झाबुआ~डीएपी खाद की बोरी 700 रुपए महंगी हुई,अब एक हैक्टेयर पर फसल की लागत भी 3500 रुपए बढ़ी~~


झाबुआ। संजय जैन~~

पूरा हिंदुस्तान पिछले एक साल से कोरोना महामारी से जूझ रहा है। चाहे व्यापारी हो, किसान हो या फिर आम आदमी। सभी कोरोना महामारी के कारण परेशान हैं। वहीं इस कोरोना महामारी के बीच इफ्को ने डीएपी खाद का रेट 700 रुपए बढ़ाकर किसान की कमर तोड़ दी है। इफ्को ने बढ़े हुए उर्वरकों की रेट लिस्ट सात अप्रैल को जारी की। हालांकि अभी किसानों को इस संबंध में जानकारी नहीं है। किसान अभी रबी सीजन की फसलों की थ्रेसिंग,कटाई बगैरह में लगा हुआ है। खरीफ  सीजन की बोवनी करने पर जब खाद खरीदने जाएगा तब उसे बढ़े हुए रेटों का पता चलेगा और उसकी आंखें रेट सुनते ही फटी की फटी रह जाएंगीं।






प्रति हेक्टेयर पर 3500 रुपए अकेले डीएपी का अतिरिक्त भार बढ़ गया.....
जिले में करीब 1 लाख हेक्टर जमीन में बोवनी होती है। एक साल में तकरीबन 5 हजार मैट्रिक टन डीएपी उर्वरक किसान खरीफ  और रबी फसलों में उपयोग करते हैं। अकेले जिला विपणन संघ-डीएमओ के गोदामों से किसान ने एक अप्रैल 2020 से 31 मार्च 2021 तक करीब 1 हजार मैट्रिक टन डीएपी खाद उठाया और खरीफ व रबी सीजन की फसलों में उपयोग किया। प्राइवेट दुकानों से भी इतना ही खाद उठाया गया। पहले डीएपी की एक बोरी यूरिया 12 सौ रुपए की निर्धारित थी। लेकिन अब इफको ने डीएपी की रेट बढ़ाकर 1900 रुपए कर दी है। जिससे एक किसान पर प्रति हेक्टेयर पर 3500 रुपए अकेले डीएपी का अतिरिक्त भार बढ़ गया है। सबसे ज्यादा असर लघु किसानों पर पड़ेगा।






बढ़े हुए रेटों के संबंध में जानकारी नहीं...
पांच से दस हेक्टेयर जमीन वाले किसान फसल की लागत भी नहीं निकाल पाएंगे। अभी किसान रबी सीजन की गेहूं की फसल की कटाई में लगा है। इसलिए किसान को डीएपी के बढ़े हुए रेटों के संबंध में जानकारी नहीं है। लेकिन रबी सीजन की कटाई के बाद किसान खरीफ  सीजन की तैयारी करेगा और बाजार में खाद खरीदने जाएगा तब किसान को डीएपी के बढऩे की जानकारी मिलेगी।






बढ़ाए रेट पर राज्य शासन पत्र जारी कर सकते हैं......
इंडियन फारमर्स फर्टिलाइजर कोआपरेटिव लिमिटेड के मार्केटिंग डायरेक्टर ने सात अप्रैल को उर्वरकों के बढ़े हुए रेटों के संबंध में पत्र जारी किया है। जिसमें डीएपी 1900,10/26/26 एनपीके 1775 रुपए,12/32/16 एनपीके 1800,20/20/0/13 एनपी 1350 और 15/15/15 एनपीके 1500 रुपए कर दिए हैं। सूत्र बताते हैं कि ये रेट फाइनल हैं और जल्द ही राज्य शासन भी इस संबंध में संबंधित विभागों को पत्र जारी कर सकती है।




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