वारा आरोपी युवकों को गिरफतार किया गया था एवं जिला न्यायालय द्वारा दोनो युवकों को आजीवन कारावास की सजा सुनाई भी गई थी। 




-एक बार सेवन करन पर लग जाती है लत....





सूत्रों से जो अंदरूनी जानकारी प्राप्त हुई है उसके अनुसार शहर में भी कई क्षेत्रों में नाईट्रावेट के गेंग चलते है। युवक समूह में इसका सेवन करते है। जिला चिकित्सालय के सिविल सर्जन डॉ. बीएस बघेल ने बताया कि नाईट्रावेट का सेवन करने के बाद व्यक्ति पुरी तरह से नशे की हालत में हो जाता है।  इसका सेवन करने के बाद व्यक्ति को यह पता ही नहीं चलता है कि वह क्या कर रहा है। साथ ही  नियमित सेवन करने के लिए मजबूर हो जाता है और नियमित गोली नहीं मिलने पर वह काफी परेशान हो जाता है।




-दवाएं 3 तरह की ...





नशे के उपयोग में लाई जाने वाली दवाएं 3 तरह की होती हैं। पहली अपर्स कहलाती हैं। दे दवाएं नशेड़ी को ज्यादा ऊर्जा और आत्मविश्वास का अहसास दिलाती हैं। कुछ सामान्य अपर्स हैं कोकेन, एक्सटेसी,स्पीड और क्रेक कोकेन है। दूसरे प्रकार की नशीली दवाएं डाउनर्स कहलाती हैं। इनको लेने वाला व्यक्ति खुद को शांत व तनाव रहित महसूस करता है और उसे अत्यधिक नींद आती है। कुछ चर्चित डाउनर्स के नाम हैं अल्कोहल,हशीश, हेरोइन और क्युलेड़्स, तो तीसरी श्रेणी की नशीली दवाएं हेल्युसिनोजन्स हैं। इनका सेवन करने वाले को भ्रम का अहसास होता है,वो नींद की अवस्था में चला जाता है। ये सुखद भी होते हैं और डरावने भी। लेकिन पहले से इस बात का पता करना संभव नहीं होता। 




-चिकित्सक नहीं लिखते है इस गोली का डोज..





सिविल सर्जन डॉ. बघेल ने बताया कि जिले में कोई भी चिकित्सक इस गोली के सेवन करने के लिए पर्ची में यह गोली लिखकर नहीं देते है, उनके अनुसार यह गोली काफी खतरनाक है एवं शरीर के लिए भी नुकसानदायक है। 




-छात्र की हत्या की घटना केे बाद जिला प्रशासन ने लगा रखा था प्रतिबंध ....





कैथोलिक मिशन स्कूल के छात्र की चाकू से गोदकर निर्मम हत्या करने के बाद जिला प्रशासन द्वारा इस मामले में तत्काल कार्रवाई करते हुए नाईट्रावेट सहित इस तरह के अन्य नशीले पदार्थों पर पूर्णत: प्रतिबंध लगा दिया गया था , बावजूद इसके युवक गुजरात से इसे लाकर यहां सेवन कर रहे है।




-अपराधों के पीछे यही मुख्य वजह ...





हिंसा,बलात्कार,चोरी,आत्महत्या आदि अनेक अपराधों के पीछे यह नशा एक बहुत बड़ी वजह है। शराब पीकर वाहन चलाते हुए एक्सीडेण्ट करना,शादीशुदा व्यक्तियों द्वारा नशे में अपनी पत्नी से मारपीट करना आम बात है। मुंह,गले व फेफड़ों का कैंसर, ब्लड प्रेशर,अल्सर, यकृत रोग,अवसाद एवं अन्य अनेक रोगों का मुख्य कारण विभिन्न प्रकार का नशा करना है।





 




-बिना डॉक्टरी परचे के ये दवाएं लेते हैं रोगी ...





फोर्टविन,नाइट्रावेट,गोलियों और इंजेक्शन में मौजूद, ट्राईका, नॉरफिन,अल्फ्रेक,क्लोरप्रोमेजाईन आदि। 





   ००००००००००००बॉक्स खबर ००००००००००००००





-पूर्व कलेक्टर के सख्त निर्देश के बाद भी नहीं थमा सिलसिला ...





गौरतलब है कि पूर्व में ऐसा ही नशा करने वाले नसेड़ी ने नशे की हालत में मात्र कुछ रूपये की लालच के खातिर एक स्कूल के मासूम छात्र की हत्या कर दी थी। इस घटना के बाद पूर्व कलेक्टर ने ऐसी उपरोक्त दवाइयों को डॉक्टर की पर्चेी बिना नहीं बेचने के सख्त निर्देश जिले के समस्त मेडिकल स्टोर्स को जारी भी किये थे। इसके बावजूद भी उपरोक्त दवाइयों को बेचने का सिलसिला अभी तक जिले में थमा हीं नहीं है। जिम्मेदारो का इस ओर कोई ध्यान ही नहीं है,इसलिए जरूरत है कि प्रशासन को इस ओर ध्यान देकर तुरंत कार्रवाई करनी चाहिए। कल 2 सितंबर बुधवार को इसी अखबार ने डॉ. के पर्चे पर मिलनी चाहिए नींद की जो दवाएं,वो मेडिकल स्टोर पर मिल रही आसानी पर नामक शीर्षक से समाचार को प्राथमिकता से प्रकाशित कर प्रशासन का ध्यान इस ओर आकर्षित भी किया था।अब देखना यह है कि प्रशासन अपनी ओर से क्या रणनीति तय कर कारवाई करता है।





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-कठोर कारवाई करेंगे....



 झाबुआ थाना प्रभारी सुरेंद्र गडोरिया ने बताया गया कि उनके द्वारा नाईट्रावेट के सेवन करने वाले एक भी गिरोह को अब तक गिरफतार नहीं किया गया है, न ही हमे कोई शिकायत मिली है। यदि ऐसा करता हुआ कोई पाया जाएगा तो हम कठोर करवाई अवश्य करेंगे।


-दिखवाता हूॅ...





आपके द्वारा मुझे अवगत इस मामले से अवगत करवाया गया है। मैं इस संबंध में पुलिस अधीक्षक महोदय से चर्चा कर मामले को दिखवाता हूॅ।





.........विजय डावर, अतिरिक्त पुलिस अधीक्षक झाबुआ।




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