बाकानेर~रिजा और हया रमजान माह के पूरे रोजे रखकर इबादत कर रही हैं ~~

अल्लाह से फरियाद कर रही हैं यह करो ना महामारी हमेशा के लिए दुनिया से चली जाए~~

सैयद रिजवान अली बाकानेर~~

बाकानेर ~ रोजमर्रा में  मां बाप के नेचर  उनके कार्य  उनके कर्तव्य  उनकी बातचीत का ढंग  और उनका व्यवहार अदब  और संस्कार  जैसा होता है  वैसे ही  प्रतिकृति  बच्चों में आती है  वह अपने बड़े मां-बाप  के व्यवहार से प्रेरित होकर उस पर अमल करते हैं वरिष्ठ समाजसेवी  डॉक्टर इरफान कुरैशी  नाजिया कुरैशी ग्रीन पार्क इंदौर की बेटियां  अपने मां-बाप के पद चिन्हों पर चलते हुए रिजा फातिमा कुरेशी 10 वर्ष और हया फातिमा 6 वर्ष प्रसिद्ध समाजसेवी  डॉक्टर हाजी  असगर हुसैन कुरेशी  वाकानेर की नवासीया पूरे माह रमजान के रोजे रखकर इबादत कर रही है कहते हैं बेटियां नूर होती है शान और शौकत होती हैं जन्नत में भेजने का जरिया होती है घर आंगन की खुशहाली होती है कोरोना महामारी के बीच भीषण गर्मी में ऐतिहासिक  तापमान  40 से  43 डिग्री के तापमान में       रोजा    रमजान मुबारक माह पर्व में अब तक  19 रखें  और आगे भी  पूरे रोजे रमजान माह के रखकर देश दुनिया में अमन चैन भाईचारा कायम रहे बहन बेटियां नाना नानी दादा दादी खुश रहे और कोरोना महामारी हमेशा के लिए दुनिया से चली जाए दुआएं मांगते हुए रोजा रखकर खुदा वंद करीम से पांचों वक्त नमाज पढ़कर दुआएं मांग रही है अल्लाह सब की सुनता है खास करके मासूम बच्चों की जल्दी सुनता है और रोज दारो दुआएं जल्दी सुनता है की जल्दी ही कोरोना महामारी  पूरी दुनिया से चली जाए  खास करके भारत को निजात मिलेगी और कुदरती हवा में ऑक्सीजन इतनी मिले सबको कि दूसरी ऑक्सीजन की जरूरत ना पड़े आमीन


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