*सुकर्मायोग में अक्षय तृतीया...दान करने से इंद्र के समान सुख की प्राप्ति ( डाँ. अशोक शास्त्री )*

          वैशाख शुक्ल तृतीया पर 14 मई को शुक्रवार के दिन सुकर्मा योग में आखा तीज मनाई जाएगी । इस संदर्भ मे मालवा के प्रसिद्ध ज्योतिषाचार्य डाँ. अशोक शास्त्री ने विशेष चर्चा मे विस्तृत रुप से बाताया कि धार्मिक मान्यता के अनुसार अक्षय तृतीया पर दान का विशेष महत्व है । धर्मशास्त्र के जानकारों के अनुसार इस दिन सुकर्मा योग होने से दिए गए दान का पुण्य फल इंद्र के समान सुख के रूप में प्राप्त होगा । आखातीज को अबूझ मुहूर्त की मान्यता है । इस दिन मांगलिक कार्यों के लिए मुहूर्त देखने की आवश्यकता नहीं है ।
ज्योतिषाचार्य डाँ. अशोक शास्त्री के अनुसार अक्षय तृतीया पर शुक्रवार के दिन सुकर्मा योग , तैतिल करण , मृगशिरा नक्षत्र तथा वृषभ राशि का चंद्रमा रहेगा । शास्त्रीय अभिमत से देखें तो शुक्रवार के दिन के स्वामी इंद्र है। सुकर्मा योग व मृगशिरा नक्षत्र के स्वामी भी इंद्र को माना गया है । शास्त्रीय मान्यता में इस प्रकार के विशेष योग में आने वाला विशेष पर्व अथवा त्यौहार महत्वपूर्ण माना जाता है । इसी मान्यता के अनुसार अक्षय तृतीया पर इन योगों में दिए गए दान का पुण्य फल इंद्र के समान सुख के रूप में प्राप्त होगा।
          डाँ. अशोक शास्त्री के अनुसार अक्षय तृतीया पर शिव मंदिरों में गलंतिका बांधने तथा भगवान श्रीकृष्ण को चंदन का अर्पण करने का विशेष महत्व है । इस दिन पितरों के निमित्त जल दान करना महापुण्य फलदायी बताया गया है ।
          डाँ. शास्त्री के मुताबिक आखातीज पर दो घट ( जल से भरे मिट्टी के कलश ) का विधिवत पूजन कर अलग - अलग ब्राह्मणों को दान करने का विशेष महत्व है । एक घट भगवान विष्णु के नाम तथा दूसरा घट अपने पितरों के नाम से दान किया जाता है । भगवान विष्णु के घट में जौ तथा पितरों के घट में काले तिल डालें । दोनों कलशों को सफेद कपड़े से ढंक कर उन पर खरबूजे का फल रखें । विधिवत पूजन के पश्चात इन्हें ब्राह्मणों को दान करें इससे भगवान विष्णु तथा पितरों की कृपा प्राप्त होती है ।
          ज्योतिषाचार्य डाँ. शास्त्री ने बताया कि युगादि तिथि है अक्षय तृतीया ज्योतिष शास्त्र में 12 में से 11 माह युगादि व मन्वादि तिथि का संयोग आता है । अर्थात इन्हें गणितीय पक्ष में युग के आरंभ की तिथि तथा मनुओं के मन्वंतर की तिथि कहा जाता है । शास्त्रीय मान्यता में जिस समय युग का आरंभ हुआ उन्हें युगादि तिथि कहा जाता है । अक्षय तृतीया युगादि तिथि की श्रेणी में आती है ।
          डाँ. शास्त्री के मुताबिक अक्षय तृतीया पर सोना खरीदने की भी परंपरा है । ऐसा माना जाता है कि इस दिन सोना खरीदने से घर परिवार मे सुख - समृद्धि आती है ।
          डाँ. शास्त्री ने बताया कि अक्षय तृतीया दिनांक 14 मई 2021 शुक्रवार को अक्षय तृतीया पूजन मुहूर्त  प्रातःकाल 05:38 से दोपहर 12:18 बजे तक रहेगा ।

                  *ज्योतिषाचार्य*
          डाँ. पं. अशोक नारायण शास्त्री
          श्रीमंगलप्रद् ज्योतिष कार्यालय
245 , एम. जी. रोड ( आनंद चौपाटी ) धार , एम. पी.
                  मो. नं.  9425491351

              *--:  शुभम्  भवतु  :--*


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