झाबुआ~आंतरिक मूल्यांकन के आधार पर होगा 10वीं का रिजल्ट-प्रोरेट आधार पर परिवर्तित कर मंडल द्वारा भेजी गई ओएमआर शीट~~



झाबुआ। संजय जैन~~

सीबीएसई की तरह अब माध्यमिक शिक्षा मंडल ने भी कक्षा 10वीं की हाईस्कूल परीक्षा आयोजित नहीं करने का निर्णय लिया है। इस बार अद्र्धवार्षिक परीक्षा या प्री-बोर्ड परीक्षा के साथ-साथ यूनिट टेस्ट और आंतरिक मूल्यांकन के अंकों के आधार पर प्रत्येक विद्यार्थी को शाला द्वारा 100 अंकों में से प्राप्तांक दिए जाएंगे। इसके लिए माध्यमिक शिक्षा मंडल ने स्कूलों को ओएमआर शीट भेजी है।






प्रोरेट आधार पर परिवर्तित कर मंडल द्वारा भेजी गई ओएमआर शीट.......
इन ओएमआर शीट में विषयवार अधिकतम 20 अंक भरे जाएंगे। प्रत्येक परीक्षार्थी को विषयवार 100 में से प्राप्त अंकों को शाला द्वारा 20 अंकों में से प्राप्त होने वाले अंकों में प्रोरेट आधार पर परिवर्तित कर मंडल द्वारा भेजी गई ओएमआर शीट में विषयवार अंकित किए जाएंगे। इसके साथ ही अद्र्धवार्षिक परीक्षा या प्री.बोर्ड परीक्षाओं में किसी एक परीक्षा का 50 प्रतिशत अधिभार और यूनिट टेस्ट का 30 प्रतिशत अधिभार तथा आंतरिक मूल्यांकन के लिए 20 प्रतिशत अधिभार निर्धारित किया गया है। इस प्रकार यदि किसी परीक्षार्थी को उपरोक्त फार्मूले के आधार पर 100 में से कुल 80 अंक प्राप्त होते हैं तो ओएमआर शीट पर 16 अंक अजित किए जाएंगे।






विद्यार्थी का मूल अभिलेख सुरक्षित रखा जाएगा......
शाला प्राचार्य की भी यह जिम्मेदारी होगी कि अद्र्धवार्षिक परीक्षा प्री-बोर्ड परीक्षा,यूनिट टेस्ट और आंतरिक मूल्यांकन जिसके आधार पर विद्यार्थी का विषयवार मूल्यांकन किया गया है के मूल अभिलेख स्कूल में सील बंद लिफाफे में सुरक्षित रखा जाए।






वार्षिक प्रदर्शन के आधार पर ही मिलेंगे नंबर........
हाईस्कूल परीक्षा के साथ-साथ प्रायोगिक परीक्षाएं भी आयोजित नहीं की जाएंगी। लेकिन विषय के प्रायोगिक भाग की ओएमआर शीट में परीक्षार्थियों को उनके वार्षिक प्रदर्शन के आधार पर आंतरिक मूल्यांकन की तरह संबंधित संस्था द्वारा ओएमआर शीट्स में अंक दिए जाएंगे। इसके साथ ही इस साल हाईस्कूल परीक्षा की प्रावीण्य-मेरिट सूची जारी नहीं की जाएगी।






3 साल के औसत से 2प्रतिशत से ज्यादा नहीं होंगे औसत अंक........
स्कूल का पिछले तीन सालों का औसत अंक मंडल द्वारा शालाओं को उपलब्ध कराया जाएगा। रिजल्ट में इस बात का ध्यान रखा जाएगा कि वर्ष 2021 में शाला के औसत अंक 3 सालों के औसत अंकों के सर्वश्रेष्ठ से 2 प्रतिशत से ज्यादा नहीं हो सकेगा। यानी कि यदि किसी शाला का पिछले तीन वर्षों में सर्वश्रेष्ठ औसत अंक 72 प्रतिशत हैं तो इस वर्ष शाला द्वारा छात्रों को सभी विषयों के अंकों का औसत 72 से 74 तक ही होना चाहिए।




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