*नसरुल्लागंज ~संविदा स्वास्थ्य कर्मचारियों ने बीएमओ को सौंपा ज्ञापन, 24 मई को अनिश्चितकालीन हड़ताल की दी चेतावनी*~~

नसरुल्लागंज से जिला सीहोर ब्यूरो आनंद अग्रवाल की रिपोर्ट~~

नसरुल्लागंज प्रदेश भर के 19 हजार संविदा स्वास्थ्य कर्मियों ने 24 मई से अनिश्चित कालीन हड़ताल पर जाने की चेतावनी दी है। राज्य सरकार द्वारा 2018 में संविदा नीति बनाए जाने के बाद उसको अब तक लागू नहीं किए जाने का आरोप प्रदेश भर के संविदा स्वास्थ्य कर्मियों ने लगाया है। मध्यप्रदेश संविदा स्वास्थ्य कर्मचारी संघ के आह्वान पर नसरुल्लागंज सिविल अस्पताल के संविदा स्वास्थ्य कर्मचारियों नसरुल्लागंज बीएमओ मनीष सारस्वत को अवगत करा गया है।
      वही संविदा स्वास्थ्य कर्मचारियों ने बताया कि 24 मई से की जाने वाली अनिश्चित कालीन काम बंद हड़ताल के बारे में विस्तार से बताया कि प्रदेश भर के संविदा कर्मियों ने 17 मई से अपना चरणबद्ध आंदोलन प्रारंभ कर दिया है। पहले चरण में प्रदेश के समस्त कलेक्टर्स एवं सीएमएचओ, बीएमओ को मांगों के संबंध में ज्ञापन दिया जा चुका है। 18, 19 एवं 20 मई को कर्तव्य स्थल पर काली पट्टी बांधकर कार्य किया जा रहा है। अपनी मांगों के संबंध में श्री राठौर ने बताया कि संविदा स्वास्थ्य कर्मी अपनी जान जोखिम में डालकर कोविड 19 में भी निरंतर सेवा देने में लगे है, लेकिन उनका कोई भी सुरक्षित भविष्य नहीं है। उनके कई साथी कोविड 19 से संक्रमित होकर अपनी जान गंवा चुके है, लेकिन उनके परिवार को कोई भविष्य नहीं है। राज्य सरकार द्वारा 5 जून 2018 को संविदा नीति बनाई गई, जिसमें नियमित कर्मचारियों के समकक्ष 90 प्रतिशत के वेतन का प्रावधान था। जिसे राज्य के ही अन्य विभागों ने लागू कर दिया है, लेकिन 3 साल के बाद भी राज्य सरकार ने नीति को स्वास्थ्य संविदा कर्मियों के लिए लागू नहीं किया, बल्कि संविदा स्वास्थ्य के 17 केडर को समाप्त कर हजारों संविदा स्वास्थ्य कर्मियों का जीवन संकट में डाल दिया तथा उन्हें नौकरी से निकालकर उनके सामने रोजी-रोटी का संकट खड़ा कर दिया, जिससे वे परिवार सहित सड़क पर आ गए और बदतर जीवर जीने मजबूर हैं। 19 हजार संविदा स्वास्थ्य कर्मियों ने प्रदेश के संवेदनशील मुख्यमंत्री शिवराज सिंह चौहान तथा राज्य के स्वास्थ्य मंत्री प्रभुराम चौधरी से मांग की है, उनकी मांगों को तत्काल प्रभाव से पूरा किया जाए तथा उनका भविष्य सुरक्षित किए जाने की गारंटी सरकार लेकर 2018 की नीति तत्काल लागू करे।


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