*बुरहानपुर~52 वर्षीय मुमताज़ फेस्टिवल के लिए जिला प्रशासन की अनुमति मिली तो भव्य आयोजन होगा, अन्यथा रूम ऐप के माध्यम से कार्यक्रम करके पुरानी रिवायत को जिंदा रखा जाएगा: कहा शहजादा मोहम्मद आसिफ खान गौरी ने*         

बुरहानपुर(मेहलका इकबाल अंसारी)

मुमताज महल फेस्टिवल बुरहानपुर के मुख्य आयोजन करता और जुनूनी कैफियत के मालिक शहजादा मोहम्मद आसिफ खान गौरी ने जिला प्रशासन से मांग एवं आग्रह किया है कि उनके द्वारा 52 वर्षीय मुमताज महल फेस्टिवल को पुरानी परंपरा और रीति रिवाज अनुसार शायाने शान तरीक़े से आयोजित करने के लिए जिला प्रशासन विशेष अनुमति प्रदान करें, हम कोविड गाइडलाइन का पालन करते हुए मुमताज महल फेस्टिवल का भव्य आयोजन पूर्व निर्धारित तिथि पर संपन्न करेंगे। ठेले वाले, कब्र खोदने वाले, श्मशान घाट पर लकड़ी देने वाले, नाई धोबी जैसे निम्न स्तर के काम करने वालों को भी अवार्ड से नवाज कर शोहरत हासिल करने वाले और आम लोगों की नजर में नौटंकीबाज के रूप में मशहूर आयोजन करता शहजादा मोहम्मद आसिफ खान गौरी ने बताया कि कोरोना काल में देश की विपरीत परिस्थितियों के कारण हमारा आयोजन भी समारोह पूर्वक नहीं हुआ है। देश के संकट के समय हमने भी मुमताज के प्यार की खातिर अपना त्याग देकर इस कार्यक्रम का आयोजन नहीं कर सके। शहजादा मोहम्मद आसिफ खान गोरी ने कलेक्टर बुरहानपुर के माध्यम से जिला प्रशासन और विशेषकर आपदा प्रबंधन ग्रुप्स के माननीय सदस्यों से निवेदन किया है कि आज की मीटिंग में इस प्रस्ताव पर विचार कर कार्यक्रम के भव्य आयोजन की अनुमति कोविड प्रोटोकॉल के तहत प्रदान करें। उन्होंने कहा कि देश की नामी-गिरामी हस्तियां उनके निरंतर संपर्क में हैं और कार्यक्रम में आने के लिए और कार्यक्रम की गरिमा बढ़ाने के लिए आतुर हैं। आगामी दिनों में अनलॉक के तहत जिला प्रशासन की ओर से यदि वांछित अनुमति प्राप्त नहीं होती है तो हम अर्धशतक की पुरानी परंपरा और रीति रिवाज को कायम रखने के लिए 07 जून 2021 को ही झूम ऐप के माध्यम से ऑनलाइन आयोजन करके इस परंपरा का निर्वहन करेंगे। उन्होंने बताया कि हमने अपने पुराने दोस्तों और सहयोगियों के साथ ऑनलाइन कार्यक्रम की रूपरेखा भी अग्रिम रूप से तैयार कर ली है। केवल अन्तिम रूप दीया जाना है, हम अनलॉक की स्थिति का इंतजार कर रहे हैं, क्योंकि हमें अपनी पुरानी रिवायत को जिंदा रखना है,  कोरोना काल में भव्य आयोजन नहीं होने के कारण मुमताज महल की रूह तड़प रही है। बेगम मुमताज की मौत 1631 में हुई थी। शहजादा मोहम्मद आसिफ खान गौरी के द्वारा यह कार्यक्रम निर्बाध रूप से अर्धशतक से जारी है। शहजादा मोहम्मद आसिफ खान गौरी ने बताया कि के उनके युवा लेखक पुत्र और भारत के प्रख्यात शायर एवं कवि डॉक्टर वासिफ यार खान का काव्य संग्रह भी प्रकाशन के अंतिम चरणों में है, जिस का विमोचन भी प्रथक से एक गरिमा में कार्यक्रम में संपन्न किया जावेगा। शहजादा मोहम्मद आसिफ खान गौरी इस कार्यक्रम के माध्यम से बुरहानपुर का नाम देश और दुनिया में रोशन कर रहे हैं, वही आयोजन के माध्यम से नए कलाकारों, पर्यटन और संस्कृति को भी बढ़ावा दे रहे हैं और मरते दम तक शहजादा मोहम्मद आसिफ खान l गौरी का यह मिशन जारी रहेगा।


Share To:

Post A Comment: