परशुराम जन्मोत्सव ~~

भगवान परशुराम का जन्म अक्षय तृतीया के दिन हुआ था अतः उनकी शस्त्रशक्ति भी अक्षय है ~~

भगवान परशुराम का जन्म अक्षय तृतीया के दिन हुआ था अतः उनकी शस्त्रशक्ति भी अक्षय है । भगवान शिव के दिव्य धनुष की प्रत्यंचा पर केवल परशुराम ही बाण चढ़ा सकते थे , यह उनकी अक्षय शक्ति का ही परिचय है । इन्हें विष्णु का छठा अवतार भी कहा जाता है । उक्त जानकारी मालवा के प्रसिद्ध ज्योतिषाचार्य डाँ. अशोक शास्त्री ने एक विशेष चर्चा मे की ।
          डाँ. शास्त्री ने बताया की भगवान परशुराम को नियोग भूमिहार ब्राह्मण , चितपावन ब्राह्मण , त्यागी , मोहयाल , अनाविल और नंबूदिरी ब्राह्मण समुदाय मूल पुरुष या स्थापक के रूप में पूजते हैं ।
*भगवान परशुराम के गायत्री मंत्र इस प्रकार हैं:*
❀ ॐ ब्रह्मक्षत्राय विद्महे क्षत्रियान्ताय धीमहि तन्नो राम: प्रचोदयात् ॥
❀ ॐ जामदग्न्याय विद्महे महावीराय धीमहि तन्नो परशुराम: प्रचोदयात् ॥
❀ ॐ रां रां ॐ रां रां परशुहस्ताय नम: ॥
          डाँ. अशोक शास्त्री के अनुसार       आमतौर पर अक्षय तृतीया एवं  परशुराम जयंती एक ही दिन होती है , परन्तु तृतीया तिथि के प्रारंभ होने के आधार पर परशुराम जयंती , अक्षय तृतीया से एक दिन पूर्व भी हो सकती है ।
भगवान परशुरामके प्रसिद्ध मंदिर
* भगवान परशुराम मंदिर , त्र्यम्बकेश्वर , ‎नासिक , महाराष्ट्र
* परशुराम मंदिर , अट्टिराला , जिला कुड्डापह , आंध्रा प्रदेश
* परशुराम मंदिर , सोहनाग , सलेमपुर , उत्तर प्रदेश
* अखनूर, जम्मू और कश्मीर
* कुंभलगढ़ , राजस्थान
* महुगढ़ , महाराष्ट्र
* परशुराम मंदिर , पीतमबरा , कुल्लू , हिमाचल प्रदेश ,
* जनपव हिल, इंदौर मध्य प्रदेश
* परशुराम कुंड लोहित जिला , अरुणाचल प्रदेश - एसी मान्यता है, कि इस कुंड में अपनी माता का वध करने के बाद परशुराम ने यहाँ स्नान कर अपने पाप का प्रायश्चित किया था  ।

भगवान परशुराम के बारे में डाँ. शास्त्री ने बताया की परशुराम जी की माता रेणुका तथा पिता का नाम मुनि जमदग्नि है । भगवान परशुराम को रामभद्र , भार्गव , भृगुपति , भृगुवंशी तथा जमदग्न्य नाम से भी जाना जाता है।
          डाँ. शास्त्री ने बताया की  परशुराम दो शब्दों से मिलकर बना है ,             परशु अर्थात कुल्हाड़ी तथा राम । इन दो शब्दों को मिलाकर अर्थ निकलता है कुल्हाड़ी के साथ राम ।
          आपने कहा परशुराम शस्त्र विद्या के श्रेष्ठ जानकार थे परशुरामजी का उल्लेख रामायण , महाभारत , भागवत पुराण और कल्कि पुराण इत्यादि अनेक ग्रन्थों में किया गया है । कल्कि पुराण के अनुसार परशुराम , भगवान विष्णु के दसवें अवतार कल्कि के गुरु होंगे और उन्हें युद्ध की शिक्षा देंगे । भीष्म , गुरु द्रोण एवं कर्ण उनके जाने - माने शिष्य थे ।
         डाँ. अशोक शास्त्री ने बताया भगवान परशुराम शिवजी के उपासक हैं । उन्होनें सबसे कठिन युद्धकला    कलारिपायट्टू की शिक्षा शिवजी से ही प्राप्त की थी ।
          हिन्दू धर्म में परशुराम के बारे में यह मान्यता है , कि वे त्रेता युग एवं द्वापर युग से कलयुग के अंत तक अमर हैं।

( डाँ. अशोक शास्त्री )

                   *ज्योतिषाचार्य*
          डाँ. पं. अशोक नारायण शास्त्री
          श्रीमंगलप्रद् ज्योतिष कार्यालय
245 , एम. जी. रोड ( आनंद चौपाटी ) धार , एम. पी.
                  मो. नं.  9425491351

           *--:  शुभम्  भवतु  :--*


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