*धार \मनावर~सीता मैया दुध दो बोलकर ताली बजाने से पहाड़ मे से टपकता है पानी*~~

*धार जिले के मनावर तहसील के ग्राम देवरा महादेव व माॅ जानकी स्थल सीतापुरी मैं पर्यटन की अपार संभावना है*~~

निलेश जैन मनावर से विशेष कवरेज ~~

धार जिले के  मनावर तेहः से 14 किमी दुर धार मार्ग पर अवल्दा ग्राम से मात्र 4 किमी दुर मान नदी किनारे पहाडी के नीचे माॅ जानकी शक्ति स्वरूपा के रूप में एक गुफा में विराजित है। यहा पर सीता माता की प्रतिमा के सामने ‘‘सीता मैया दुध दो बोलकर ताली बजाने से पहाड़ मे से पानी टपकता है’’ मनावर के लेखक व पत्रकार विश्वदीप मिश्रा ने बताया कि लाखो वर्ष पुर्व यह क्षैत्र समुद्रीय क्षैत्र था। यह क्षैत्र जिवाश्म से समृद्ध है। लाखो वर्ष पुराने पेड़ो के जिवाश्म तो यहा है ही लेकिन महत्वपुर्ण पहचान इस क्षैत्र की डायनासोर के जीवाश्म को लेकर हैै। इस क्षैत्र में और पास ही अवराल के जंगलो में प्रचुर मात्रा में डायनासोर के अण्डे पाये गये है। क्षेत्रवासियों का कहना है की माता जानकी ने वनवास के दौरान उक्त गुफा मेें एक रात बिताई थी तभी से इस ग्राम का नाम सीतापुरी पड़ गया। पुर्व में इसका नाम अम्बा तालाब था क्योकी इस क्षैत्र में एक मात्र तालाब वर्तमान में जिसका अस्तित्व खत्म हो गया है, था एवं पुर्व में इस बसाहट भी एक पहाड़ी पर थी। ग्रामीण बताते है की माता जानकी के मंदिर के साथ यहा पहाड़ीयो में गुफा में सात माता भी विराजित है। इसके साथ ही यहा जानकी मंदिर से सात माता मंदिर के बीच सात जल धाराए अनवरत प्रवाहित होती रहती है। इन सात कुण्डो का पानी शीतल और मीठा है। कहते है की माॅ नर्मदा से लेकर माण्डव तक पुर्व में केवल यही एक मात्र जल स्त्रोत था। इस पानी का भीषण गर्मी तथा अकाल जैसी स्थिति में भी प्रवाह कभी बंद नही हुआ। सात माता की गुफा के ठीक सामने मानसरोवर अब मान नदी के दुसरे छौर पर सिरोंज धाम से करीब 30 किमी का सफर तय करके पहाड़ी सुखन नदी यहा मिलती है। मान नदी और सुखन नदी का यह संगम यहा के प्राकृतिक सौंदर्य को एक अनुपम छटा प्रदान करता है। यहा पर शेर की गुफाए भी पाई जाती है जो बताती है कि किसी समय में यहा शेर भी बहुतायत में पाये जाते थे। कहते है कि यहा के पटेल मनोहरसिंह मण्डलोई ने शेर से युद्ध कर उसे परास्त भी किया था। इससे दो किमी पुर्व ही ग्राम देवरा में अति प्राचीन व पौराणिक महादेव मंदिर भी अपने र्दुदशा के आंसू बहा रहा है वर्तमान में यह स्थल पुरातत्व विभाग के अधीन होकर अपनी देख रेख व विकास की राह देख रहा है। माॅ जानकी स्थल व देवरा महादेव की ठीक बीच सड़क किनारे महादेव मंदिर व भीलट मंदिर है। पास ही जंगल में बाबा बलवारी की तर्ज पर हनुमान जी की  प्रतिमा भी है जो वर्षो पुर्व खण्डित हो चुकी है। ग्रामीण राजेन्द्र धनगर, अभय कनेल, ज्योतिसिंह कनेल, कैलाश रामचंद्र, ने कहा कि माता जानकी के सामने ताली बजाकर सीता माता दुध दो बोलने से पुर्व में यहा पर पहाड़ो में से दुध टपकता था। वर्तमान में पानी टपकता है। यह किसी चमत्कार से कम नही है। यहा कई लोग माता जी से मन्नत मांगने आते है और पुरी हो जाने पर माताजी को चुड़िया अर्पित करते है। अभी भी कई चुड़िया यहा लाखो वर्ष पुराने बरगद के पेड़ की शाखाओ पर लटकी हुई है। ग्राम में ही एक पुरानी हवैली है जहा किसी जमाने में कचहरी लगती थी। यहा पर प्रचुर मात्रा में जमीन में से धन भी निकला है। अभी भी कभी कभी जंगलो में ग्रामीणो को सोने चांदी के सिक्के मिल जाते है। देवरा महादेव व जानकी स्थल में पर्यटन की बहुत संभावनाए है। धीरे धीरे हमारी यह ऐतिहासिक धरोहरे नष्ट होते जा रही है। ऐसे स्थलो के प्रचार प्रसार के साथ यहा विकास के भी प्रयास होने चाहिए ताकि हमारी आने वाली पीढ़ी हमारे क्षैत्र के समृद्ध इतिहास से जुड़ी रहे।


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