बाकानेर~ नव दुर्गा उत्सव संपन्न~~

बाकानेर सैयद रिजवान अली ~~

परंपरागत नगर में हिंदू धर्मावलंबी दुर्गा मंदिर चौसठ योगिनी माता मंदिर एवं चेतना कॉलोनी इंदिरा कॉलोनी मैं मां दुर्गा की आराधना सोशल डिस्टेंस का पालन करते हुए मास्क सैनिटाइजर का उपयोग और करते हुए आराधना की जा रही है चेतना कॉलोनी और इंदिरा कॉलोनी में सिर्फ मोहल्ले वाले गरबा नृत्य आदिवासी गानों पर नृत्य बेटी बचाओ बेटी पढ़ाओ मास्क है जरूरी 2 गज की दूरी कोरोना महामारी से मुक्ति आदि संदेश भी दे रहे हैं चेतना मित्र मंडल अध्यक्ष त्रिभुवन मंडलोई दरबार साहब वरिष्ठ समाजसेवी सुनील जायसवाल प्रकाश पंजाबी जितेंद्र कानूनगो मनोहर लाल चौहान अनुपम तिवारी पंडित सुभाष पंडित जगदीश पाटीदार ने बताया माता सिद्धिदात्री

यह नौ दुर्गा का आखरी दिन भी होता है तो इस दिन माता सिद्धिदात्री के बाद अन्य देवताओं की भी पूजा की जाती है
सिद्धिदात्री

*महत्व*

दुर्गा पूजा में इस तिथि को विशेष हवन किया जाता है। यह नौ दुर्गा का आखरी दिन भी होता है तो इस दिन माता सिद्धिदात्री के बाद अन्य देवताओं की भी पूजा की जाती है। सर्वप्रथम माता जी की चौकी पर सिद्धिदात्री माँ की तस्वीर या मूर्ति रख इनकी आरती और हवन किया जाता है।  हवन सामग्री में जौ और काला तिल मिलाएं.
हवन करते वक्त सभी देवी दवताओं के नाम से हवि यानी अहुति देनी चाहिए। बाद में माता के नाम से अहुति देनी चाहिए।  दुर्गा सप्तशती के सभी श्लोक मंत्र रूप हैं अत:सप्तशती के सभी श्लोक के साथ आहुति दी जा सकती है। देवी के बीज मंत्र “ऊँ ह्रीं क्लीं चामुण्डायै विच्चे नमो नम:” से कम से कम 108 बार हवि दें। भगवान शंकर और ब्रह्मा जी की पूजा पश्चात अंत में इनके नाम से हवि देकर आरती करनी चाहिए। हवन में जो भी प्रसाद चढ़ाया है जाता है     इसके बाद कन्या पूजन करें.
-कन्या पूजन के बाद सम्पूर्ण भोजन का दान करें

*स्तुति*
या देवी सर्वभू‍तेषु माँ सिद्धिदात्री रूपेण संस्थिता।
नमस्तस्यै नमस्तस्यै नमस्तस्यै नमो नमः॥
 
*कथा*
दुर्गा की नवम शक्ति का नाम सिद्धि है। ये सिद्धिदात्री हैं। सभी प्रकार की सिद्धियों को देने वाली माता इन्हीं को माना गया है। मार्कण्डेय पुराण के अनुसार अणिमा, महिमा, गरिमा, लघिमा, प्राप्ति, प्रकाम्य, ईशित्व और वशित्व ये आठ सिद्धियां होती हैं। देवी पुराण के अनुसार भगवान शिव ने इन्हीं की कृपा से सिद्धियों को प्राप्त किया था। इन्हीं की अनुकम्पा से भगवान शिव का आधा शरीर देवी का हुआ था। इसी कारण वह संसार में अर्द्धनारीश्वर नाम से प्रसिद्ध हुए। माता सिद्धिदात्री चार भुजाओं वाली हैं। इनका वाहन सिंह है। ये कमल पुष्प पर आसीन होती हैं। इनकी दाहिनी नीचे वाली भुजा में चक्र, ऊपर वाली भुजा में गदा और बांयी तरफ नीचे वाले हाथ में शंख और ऊपर वाले हाथ में कमल पुष्प है। नवरात्रि पूजन के नवें दिन इनकी पूजा की जाती है। भगवती सिद्धिदात्री का ध्यान, स्तोत्र व कवच का पाठ करने से  निर्वाण चक्रजाग्रत हो जाता है।



*आरती*

जय सिद्धिदात्री मां तू सिद्धि की दाता ।

तू भक्तों की रक्षक तू दासों की माता ।।



तेरा नाम लेते ही मिलती है सिद्धि ।

तेरे नाम से मन की होती है शुद्धि ।।



कठिन काम सिद्ध करती हो तुम ।

जभी हाथ सेवक के सिर धरती हो तुम ।।



तेरी पूजा में तो ना कोई विधि है ।

तू जगदंबे दाती तू सर्व सिद्धि है ।।



रविवार को तेरा सुमिरन करे जो ।

तेरी मूर्ति को ही मन में धरे जो ।।



तू सब काज उसके करती है पूरे ।

कभी काम उसके रहे ना अधूरे ।।



तुम्हारी दया और तुम्हारी यह माया ।

रखे जिसके सिर पर मैया अपनी छाया ।।



सर्व सिद्धि दाती वह है भाग्यशाली ।

जो है तेरे दर का ही अंबे सवाली ।।






हिमाचल है पर्वत जहां वास तेरा ।

महा नंदा मंदिर में है वास तेरा ।।



मुझे आसरा है तुम्हारा ही माता ।

भक्ति है सवाली तू जिसकी दाता ।।


Post A Comment:

0 comments: