बाकानेर~अलीशा और और वजीर रमजान माह के पूरे रोजे रखकर इबादत कर रहे हैं और अल्लाह से फरियाद कर रहे हैं  हर बीमार को  सेहत तंदुरुस्ती मिले शिफा मिले~~

सैयद रिजवान अली बाकानेर जिला धार~~

बाकानेर ~ रोजमर्रा में  मां बाप के नेचर  उनके कार्य  उनके कर्तव्य  उनकी बातचीत का ढंग  और उनका व्यवहार अदब  और संस्कार  जैसा होता है  वैसे ही  प्रतिकृति  बच्चों में आती है  वह अपने बड़े मां-बाप दादा दादी के व्यवहार से प्रेरित होकर उस पर अमल करते हैं  युवा समाजसेवी   धार वाले के नाम से क्षेत्र में प्रसिद्ध शेख जमीर मोहम्मद शेख हारून मोहम्मद  के बच्चे अपने मां-बाप के पद चिन्हों पर चलते हुए  अलीशा और वजीर   माह रमजान के रोजे रखकर इबादत कर रहे दोनों बच्चों का नेचर मिलनसार और दयालु है प्राथमिक कक्षा के छात्र  छात्रा होकर जब स्कूल में कोई बच्चा घर से टिफिन नहीं लाता या भूल जाता तो यह दोनों अपना टिफिन उसे खुशी-खुशी खिला देते हैं  कहते हैं बेटियां नूर होती है शान और शौकत होती हैं जन्नत में भेजने का जरिया होती है घर आंगन की खुशहाली होती है कोरोना महामारी के बीच भीषण गर्मी में ऐतिहासिक  तापमान  40 से  43 डिग्री के तापमान में       रोजा    रमजान मुबारक माह पर्व में अब तक अलीशा ने पूरे बावीस रोजा रखें  और वजीर ने आठ रोजे रखे आगे भी  पूरे रोजे रमजान माह के रोजा रखकर देश दुनिया में अमन चैन भाईचारा कायम रहे बहन बेटियां नाना नानी दादा दादी पापा मम्मी  सॉरी रिश्तेदार  और दोस्त खुश रहे और कोरोना महामारी हमेशा के लिए दुनिया से चली जाए दुआएं मांगते हुए रोजा रखकर खुदा वंद करीम से पांचों वक्त नमाज पढ़कर दुआएं मांग रहे है अल्लाह सब की सुनता है खास करके मासूम बच्चों की जल्दी सुनता है और रोज दारो दुआएं जल्दी सुनता है की जल्दी ही कोरोना महामारी  पूरी दुनिया से चली जाए  खास करके भारत को निजात मिलेगी जो बीमार  है उन्हें शिफा और तंदुरुस्ती और सेहत मिले और कुदरती हवा में ऑक्सीजन इतनी मिले सबको कि दूसरी ऑक्सीजन की जरूरत ना पड़े आमीन


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