झाबुआ~12वीं के एग्जाम अगस्त में और रिजल्ट सितंबर में, ऐसा हुआ तो जेईई और नीट सितंबर-अक्टूबर तक ही कराए जा सकेंगे~~

सीबीएसई के पास मौजूद विकल्प के फायदे-नुकसान~~


झाबुआ। संजय जैन~~

सीबीएसई 12वीं की परीक्षा कराई जाए या नही, इसका फैसला केंद्र सरकार चर्चा के बाद लेगी। 12वीं के एग्जाम का सीधा असर जेईई व नीट पर भी पडऩा है।






खींच जाएंगे,जेईई व नीट भी सितंबर-अक्टूबर तक .....
सीबीएसई के दो प्रस्ताव हैं,इनमें एग्जाम अगस्त में कराने के बाद सितंबर तक रिजल्ट घोषित किया जा सकता है। एक्सपट्र्स का कहना है कि अगर 12वीं के एग्जाम अगस्त में कराए जाते हैं तो जेईई व नीट भी सितंबर-अक्टूबर तक खींच जाएंगे। एग्जाम के पैटर्न भी बदलने पड़ेंगे। जेईई एडवांस्ड तीन जुलाई और नीट 1 अगस्त को प्रस्तावित हैं। इससे पहले जेईई मेन के अप्रेल-मई के एग्जाम भी नहीं हो पाए हैं। आईआईटी हैदराबाद के निदेशक बीएस मूर्ति ने कहा कि जेईई मेन की स्थगित परीक्षाएं जून तक हो जानी चाहिए थी,लेकिन वर्तमान हालात के चलते जेईई मेन परीक्षा की संभावना नजर नहीं आती। पेरेंट्स व स्टूडेंट्स सोशल मीडिया के जरिए केंद्रीय शिक्षा मंत्री से ऑनलाइन एग्जाम की मांग कर रहे हैं। इसे लेकर स्टूडेंट्स ने लाखों ट्वीट किए हैं।






सीबीएसई के पास मौजूद विकल्प के फायदे-नुकसान......
पहला विकल्प....
परीक्षाएं निर्धारित परीक्षा केंद्रों पर कराई जाएं,जो कि सीमित हैं। केवल 19 प्रमुख विषयों की परीक्षा कराई जाए। कम महत्वपूर्ण विषयों में प्रदर्शन का आंकलन प्रमुख विषयों में किए गए प्रदर्शन के आधार पर किया जाए। परीक्षा पूर्व की गतिविधियों के लिए एक माह और परीक्षा कराने तथा परीक्षा के नतीजे घोषित करने के लिए दो माह की जरूरत है। परीक्षाएं कराने का संभावित महीना आगामी अगस्त हो सकता है और पूरी प्रक्रिया सितंबर अंत तक खत्म होगी। यदि तीन महीने का समय नहीं मिल पाता है और परिस्थितियां अनुकूल नहीं रहती हैं तो यह विकल्प व्यावहारिक नहीं होगा।






दूसरा विकल्प.....
12वीं कक्षा की परीक्षाएं दो बार में कराई जा सकती है। जहां अनुकूल स्थितियां हों,वहां उपयुक्त तारीख से परीक्षा शुरू की जा सकती हैं। इसके बाद के बचे हुए स्थानों पर परीक्षाएं 15 दिन बाद शुरू हों। तय तिथि पर कोरोना संक्रमण से संबंधित कारणों से कोई विद्यार्थी परीक्षा नहीं दे पाए तो उसे परीक्षा में बैठने का दूसरा मौका दें। इसके ससाथ ही परीक्षाओं का संचालन लचीला बनाने पर जोर दिया जाना चाहिए। परीक्षा केंद्रों की संख्या बढ़ाई जाए और परीक्षा समय 90 मिनट का हो। इसमें पेपर में वैकल्पिक और छोटे प्रश्न ही पूछे जाएं। इसमें परीक्षा के लिए 45 दिनों के समय की जरूरत होगी। इससे परीक्षार्थियों को भी सुविधा होगी।




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