*आइए जानते हैं कार्तिक माह के प्रमुख व्रत-त्योहार कब आ रहे हैं...*~~
    
         मालवा के प्रसिद्ध ज्योतिषाचार्य डाँ. अशोक शास्त्री ने एक चर्चा के दौरान बताया कि कार्तिक स्नान प्रारंभ : 31 अक्टूबर से भगवान  विष्णु की कृपा से जीवन के समस्त सुख , भोग की प्राप्ति और मृत्यु के पश्चात मोक्ष प्राप्ति की कामना से कार्तिक माह में प्रतिदिन सूर्योदय से पूर्व जागकर तारों की छाया में स्नान किया जाता है । दिनभर व्रत रखकर रात्रि में तारों की छाया में भोजन किया जाता है ।

*करवाचौथ : 4 नवंबर*
शरद पूर्णिमा के बाद कार्तिक माह का पहला व्रत है करवाचौथयह व्रत कार्तिक माह की कृष्ण पक्ष की चतुर्थी के दिन होता है । पति की दीर्घ आयु और स्वस्थ जीवन की कामना के साथ यह व्रत विवाहित महिलाएं करती हैं । इस दिन निराहार , निर्जला रहते हुए  व्रत करती हैं । भगवान गणेश की पूजा करती हैं और रात्रि में चंद्रदर्शन के बाद पति के हाथ से पानी पीकर व्रत खोलती हैं ।

*अहोई अष्टमी, रवि पुष्य : 8 नवंबर*
यह व्रत कार्तिक मास की अष्टमी तिथि के दिन किया जाता है । यह व्रत महिलाएं अपनी संतान के दीर्घ और स्वस्थ जीवन के लिए करती हैं । इस व्रत को संतान आठे के नाम से भी जाना जाता है । नि:संतान स्त्रीयां भी संतान प्राप्ति के लिए यह व्रत करती हैं । इस व्रत में गेरू से दीवार पर अहोई माता का चित्र बनाकर उनकी पूजा की जाती है । यह व्रत उत्तर भारत में बड़े पैमाने पर किया जाता है । इस दिन रविवार और पुष्य नक्षत्र के संयोग से रवि - पुष्य का शुभ संयोग भी बना है , जो समस्त प्रकार की खरीददारी के लिए शुभ है ।

*रमा एकादशी : 11 नवंबर*
कार्तिक माह के कृष्ण पक्ष की एकादशी को रमा एकादशी के नाम से जाना जाता है । इस एकादशी का व्रत समस्त प्रकार के सुख , भोग , भौतिक सुख - सुविधाएं देने वाला कहा गया है । व्रत के प्रभाव से जीवन के संकटों , परेशानियों का नाश होता है । इसमें पूर्ण व्रत रखते हुए भगवान विष्णु के चतुर्भुज रूप का ध्यान - पूजा की जाती है ।

*गोवत्स द्वादशी : 12 नवंबर*
कार्तिक माह के कृष्ण पक्ष की द्वादशी तिथि को गोवत्स द्वादशी कहा जाता है । इस दिन प्रात:काल स्नानादि से निवृत्त होकर गाय - बछड़ों की पूजा की जाती है । उन्हें गेहूं से बनी चीजें खिलाई जाती है । इस दिन व्रत करने वाले गाय के दूध और इससे बनी वस्तुओं का सेवन नहीं करते । गेहूं से बने पदार्थ और कटे फल भी नहीं खाते ।

*धनतेरस, यम दीपदान : 13 नवंबर*
कार्तिक कृष्ण त्रयोदशी को आयुर्वेद के देवता भगवान धनवंतरि का जन्मोत्सव मनाया जाता है । दीपावली से दो दिन पहले वाले धनतेरस को धन की पूजा की जाती है । इस दिन नए बर्तन, सोना - चांदी खरीदने का विधान है । व्यापारी लोग इस दिन अपने प्रतिष्ठानों में नई गादी बिछाकर , बही - खाता की पूजा करते हैं । धनतेरस के दिन से पांच दिवसीय दीपावली पर्व की शुरुआत होती है । तिथि संयुक्त होने के कारण इस रात्रि में यम दीपदान किया जाएगा ।

*रूप चतुर्दशी या नरक चतुर्दशी : 14 नवंबर*
कार्तिक कृष्ण चतुर्दशी को रूप चतुर्दशी , नरक चतुर्दशी , नरक चौदस कहा जाता है । मान्यता है कि इस दिन भगवान श्रीकृष्ण ने नरकासुर नामक राक्षण का वध उसके आतंक से संसार को मुक्ति दिलाई थी । यह रूप निखारने का दिन भी माना जाता है । इस दिन घरों में लोग उबटन लगाकर स्नान करते हैं और अपने रूप को चमकाते हैं ।

*दीपावली : 14 नवंबर*
कार्तिक अमावस्या को दीपावली मनाई जाती है । यह हिंदुओं का सबसे बड़ा त्योहार है । पांच दिनी पर्व का यह मुख्य दिन होता है । दीपावली की तैयारियां कई दिन पहले से प्रारंभ हो जाती है । घरों में साफ - सफाई , रंग - रोगन किया जाता है और घरों को खूबसूरत लाइटिंग से सजाया जाता है । इस दिन रात्रि में मां लक्ष्मी पूजा , गणेश और सरस्वती माता की जाती है और उनसे वर्ष अन्न , धन के भंडार भरने की कामना की जाती है । लंकापति रावण का वध करने के बाद भगवान श्रीराम इस दिन अयोध्या लौटे थे । इस खुशी में अयोध्या को दीपमालाओं से सजाया गया था । इस दिन पटाखे चलाकर खुशियां मनाई जाती है । मिठाइयों से एक - दूसरे का मुंह मीठा कराया जाता है ।

*गोवर्धन पूजा , अन्नकूट महोत्सव : 15 नवंबर*
कार्तिक माह के शुक्लपक्ष का पहला दिन गोवर्धन पूजा के नाम रहता है । इसकी परंपरा भगवान श्रीकृष्ण ने प्रारंभ करवाई थी । इस दिन दिन गायों को धन मानते हुए उनके सजाया - संवारा जाता है और उनकी पूजा की जाती है । ग्रामीण घरों में इस दिन प्रकीतात्मक रूप में गोबर से गोवर्धन पर्वत बनाकर उसकी पूजा की जाती है और उसकी परिक्रमा की जाती है । इस दिन अन्नकूट महोत्सव भी मनाया जाता है ।

*भाई दूज , यम द्वितीया , चंद्र दर्शन : 16 नवंबर*
कार्तिक शुक्ल द्वितीया के दिन भाई दूज या यम द्वित्तीया मनाया जाता है। पांच दिवसीय दीपोत्सव पर्व का समापन इसी दिन होता है । इस दिन बहनें अपने भाइयों को भोजन करवाकर उन्हें तिलक करती हैं और उनकी लंबी आयु की कामना करती है । भाई बहनों को उपहार देते हैं ।

*छठ पूजा प्रारंभ : 18 नवंबर*
भगवान सूर्य की आराधना का पर्व छठ पूजा मुख्यत: बिहार , झारखंड , पूर्वाचल में मनाया जाता है । कार्तिक शुक्ल चतुर्थी के दिन से प्रारंभ होने वाला यह पर्व 18 नवंबर से प्रारंभ होगा । इसमें नहाय खाय , खरना , सांध्य अ‌र्घ्य किया जाता है । 20 नवंबर को छठ पूजा होगी । प्रात: अ‌र्घ्य के साथ व्रत का पारणा होगा ।

*गोपाष्टमी 22 नबम्बर*
आज के गऊ माता की पूजा करने का विशेष महत्व है , गऊ माँ की पूजा प्रतिदिन करनी चाहिए , कार्तिक महीने में उनके प्रति पूजा , गऊ रक्षा करना बहुत ही कल्यानकारी है ।

*आंवला नवमी, अक्षय नवमी : 23 नवंबर*
कार्तिक शुक्ल नवमी के दिन आंवला नवमी या अक्षय नवमी मनाई जाती है । इस दिन आंवले के वृक्ष का पूजन करके इसके नीचे बैठकर भोजन करने का महत्व है । कहा जाता है इसी दिन भगवान श्रीकृष्ण वृंदावन को छोड़ मथुरा गए थे । यह व्रत परिवार के सुख - सौभाग्य के लिए किया जाता है ।

*देवोत्थान एकादशी, देव उठनी एकादशी : 25 नवंबर*
कार्तिक शुक्ल एकादशी देवोत्थान एकादशी होती है । यह वर्ष की सबसे बड़ी एकादशी है क्योंकि इसी दिन भगवान विष्णु चार माह के शयनकाल से जागते हैं । चातुर्मास का समापन इसी एकादशी के दिन होता है । इस दिन से विवाह प्रारंभ हो जाते हैं और वर्ष का स्वयंसिद्ध मुहूर्त होता है । हिंदू परिवार इस दिन छोटी दीवाली मनाते हैं । सायंकाल में तुलसी विवाह किया जाता है ।

*बैकुंठ चतुर्दशी, हरिहर मिलन : 28 नवंबर*
बैकुंठ चतुर्दशी के दिन हरि और हर अर्थात् विष्णु और शिव का मिलन होता है । चातुर्मास के चार माह भगवान विष्णु के शयनकाल में रहने के कारण पृथ्वी का कार्यभार भगवान शिव संभालते हैं । देवोत्थान एकादशी पर भगवान विष्णु निद्रा से जागते हैं । उसके बाद बैकुंठ चतुर्दशी के दिन भगवान शिव पुन: यह कार्यभार भगवान विष्णु को सौंपते हैं । यह एकमात्र ऐसा दिन होता है जब शिव को तुलसी और विष्णु को बिल्व पत्र अर्पित किया जाता है ।

*देव दीवाली , कार्तिक पूर्णिमा : 30 नवंबर*
कार्तिक पूर्णिमा के साथ कार्तिक माह का समापन हो जाता है । इस दिन देव दीवाली मनाई जाती है । कार्तिक पूर्णिमा के दिन भगवान शिव ने त्रिपुरासुर राक्षस का वध किया था । इसी दिन गुरुनानक देव जी का प्रकाशोत्सव मनाया जाता है । इस दिन घरों को दीपों से सजाया जाता है । पवित्र नदियों में दीपदान किया जाता है । जो लोग कार्तिक स्नान और कार्तिक व्रत रखते हैं वे इस दिन व्रत का उजमना करते हैं । ( डाँ. अशोक शास्त्री )

                   *ज्योतिषाचार्य*
          डाँ. पं. अशोक नारायण शास्त्री
         श्री मंगलप्रद् ज्योतिष कार्यालय
245 , एम. जी. रोड ( आनंद चौपाटी ) धार , एम. पी.
                  मो. नं.  9425491351

                 *--:  शुभम्  भवतु  :--*


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