*इंदौर~जहां अच्छे संस्कार होते हैं वहां अच्छा साहित्य जन्म लेता है* ~~

*डाॅ तिवारी की स्मृति में हुआ ग्यारह रचनाकारों का सम्मान*~~


*इंदौर।* जहां अच्छे संस्कार होते हैं वहीं अच्छा साहित्य और स्वस्थ साहित्यिक परंपरा जन्म लेती है। शिक्षा और साहित्य में परंपरा का बहुत महत्व होता है। सच्चा साहित्यकार राष्ट्रीय अस्मिता, श्रेष्ठ परंपरा, मानवीय और नैतिक मूल्यों पर विश्वास करता है।

यह बात वरिष्ठ साहित्यकार डाॅक्टर मिथिलेश दीक्षित (लखनऊ) ने कही। वह वरिष्ठ शिक्षक और लेखक  डाॅक्टर एस.एन. तिवारी स्मृति साहित्य सम्मान समारोह में मुख्य अतिथि के रूप में बोल रही थीं। वर्चुअल माध्यम से यह समारोह आयोजित किया गया। उन्होंने कहा कि वैदिक और पौराणिक काल से हमारा साहित्य विश्व का श्रेष्ठ और समृद्ध साहित्य है। साहित्य की वर्तमान स्थिति संतोषजनक तो है लेकिन बहुत  श्रेष्ठ नहीं कही जा सकती। आज  साहित्य में भीड़ अधिक है पर  स्तरीयता और गंभीरता कम दिखाई देती है।
समारोह में ग्यारह रचनाकारों को सम्मानित किया गया। जिन रचनाकारों का सम्मान हुआ उनमें श्रीमती माया बदेका (उज्जैन), श्री संतोष मोहंती (इंदौर) , श्रीमती इंदु पाराशर (इंदौर), श्रीमती वीना सिंह (लखनऊ), श्रीमती मंजुला भूतड़ा (इंदौर), श्री राम मूरत राही (इंदौर),  डाॅ. दीपेंद्र शर्मा (धार), श्री कारुलाल जमड़ा (जावरा), श्रीमती अंजलि गुप्ता सिफर (अंबाला), श्रीमती निधि जैन (इंदौर) और श्री आशीष दलाल (वड़ोदरा) शामिल हैं। इंदौर के पांचों सम्मानित रचनाकारों के घर जाकर भी समिति की ओर से उन्हें सम्मानित किया गया। समारोह में पत्रकार श्री मुकेश तिवारी (इंदौर) की तीसरी पुस्तक  उलझी-सी लड़की के आवरण पृष्ठ का विमोचन भी हुआ।

समारोह की अध्यक्षता कर रहीं विचार प्रवाह साहित्य मंच, इंदौर  की अध्यक्ष श्रीमती सुषमा दुबे ने कहा कि साहित्य ही व्यक्ति को निराशा की गर्त से उबारता है। विशेष अतिथि वरिष्ठ लेखिका श्रीमती अनघा जोगलेकर (गुड़गांव) ने साहित्य को ऐसा गुलदस्ता निरूपित किया जिसकी विभिन्न विधाओं के रंग-बिरंगे फूल अपनी खुशबू से समाज को महकाते हैं। विशेष अतिथि वरिष्ठ पत्रकार श्री गीत दीक्षित (भोपाल) ने युवा रचनाकारों से कहा कि कटपेस्ट की प्रवृत्ति से बचें और कर्म निष्ठ, कर्तव्य निष्ठ बनें।
सम्मानित रचनाकारों की चयन समिति के सदस्य श्री देवेन्द्र सिंह सिसौदिया ने चयन प्रक्रिया की जानकारी दी। डाॅ. पूजा मिश्रा ने  सरस्वती वंदना प्रस्तुत की। संचालन श्रीमती रश्मि चौधरी ने किया। आभार डाॅ. दीपा मनीष व्यास ने माना। सम्मानित हुए रचनाकारों को सेवानिवृत्त प्रधान अध्यापिका श्रीमती आत्मा तिवारी और श्रीमती अंजू श्रीवास्तव निगम ने शुभकामनाएं दीं।


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