*बुरहानपुर~6 वर्षीय मासूम बालिका ने पूरे महीने का रोजा रख कर तरावीह   की विशेष नमाज़ भी अदा की*~~
                
बुरहानपुर (मेहलका इकबाल अंसारी)

पवित्र रमजान के रोजे इस्लाम धर्म का तीसरा महत्वपूर्ण अंग है। इस्लाम धर्म की शिक्षा अनुसार बच्चों को धार्मिक गतिविधियों से जोड़ने, उन्हें संस्कारित करने के लिए छोटी उम्र से इसकी आदत डाली जाती है ताकि छोटे बच्चे बड़े होकर संस्कारवान एवं धार्मिक प्रवृत्ति के बने। बुरहानपुर के सिद्दीकी नगर में निवासरत मुज़ना फातिमा उम्र 6 वर्ष पिता मोहम्मद नौशाद ने पूरे रमजान के 30 रोजे रखे। साथ में तरावीह की विशेष नमाज भी बालिका ने अदा की। उसने बताया कि अपने माता-पिता से उसे यह प्रेरणा प्राप्त हुई है। अपनी इस एक माह की इबादत के साथ उसने देश-दुनिया के अमन और शांति, कोरोना से मुक्ति सहित विश्व कल्याण के लिए अल्लाह से नियमित रूप से दुआएं की है। मध्य प्रदेश हज वेलफेयर सोसाइटी के प्रदेश उपाध्यक्ष हाजी मतीन अजमल, माता पिता और परिवार के सदस्यों सहित शुभचिंतकों, इष्ट मित्रों ने भी मासूम बालिका मुजना फातिमा की हौसला अफजाई कर उसे भी अपनी नेक दुआओं से नवाजा है। अल्लाह इस मासूम रोजेदार " मुज़ना "  को दीन ए इस्लाम का दाई बनाए और दुनिया और आखिरत में कामयाबी व कामरानी नसीब फरमाए। आमीन सुम्मा आमीन।


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