झाबुआ~अक्षय तृतीया पर अबूझ मुहूर्त,लेकिन नहीं गूंजेगी शहनाई~~

कर रहे छिपते छिपाते विवाह की तैयारियां,आखिर बेटी के हाथ जो पीले करने है~~


झाबुआ। संजय जैन~~

मई में वैसे तो शादियों को मुहूर्त कई है। लेकिन अक्षय तृतीया अबूझ मुहूर्त माना जाता है। आमतौर पर इस दिन काफी संख्या में सामूहिक विवाहों के साथ शादी समारोह होते है। लेकिन लगातार यह दूसरा साल होगा जब सामूहिक विवाह नहीं होंगे। इससे गरीब परिवारों के सामने बेटियों के हाथ पीले करने का संकट होगा। वहीं जो लोग बेटे बेटियों की शादियां करेंगे वह भी छिपते छिपाते। कारण प्रशासन ने 16 मई तक शादियों पर पूर्ण प्रतिबंध लगा दिया है। ऐसे लोग सभी संकटों का सामना करते हुए छिपते छिपाते शादियों की तैयारियों में जुटे है। जिनकी आगे कई माह या साल शादियों को मुहूर्त नहीं निकल रहे।






कर रहे छिपते छिपाते विवाह की तैयारियां,आखिर बेटी के हाथ जो पीले करने है.....
शादियों का मुहूर्त 12 मई से शुरू है। लेकिन अक्षय तृतीया 14 मई को है। आमतौर पर इस दिन हर मैरिज गार्डन आकर्षक लाइटिंग के साथ मेहमानों से जगमग रहता था तो दूल्हे सड़कों पर आसानी के साथ नजर आ जाते थे। लेकिन इस बार ऐसा नहीं होगा। कारण प्रशासन ने शादियों पर रोक लगा दी। यहीं नहीं जिले में होने वाले सामूहिक विवाह भी इस बार नहीं हो पाने के कारण जिले में होने वाले विवाह नहीं होंगे। ऐसे में कुछ लोग विवाह की तारीखों को आगे बढ़ा रहे हैं। तो कुछ छिपते छिपाते विवाह की तैयारियां कर रहे है। आखिर बेटी के हाथ जो पीले करने है।






परशुराम प्राकट्योत्सव और ईद पड़ सकती है एक साथ......
इस साल अक्षय तृतीया का पर्व 14 मई को है और इस दिन कई शुभ योग बन रहे हैं,जिससे इस तिथि का महत्व और अधिक हो गया है। धार्मिक दृष्टिकोण से भी अक्षय तृतीया को बेहद खास माना गया है। वैशाख महीने के शुक्ल पक्ष की तृतीया तिथि को अक्षय तृतीया के रूप में मनाया जाता है। कई जगहों पर इसे अखतीज के नाम से भी जाना जाता है। अक्षय तृतीया का दिन बेहद शुभ और पुण्य देने के साथ ही सौभाग्य और संपन्नता प्रदान करने वाला होता है। वहीं इसी दिन भगवान परशुराम जी का प्राकट्योत्सव भी है जो विप्रसमाज घरों में रहकर ही मनाएगा। यदि चांद 13 मई को दिखा तो मुस्लिम समाज का प्रमुख त्योहार ईदुल फितर भी 14 मई को मनाया जाएगा। ऐसे में गंगा जमुनी संस्कृति का संगम अक्षय तृतीया पर देखने को मिलेगा।




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