*मनावर ~नर्मदा घाटी के किसान मजदूरों ने ट्रैक्टरों की रैली निकालकर,दिल्ली के किसान आंदोलन को समर्थन देने का  लिया संकल्प* ~~

*सरकार किसान-मजदूर विरोधी कानून और बिजली बिल वापस लो*~~

*देशभर के किसान जब लड़ रहे हैं 40 किसानों की जब शहादत दी गयी है, तब उनके ऊपर ख़लिस्तानी, पाकिस्तानी के आरोप लगाना,यह बेहद गलत है मेघा पाटकर*~~

*जयस राष्ट्रीय संरक्षक मनावर विधायक डॉ हीरालाल अलावा ने दिया सर्मथन* ~~

*मनावर के तहसील कार्यालय के समीप हुई जनसभा*~~

*नर्मदा बचाओं आंदोलन की यात्रा को लेकर भारी पूलिस बाल पहुचा मनावर*~~

निलेश जैन  मनावर ~~

आज नर्मदा घाटी के निमाड़ के किसान, मजदूर, मछुआरे, पशुपालकों के सैकडो प्रतिनिधी ट्रैक्टरों की रैली में और अन्य वाहन जोड़कर बडवानी, अंजड, मंड़वाडा, दवाना, ठीकरी तक सभाए का आयोजन किया गया। यह यात्रा धार जिले में गाँव गाँव तक पहुँचने वाले है। इस वाहन रैली के माध्यम से केंद्र की मोदी सरकार ने घोषित किए तीन किसान विरोधी कानूनों का विरोध करना। साथ ही किसानों के लिए बिजली महंगी करते हुए सब्सिडी ख़त्म करने वाले बिजली बिल का भी विरोध करते है। दिल्ली की सीमा पर बैठे हुए लाखों किसान-मजदुर, राज्य राज्य में संघर्ष चलाने वाले किसान-मजदूर तथा शहीद हुए किसान सभी के द्वारा प्रेरणा लेकर हमारा आन्दोलन तेज होते जा रहा है।आज की इस रैली में शामिल है दिल्ली के आन्दोलन में शरीक होकर लढते हुए मध्य प्रदेश के किसान नेता केदार पुरोही ,जन आंदोलनों के राष्ट्रीय समन्वय की समन्वयक मेधा पाटकर तथा समाजवादी विचारधारा के रामस्वरूप, साथ ही मध्य प्रदेश के निमाड़ और महाराष्ट्र के पहाडी क्षेत्र के किसान, मजदूर, मछुआरे, पशुपालकभी बड़ी संख्या में इस रैली को आगे बढाते हुए प्रबोधन और प्रसार कर रहे है।मध्य प्रदेश की सरकार, केंद्र की मोदी सरकार और अदानी जैसे कंपनियों ने इस कानून के पक्ष में जो भ्रामक प्रचार शुरू किया है। उसका खंडन करते हुए आज किसानों को बताया जा रहा है की इन तीन कानूनों से न खेती बचेगी न प्राकृतिक उपज का समर्थन मूल्य मिलेगा और न ही देश की आम जनता की राशनिंग व्यवस्था बच पाएगी। हर कानून की पोलखोल करते हुए संयुक्त किसान मोर्चा अखिल भारतीय किसान संघर्ष समन्वय समिती के बैनर तले लढ रहे दिल्ली से गल्ली तक के आन्दोलन की हकीकत भी उजागर की जा रही है। जब की वहां कोई खलिस्तानी या पाकिस्तानी नहीं है,सब हिंदुस्तानी ही है,सब उस आन्दोलन की सच्चाई, वहां की लंगर सेवाकी दानत,और लोगों ने डाले हुए डेरे पर चल रहा सामूहिक नेतृत्व, हर हकीकत को आज निमाड़ के गाँव गाँव और नगर नगर में उजागर किया जा रहा है।  इस ट्रैक्टर रैली और वाहन रैली के द्वारा मध्य प्रदेश में ला रही निजी मंडियों से समर्थन मूल्य नहीं बचाने की बात समजाई जाकर कॉन्ट्रैक्ट फार्मिंग खेती छिनने की साजिश भी बताई जा रही है। केदार पुरोही ने कहा कि इस देश के किसानों को स्थान,सम्मान न देने वाली मोदी सरकार अब अदानी, अम्बानी का मुनाफ़ा बढ़ा रही है,उनके हाथ में अन्य क्षेत्र के तरह खेती भी सौपी जा रही है। इसके विरोध में हमने चलो दिल्ली का नारा दिया है। उन्होंने दिल्ली की हकीकत बताते हुए, किसानों तक,मजदूरों तक यह बात पहुंचाई है,की चीन और पाकिस्तान से पैसा लेकर यह आन्दोलन नहीं चल रहा है । वह अपने बलबूते पर लढ रहे है,और जीत रहे है।रामस्वरूप मंत्री ने कहाँ की,संविधान को कुचलने वाले इन तीन कानूनों का विरोध नहीं करेंगे तो देश में आज जो गैरबराबरी जो चोटी पर पहुँची है,वो खेती और खेतीहरों को भी बरबाद करके रहेगी। मजदूरों की आजीविका ही नहीं रहेगी और इसलिए इस आन्दोलन को ही समर्थन देना जरुरी है।सनोबर भाभी मंसुरी ने अपने वक्तव्य में कहाँ कि,एक महिला किसान अपने उपज का सही दाम देने के लिए और अपनी खेती गीधों से बचाने के लिए,लढ़ लढ़कर ही कुछ कर पाती है। मेधा पाटकर ने दिल्ली से आने के बाद संयुक्त किसान मोर्चा के सदस्य के रूपमें वक्तव्य में ये कहाँ कि अदानी की रोज की कमाई जब 384 करोड़ है,और अंबानी की रोज की कमाई जब 1085 करोड़ रूपये है, तो किसानों को न्यूनतम समर्थन मूल्य भी क्यों नहीं मिलता है? जबकि एक पानी की बॉटल में 55 पैसे लीटर से पानी सरकार से खरीदकर कंपनी को 20 रुपयों में 1 लीटर पानी बेचने की मोहल्लत है और इतने गुना कमाई होती है और 1 रुपये लागत पर 1.50 रुपया लाभ भी किसानों को क्यों नहीं मिलता है?क्यों नहीं मोदी सरकार और हर राज्य की सरकार न्यूनतम समर्थन मूल्य पर अपना कानून पास करके किसानों को सही मूल्य देकर कर्जदारी से मुक्त करती है?क्यों नहीं आत्महत्याओं को रोक पाती है?और यह भी कहाँ कि,आज देशभर के किसान जब लड़ रहे हैं, और 40 किसानों की जब शहादत दी गयी है, तब उनके ऊपर ख़लिस्तानी, पाकिस्तानी के आरोप लगाना,यह बेहद अवमानना है । पांच बार चर्चा में जब कि केंद्र सरकारके मंत्रियों ने कोई जवाब नहीं दिया गया, तब उन्होंने आखिर में 9 दिसंबर को लिखित में जवाब देकर खुदके कानूनों की त्रुटियोंको ही घोषित किया है। उसमें ये भी लिखा है कि खाद्यापूर्ती में पूंजी निवेष लाया जाएगा जिस्से की सार्वजनिक राशनिंग व्यवस्था नहीं बच पाएंगी और इसीलिए साथियों इन तीनों कानूनों का विरोध तो जरूरी है ही लेकिन बिजली बिल में भी किसानों की सब्सिडी खत्म करने की बात है,और इससे तो और घाटेका सौदा होकर,जब कि निश्चित रूपसे किसानोंकी खेती चली जाएगी,बेची जाएगी,तब बिजली बिल का भी विरोध करना जरूरी है। हमारी ये ट्रैक्टर रैली आगे बढ़ते हुए। जिसमे कई सारे राजनैतिक दलों के साथी,काँग्रेस से लेकर BSP तक के शामिल होंगे,और हम लोग कल धार जिले में आगे बढकर अपनी बात उजागर करते हुए 'चलो दिल्ली' का ऐलान तो करेंगे ही पर गली गली में इस आंदोलन की पोंछ और तेज करेंगे यही विश्वास है। महाराष्ट्र के साथियों ने इसमें सहभाग लिया है,माँगल्या भाई और रामभाई चौधरी ने किसानों के समर्थन में अपनी बात रखी है और लतिका बहन और युवतियोंने अपने गीत और नृत्य द्वारा किसानों के जोश को और तेज किया है। मंच पर मनावर विधायक डॉ हीरालाल अलावा, वरिष्ठ काग्रेस नेता शिवराम पाटीदार, नारायण जौहरी, महेंद्र तोमर, गेंदालाल भाई, रोहित ठाकुर,मुकेश भाई, कैलाश यादव, जगदीश पटेल, गौरी शंकर , कमला यादव, श्यामा मछुआरा आदी मोजूद थे।


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