शाजापुर/कालापीपल~माता का दरबार~~

भक्तों की श्रद्धा का केंद्र है केला माँ का दरबार, उमड़ते हैं श्रद्धालु~~

माता पूरी करती हैं भक्तों की मुरादें~~

शाजापुर/कालापीपल। शाजापुर जिले के कालापीपल में भक्तों की श्रद्धा एवं आस्था का केन्द्र केला माँ का भव्य मंदिर शुजालपुर रोड़ पर स्थित है। इस प्राचीन मंदिर में नवरात्र के दौरान श्रद्धालुओं का जनसैलाब उमड़ता है। ऐसी मान्यता है कि यहाँ आने वाले हर भक्त की पुकार माँ सुनती है और पीड़ा हर लेती है। सच्चे मन से माता के दर्शन करने वाले श्रद्धालुओं की मनोकामनाएं मातारानी जरुर पूरी करती हैं। प्रतिवर्ष नवरात्रि के समय फूलों से माँ का विशेष श्रंगार एवं विशेष साज सज्जा की जाती है। माता के दरबार में हमेशा भक्तों के द्वारा भजन कीर्तन होता रहता है। इस वर्ष मंदिर में पहुंच रहे भक्त कोरोना के चलते प्रशासन द्वारा जारी नियमों का पालन कर रहे हैं।

अष्टमी पर लगता है छप्पन भोग

प्रत्येक वर्ष नवरात्रि के पूरे नौ दिनों तक श्रद्धालु यहां केला माँ के दर्शन के लिए दूर दराज से आते हैं। वहीं नवरात्र के दौरान माता के आकर्षक श्रंगार के साथ महाआरती भी होती है। नवरात्रि की अष्टमी पर माता के दरबार में छप्पन भोग एवं नवमी को कन्या भोज का आयोजन किया जाता है।

वर्षो से जल रही है अखंड ज्योति

मंदिर के पुजारी पंडित अंकित शर्मा बताते हैं कि माता के मंदिर की स्थापना स्वर्गीय पंडित सत्यनारायण शर्मा ने की थी। यहाँ तकरीबन 34 वर्षो से माँ की ज्योति जल रही है। मंदिर की स्थापना 1985 में हुई थी। माँ ने उनके पिता व मंदिर के संस्थापक स्वर्गीय सत्यनारायण शर्मा को स्वप्न देकर मूर्ति स्थापना करने को कहा था। तब उन्होनें माँ के छोटे से मंदिर की स्थापना की थी। अब लगातार बढ़ती हुई धार्मिक आस्था व विश्वास के चलते जनसहयोग से यहाँ लगातार निर्माण कार्य हो रहा है।

नवरात्र में दिखता है रोजाना माता का नया रूप

माँ कैला देवी के मंदिर की एक विशेष बात है। प.अंकित शर्मा ने बताया माँ कैलादेवी के मंदिर में नवरात्र के नौ दिन माता का नया रूप देखने को मिलता है इसके अलावा नौ दिनों तक माता का रोजाना विशेष श्रंगार किया जाता है।

माता पूरी करती हैं भक्तों की मुरादें

मंदिर के प्रमुख व्यवस्थापक सहयोगी राकेश मेवाड़ा बताते हैं कि संतान प्राप्ति नहीं होने वाले दंपत्ति यदि माँ से सच्चे मन से प्रार्थना करते हैं तो माता रानी उन्हें संतान सुख का वरदान जरूर देती हैं। मन्नत पूरी होने के बाद श्रद्धालु माँ के दरबार में पालना (झूले) का दान करते हैं या कन्या भोजन कराते हैं।

देवी के दरबार में विराजे हैं हनुमान और भैरव

मंदिर परिसर में देवी प्रतिमा के ठीक सामने की दिशा में लंगुरिया हनुमान, भैरव महाराज और संतोषी माता भी विराजमान हैं।

कोरोना की गाइडलाइंस का पालन करने का लगातार किया जा रहा आग्रह

पं.अंकित शर्मा और राकेश मेवाड़ा ने बताया कि मंदिर आने-जाने वाले प्रत्येक श्रद्धालु से शारिरिक दूरी रखने एवं मास्क लगाने का आग्रह किया जा रहा है। मंदिर के पुजारी ने श्रद्धालुओं से मंदिर में मास्क लगाकर आने एवं कोरोना की गाइडलाइंस का पालन करने का आग्रह किया है।

कुछ दिनों पहले मंदिर के संस्थापक पं.सत्यनारायण शर्मा का हुआ था निधन

बता दें कि हंसमुख एवं सौम्य व्यवहार वाले मंदिर के संस्थापक पं.सत्यनारायण शर्मा का निधन 3 अक्टूबर 2020 को दिल का दौरा पड़ने से 58 वर्ष की उम्र में हो गया। वे मंदिर की स्थापना के बाद से ही नियमित मंदिर में पूजा अर्चना एवं मंदिर की देखभाल करते थे। छोटे-छोटे बच्चों से विशेष स्नेह रखने वाले स्व.सत्यनारायण शर्मा का स्मरण कर नियमित आने वाले श्रद्धालु भावुक हो जाते हैं।


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