धार~14 मई को अक्षत तृतीया के साथ भगवान परशुराम जी का जन्म उत्सव मनाया जाएग~


14 मई को अक्षत तृतीया के साथ भगवान परशुराम जी का जन्म उत्सव मनाया जाएगा । हालांकि कोरोना काल के चलते इस बार ब्राह्मण समाज ने परशुराम जयंती घर पर ही मनाने का निर्णय किया है । भगवान परशुराम ने सनातन धर्म की रक्षा और मानव जीवन को बचाने के लिए अपने असाधारण शौर्य , पराक्रम और शक्तियों का प्रयोग कर मायावी असुरों का प्रतिकार किया था । वर्तमान में कोरोना की महामारी भी मायावी असुरों की भांति कई रूप बदलकर मानव जीवन के लिए खतरा बन गई है । ऐसे में भगवान परशुराम जी की पांच विशेषताओं का पालन कर हम भी कोरोना जैसी महामारी का मुकाबला कर सकते हैं ।   मालवा के प्रसिद्ध ज्योतिषाचार्य डॉ. अशोक शास्त्री ने एक विशेष मुलाकात मे बताया की भगवान परशुराम  जी की इन पांच विशेषताओ को हमे अपनाना चाहिए ।
1.धैर्यवान :~ भगवान परशुराम ने कभी भी आवेश में आकर कोई निर्णय या काम नहीं किया । वे हमेशा धैर्यवान होकर समस्त मानव जाति के लिए  कार्य करते थे । कोरोना जैसी महामारी से निपटने के लिए हमें भी धैर्य से काम लेना होगा । हमें ऐसे संकट पूर्ण समय में अपना धैर्य नहीं खोना चाहिए । इसी से हम समय पर सही निर्णय कर इस बीमारी का हल कर सकते हैं ।
2. दानशील :~ भगवान परशुराम की एक विशेषता उनकी दान शीलता भी थी । आज जब कोरोना महामारी में सभी दूर लॉकडाउन में कामकाज , आवागमन बंद है । ऐसे में निर्धन और जरूरतमंदों को हमें खाद्य सामग्री के साथ ही जरूरत का हर सामान दान कर समाज की स्थिरता के लिए काम करना चाहिए । ताकि लोगों का मनोबल बना रहे ।
3. नैतिकता व न्याय प्रियता :~ आपदा में भी कई लोग अपने हितलाभ साधने के लिए अनैतिक कार्य कर रहे हैं साथ ही मानव समाज के लिए खतरा भी उत्पन्न कर रहे हैं ऐसे समय में हमें अपने नैतिक मूल्य का ध्यान रख पीड़ित लोगों की सहायता करनी चाहिए साथ ही इस संकट की घड़ी में जरूरतमंदों को न्याय दिलाने के लिए भी प्रयास करना चाहिए ।
4. माता पिता को माना ईश्वर :~ भगवान परशुराम ने अपने माता पिता को ही ईश्वर मना था । हमें भी अपने घर के बड़े बुजुर्गों का उसी प्रकार ध्यान रखकर उनकी देखभाल करना चाहिए ताकि वे इस संक्रमण की चपेट में ना आए और हमेशा परिवार में खुशहाली बनी रहे ।
5. संहारक और भक्ति का संगम :~ भगवान परशुराम की इस अलौकिक विशेषता से भी हम बहुत हद तक मानव जाति को कोरोना संक्रमण से बचा सकते हैं। जहां एक और कोरोना योद्धा के रूप में कई लोग काम कर रहे हैं वहीं दूसरी ओर सामान्य जन को भी अपने घर पर रहकर भक्ति का मार्ग प्रशस्त करना चाहिए ताकि आने वाले समय में हम इस संकट से उबर सकें। इसका संहार कर सकें ।


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