तिल तिल मरते लोग ~~

फिर भी नहीं डरते लोग ~~

सैयद रिजवान अली ~~

कोरोना ने छीनी हमारी खुशियां  रोज़गार और तोड़े हमारे सपने ।
मौत के आंकड़े धीरे-धीरे बढ़ते जा रहे हैं, सौ से पहुंचे हज़ार और हज़ार से लाख में और यह  सिलसिला अब भी जारी है । आश्चर्य की बात यह है,जब लॉक डाउन की जरूरत नहीं थी तब सरकार ने लॉक डाउन लगाएं। 25 मार्च 2020 को भारत में केवल 571 कोरोना के मामले सामने आए थे, सरकार ने ताबड़तोड़ तरीके से पूरे भारत में एक साथ लॉकडाउन लगा दिया था, आज की स्थिति यह है, रोज़ तकरीबन 50 हज़ार से 60 हज़ार मामले दर्ज हो रहे हैं, और कोरोना वायरस के कारण  एक लाख नौ हज़ार लोगों ने अपनी जान‌ गवाई ।
कोरोना वायरस संक्रमण ने पूरे भारत को अपनी चपेट में ले  चुका है। हर रोज़ मौत के आंकड़े सैकड़ों की संख्या में बढ़ते जा रहे हैं और हज़ारों की संख्या में संक्रमितों के ।
इन सबके बीच उम्मीद की बात सिर्फ़ इतनी है कि बहुत से मामलों में लोग ठीक भी हुए हैं ।
कोरोना वायरस से संक्रमित हर शख़्स का एक अलग अनुभव है, कुछ में इसके बेहद सामान्य या फिर यूं कहें कि बेहद कम लक्षण नज़र आते है, तो कुछ में यह काफी गंभीर,और कुछ तो ऐसे मामले भी सामने आए हैं, जिनमें लक्षण वो थे ही नहीं जिनके बारे में स्वास्थ्य विभाग सचेत करता रहा है,लेकिन एक बार ये पता चल जाए कि आप संक्रमित हैं, तो अस्पताल जाने के अलावा दूसरा कोई विकल्प नहीं बचता है ।
पर चुनाव के समय हमारे नेताओं को इन सब बातों से कोई लेना-देना नहीं, उनका लक्ष्य केवल चुनाव जीतना भाड़ में जाए कोरोना ।
कोरोना वायरस के बीच देश में पहला चुनाव और उप चुनाव होने जा रहा है, महामारी के बीच  चुनाव आयोग की सबसे बड़ी चिंता यही थी कि चुनाव टाले जाएं या नहीं,महामारी में बड़े उतार-चढ़ाव दिख रहे है, फिर भी चुनाव की तारीख घोषित कर दी गई ।
मघ्य प्रदेश में उपचुनाव के दौरान सरकार ने नया फरमान जारी कर दिया पहले केवल 100 लोग चुनावी सभा में शामिल हो सकते थे,अब नए फरमान के अनुसार जितने लोग चाहें वह चुनावी रैलियों में जा सकते हैं,और नेता जी के भाषण पर खूब तालियां बजा सकते हैं, बस सामाजिक दूरी का ध्यान रखना होगा ।
जब हमारे नेता सामाजिक दूरी का ध्यान नहीं रखते,तो आम जनता से क्या उम्मीद लगा सकते हैं । 
इसके बावजूद मध्य प्रदेश के नेता उप चुनाव की तैयारियों में लग गए हैं, सामाजिक दूरी का मखौल उड़ाते  नेता, फिर से नेताओं की नौटंकी शुरू हो गई, लोगों को रिझाने के लिए नोट बाटे जा रहे हैं, लोगों के पैर छू छू कर वोटों की भीख मांग रहे हैं यह नेता। ऐसा लगता है,इन नेताओं से कोरोना वायरस डरता है ,नेताओं के चेहरे से मास्क गायब,मास्क नहीं लगाने की मजबूरी नेताजी बड़े भोले अंदाज में बताते हैं, अगर जनता चेहरा नहीं देखेगी तो वोट कैसे देगी । नेताजी भूल गए कोरोना वायरस को ।
गरीब जनता को खूब गले लगा रहे हैं, गरीबो के बच्चों को गोद में लेकर उनके गालों को चूम रहे हैं, बच्चे की बहती नाक अपने रुमाल से पोछ कर अपना प्यार जनता पर लुटा रहे हैं। चुनाव हारने का डर नेताजी से ज्यादा उनकी पत्नी यानि मेमसाब को है, मेम साहब की रातों की नींद उड़ गई है, रात में बुरे बुरे सपने आते हैं, कि नेताजी चुनाव हार गए हैं, मेम साहब के ऐशो आराम खत्म हो गए हैं , मेम साहब की एक आवाज़ पर नौकर और नेताजी के  चमचे दौड़कर मेमसाब की सेवा में लग जाते हैं, मेम साहब की एक आवाज़ पर चार चार गाड़ियां खड़ी हो जाती है, मेम साहब को रात में नेताजी के साथ नोट गिनने की मशीन पर नोट गिनने में बहुत मजा आता है,अगर नेताजी चुनाव हार जाएंगे, तो यह सब ऐशो आराम खत्म,इसलिए यह सब नौटंकी चुनाव के समय गरीब जनता के सामने की जाती है। यह प्यार केवल चुनाव जीतने तक सीमित रहता है। चुनाव जीतने के बाद नेताजी को गरीब जनता से एलर्जी हो जाती है ,जब जनता नेताजी के पास पंहुचती है, तो नेता जी पहचान ने  से इनकार कर देते हैं।
प्रदेश में उप चुनाव को लेकर नेताजी, लोगों को जोड़ने के लिए  नए-नए हथकंडे अपना रहे हैं । कोई नोट बांट रहा हैं, कोई जनता के पैर पड़ कर माफी मांग रहा हैं ,कोई मास्क और सैनिटाइजर बांट रहा हैं , इन हथकंडो के सहारे वोट जुटाने की जुगत में लग गए हैं। भागवत कथा, यज्ञ और भंडारे में लोगों को खास तवज्जो मिल रही है। कोई खिचड़ी बंटवा रहा, तो कोई दाल-बाफले की पार्टी दे रहा है। इतना ही नहीं साड़ी बंटवाने से लेकर धार्मिक यात्राएं के वादे भी किए जा रहे है।  उपचुनाव में जबर्दस्त घमासान की उम्मीद है।
एक नेता जी ने लोगों के लिए प्रसाद से लेकर साबूदाने की खिचड़ी तक की व्यवस्था की है।
पर नेताजी कोरोना की बीमारी को भूल गए हैं, सामाजिक दूरी की धज्जियां उड़ाई जा रही है नेताजी के साथ उनके चमचों का हुजूम चल रहा है, जिनको रोज़ के ₹500 मिलते हैं,ना नेताजी के चेहरे पर मास्क होता है और ना ही उनके चमचों के ।
वहीं आम जनता अगर गलती से बगैर मास्क के बाहर निकलती है, तो उनके ऊपर चालानी कार्रवाई की जाती है, रात 8:00 बजे पुलिस की गाड़ियों के सायरन बजना शुरू हो जाते हैं, छोटी-छोटी दुकानों से लेकर रोज़ कमाने खाने वाले ठेले वालों की जबरन दुकानें बंद करवाते हैं और ठेले हटवाते हैं,और कोरोना का डर दिखाते हैं । ऐसा लगता है रात 8:00 बजे के बाद ही कोरोना वायरस के कीटाणु सक्रिय हो जाते हैं, इसीलिए पुलिस प्रशासन 8:00 बजे से पहले दुकानें बंद करवाना शुरू कर देते है, जितनी सख्ती आम लोगों के साथ और गरीब व्यापारियों के साथ होती है, उतनी सख्ती उप चुनाव के समय नेताओं के साथ हो तो माने के इंसाफ सबके लिए बराबर है ।


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