बाकानेर~रोजे रखकर पापा की याद में दादा से अस्पताल का निर्माण करवा दिया हसन में नवजीवन अस्पताल~~

सैयद रिजवान अली बाकानेर जिला धार~~

बाकानेर ~ बचपन  में यूं अचानक पिता का साथ छूट जाना हर बच्चे के दिल दिमाग पर घर कर जाता है और वह यह कुदरत से दुआ करता है कि तूने अचानक मेरे पिता को मेरे बचपन में में बुला लिया और अब किसी और के पिता को तू यूं मत बुलाना कम से कम उम्र के बच्चों को बड़ा हो जाने देना समझदार हो जाने देना और यह  नन्ना मासूम 7 वर्षीय सैयद हसन अली पिता सैयद अशफाक अली जुगनू यह फरियाद कुदरत से करता है बताया जाता है कि 3 वर्ष पूर्व जुगनू का अचानक हृदय गति रुक जाने से निधन हो गया था और कसरावद में चिकित्सा सुविधा उपलब्ध नहीं थी तभी से मासूम हसन कुदरत परवरदिगार अल्लाह ताला से दुआ मांगता था कि कसरावद में पापा की याद में अस्पताल बनवा लूंगा उसने अपने दादा सैयद साबिर अली और छोटे दादा सैयद हिफाजत अली से रो-रो कर कहा था मेरे पापा तो चले गए और किसी बच्चे के पापा नहीं जाए इस तरह आप पापा की याद में अस्पताल खुलवाना कसरावद में इस तरह जुगनू की याद में जुगनू चैरिटेबल ट्रस्ट द्वारा नवजीवन अस्पताल बनकर तैयार होकर सेवा दे रहा है जहां पर ऑक्सीजन निर्माण इकाई भी लगा दी गई है ताकि सभी को नव जीवन मिले हसन यह बात करते हुए आंख में आंसू आ जाते हैं और दिल भर जाता है वह रमजान के रोजे रखकर सबकी खैरियत के लिए नाना नानी दादा दादी मामा मामी फूफी फूफा जी सभी रिश्तेदार दोस्त अहबाब संपूर्ण मानव समाज की खैरियत कुशलता की दुआ मांग रहा है उसका सपना है पढ़ लिख कर एक दिन उसे बहुत बड़ा दिल का डॉक्टर बनना है और अपने पापा को अल्लाह जन्नत ए फिरदोस दें यह दुआ मांगता है हसन की जिद रंग लाई और कसरावद में नवजीवन अस्पताल स्थापित होकर सर्व सुविधा युक्त होकर सभी मरीजों की खास करके गरीब  मरीजों की सेवा कर रहा है कोरोना महामारी में हसन से प्रेरणा लेकर गांव गांव अनेक लोक साधन संपन्न है घर से आंसू दा है वह भी अपने गांव नगर में सर्व सुविधा अस्पताल खोलकर अनेक लोगों को नवजीवन देकर उनकी सेवा करके पुण्य कमा सकते हैं


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