*धार~विश्व बैंक के सामुदायिक भागीदारी सड़क सुरक्षा कार्यक्रम क्रियान्वयन हेतु जिले का चयन* ~~

*चिन्हित ब्लैक स्पाट के अलावा भी दुर्घटना संवेदी क्षेत्र का चयन करें- कलेक्टर सिंह*~~


धार। (डॉक्टर अशोक शास्त्री)

अच्छी सड़कें,वाहनों की ओवर स्पीड,ट्रैफिक नियमों का पालन ना करना आदि वजहों से धार जिला समूचे प्रदेश में सड़क दुर्घटनाओं में प्रथम पायदान पर है।यही कारण है कि विश्व बैंक के सामुदायिक भागीदारी सड़क सुरक्षा कार्यक्रम क्रियान्वयन हेतु जिले का चयन पायलट प्रोजेक्ट के रूप में किया है।
        कलेक्टर आलोक कुमार सिंह की अध्यक्षता में आज कलेक्टर कार्यालय के सभागार में सड़क दुर्घटनाओं से लोगों को बचाने के लिए जरूरी इंजीनियरिंग, सड़क सुरक्षा कानूनों को लागू करवाना, लोगों को सड़क सुरक्षा हेतु शिक्षित करना और दुर्घटना पश्चात इलाज की व्यवस्था के बारे में संबंधित विभागों के अधिकारियों की बैठक आयोजित की गई। बैठक में इन सभी बिंदुओं पर प्रेजेंटेशन दिया गया और जरूरत के मुताबिक सुझाव नोट किए गए।
बैठक में बताया गया कि जिले में कुल 14 स्थानों को ब्लेक स्पाट चिन्हांकित किया गया है। जिसमें रोड सेफ्टी ऑडर इंप्रूव करेगे । कलेक्टर श्री सिंह ने कहा कि इसके साथ जिले के अन्य क्रिटीकल स्थानों पर भी प्रोजेक्ट के तहत कार्य किया जाए। जिससे उन सड़कों का भी बेहतर ट्रीटमेंट हो जाए। यह बहुत बड़ा प्रोजेक्ट है। इससे तहत जिले में अधिक से अधिक कार्य किए जाए। इस प्रोजेक्ट में बदनावर सरदारपुर, धामनोद, मनावर, कुक्षी तथा धरमपुरी में कार्य किया जाए। इसके साथ ही स्मार्ट ट्रफिक सिस्टम के लिए भी एक कन्ट्रोल कमांड सेंटर बने। दुर्घटनाओं से बचाव और त्वरित सहायता के लिए कम्यूनिटी हेल्थ सिस्टम की आवश्यक्ता है।   बताया गया कि सड़क उपयोगकर्ताओं के सभी वर्गों की सुरक्षा सुनिश्चित करने के लिए नागरिक केंद्रित सड़क सुरक्षा विकसित करना है। जिसमें कमजोर सड़क उपयोगकर्ता समूहों, जैसे पैदल चलने वालों, साइकिल चालकों और मोटरसाइकिल चालकों पर अतिरिक्त ध्यान दिया गया है। संबंधित नागरिकों और समुदायों के समर्थन और भागीदारी के साथ योजना बनाई, विकसित और निष्पादित की जाएगी।कार्यक्रम का लक्ष्य स्थानीय समुदायों का सशक्तिकरण होगा और उन्हें अपनी सुरक्षा के साथ-साथ अन्य सड़क उपयोगकर्ताओं की सुरक्षा की जिम्मेदारी लेने में सक्षम बनाना होगा। यह परियोजना स्थानीय समुदायों को सड़कों और सड़क के किनारे की सुविधाओं की सुरक्षा के लिए शिक्षित और प्रोत्साहित करेगी।   ज्ञात रहे कि मध्य प्रदेश ग्रामीण सड़क विकास प्राधिकरण द्वारा प्राइसवाटरहाउस कूपर्स प्राइवेट लिमिटेड को "सामुदायिक भागीदारी सड़क सुरक्षा कार्यक्रमआयोजित करने के लिए परामर्श सेवाएं प्रदान करने के लिए नियुक्त किया गया है।जिले में प्रमुख हितधारकों से सड़क सुरक्षा के विभिन्न पहलुओं जैसे सड़क सुरक्षा जागरूकता और शिक्षा प्रवर्तन, इंजीनियरिंग हस्तक्षेप और दुर्घटना के बाद देखभाल और आपातकालीन सेवा पर अध्ययन होगा। एमपीआरआरडीए, एमपीपीडब्ल्यूडी, पुलिस विभाग स्वास्थ्य विभाग,शिक्षा विभाग, राज्य अपराध रिकॉर्ड ब्यूरो और परिवहन विभाग जिले में सड़क सुरक्षा के मुद्दों और अवधारणाओं के बारे में निष्कर्ष निकालने के लिए डेटा का विश्लेषण करेंगे।

*सीपीआरएसपी परियोजना के मुख्य बिंदु*
.व्यापक ग्रामीण और शहरी समुदाय आधारित सड़क सुरक्षा कार्य।
• सड़क दुर्घटना के उच्च रिकॉर्ड वाले चयनित ग्रामीण सड़कों और शहरी सड़कों पर आधारभूत अध्ययन और मृत्यु दर।
• व्यापक ग्रामीण और शहरी सामुदायिक सड़क सुरक्षा कार्य योजना का विकास।
• सड़क किनारे समुदाय को प्रवर्तन में शामिल करने के लिए समय-सीमा के साथ रोलआउट रणनीति योजना का विकास, आपातकालीन प्रतिक्रिया और सामुदायिक सड़क सुरक्षा जागरूकता बढ़ाना।
*सड़क सुरक्षा जागरूकता और नागरिक जुड़ाव*
• नागरिक जुड़ाव के माध्यम से स्थानीय समुदायों को संवेदनशील बनाने के लिए एक व्यापक संचार और जागरूकता कार्यक्रम तैयार करना, योग्य 'अभियान एजेंटों की पहचान और नियुक्ति करके जागरूकता कार्यक्रम चलाना, जो स्थानीय एनजीओ/सीबीओएस/एसएचजी हैं, जिनका जिले में जमीनी स्तर पर अच्छा संबंध है।
• आधारभूत रिपोर्ट और परिवर्तित किए जाने वाले प्रमुख सड़क उपयोगकर्ता व्यवहारों के आधार पर एक व्यापक अभियान तैयार करना।
•  बेसलाइन डेटा और क्रैश इकोसिस्टम के आधार पर, जमीनी स्तर पर सड़क सुरक्षा कार्य समूहों की स्थापना और सामुदायिक सड़क सुरक्षा स्वयंसेवकों की भी नियुक्ति।
• स्वयंसेवकों को सड़क सुरक्षा और दुर्घटना के बाद आपातकालीन देखभाल पर प्रशिक्षण।
• आवश्यक सूचना, शिक्षा और संचार  सामग्री की तैयारी।
*सड़क सुरक्षा इंजीनियरिंग*
• आधारभूत डेटा संग्रह का संचालन और ग्रामीण और शहरी समुदाय में आधारभूत अध्ययन रिपोर्ट तैयार करना, सड़क सुरक्षा कार्रवाई।
• व्यापक ग्रामीण और शहरी समुदाय सड़क सुरक्षा इंजीनियरिंग वृद्धि योजना बनाना, प्रत्येक सड़क सुरक्षा इंजीनियरिंग गतिविधियों के लिए रणनीति और समयरेखा तैयार करना।
• एमपीआरआरडीए के तहत सड़क सुरक्षा प्रकोष्ठ की स्थापना।
• दुर्घटना डेटा या पुलिस/पीडब्ल्यूडी/एमपीआरआरडीए/एमपीआरडीसी के पास उपलब्ध ब्लैकस्पॉट के विवरण के आधार पर ब्लैकस्पॉट में सुधार।
.मॉडल स्ट्रीट डिज़ाइन का विकास, इस कार्यक्रम के तहत विकसित की जाने वाली मॉडल स्ट्रीट की लंबाई 15 किलोमीटर से अधिक नहीं होनी चाहिए।
• सुरक्षित गलियारा प्रदर्शन कार्यक्रम का डिजाइन और विकास।15-20 किमी लंबी सड़क पर सड़क सुरक्षा संबंधी  शिक्षा और दुर्घटना के बाद का प्रबंधन।
• सड़क सुरक्षा प्रशिक्षण सामग्री विकसित करना और यातायात प्रबंधन, सड़क सुरक्षा हेलमेट का प्रयोग, सीटबेल्ट, गति, आक्रामक ड्राइविंग, आदि, राजमार्ग सुरक्षा गश्त, सड़क उपयोगकर्ता का व्यवहार , सड़क सुरक्षा का पता लगाने में पुलिस अधिकारियों के लिए प्रशिक्षण आयोजित करना। सामुदायिक भागीदारी और नागरिक जुड़ाव के प्रभावी उपयोग हेतु अधिकारियों को प्रशिक्षित करना।
*दुर्घटना के बाद का आपातकालीन प्रबंधन*
    दुर्घटना के बाद के आघात प्रबंधन की वर्तमान स्थिति पर विस्तृत अध्ययन  और कमियों और संबंधित समाधानों का पता लगाना। इस आधारभूत अध्ययन में जिले में स्वास्थ्य केंद्रों, जिला अस्पतालों की संख्या के साथ-साथ उनकी ट्रॉमा केयर सुविधाओं का विवरण भी होगा।
•बेहतर ट्रॉमा देखभाल प्रदान करने के लिए ट्रॉमा केयर सुविधाओं को अपग्रेड करने के लिए सिफारिश। वर्तमान स्थिति की समीक्षा के बाद सिंगल क्रैश रिपोर्टिंग कम्युनिकेशन सिस्टम की स्थापना।
• व्यापक दुर्घटना के बाद आपातकालीन देखभाल और आघात प्रबंधन कार्यक्रम विकसित करना। जमीनी हकीकत का मूल्यांकन करना।
• स्थानीय सामुदायिक सड़क सुरक्षा स्वयंसेवकों और राजमार्ग पुलिस गश्ती दल के सदस्यों को बुनियादी बचाव कार्यों, प्राथमिक चिकित्सा और बुनियादी आघात प्रबंधन पर प्रशिक्षण देना।
.लेवल-टू ट्रॉमा केयर सेंटर्स की स्थापना: आधारभूत अध्ययन के आधार पर आपातकालीन विभाग की स्थिति का तकनीकी ऑडिट। अनुशंसित अस्पतालों की ट्रॉमा केयर सुविधा। आघात देखभाल केंद्र के रूप में अनुशंसित अस्पताल/अस्पतालों के लिए एक विस्तृत उन्नयन योजना का विकास।
        उल्लेखनीय है कि भारत में हर साल लगभग पांच लाख सड़क दुर्घटनाओं में लगभग एक लाख 50 हजार लोग मारे जाते हैं और पांच लाख घायल होते हैं। दुनिया में होने वाली दुर्घटनाओं में होने वाली मौतों में भारत की हिस्सेदारी करीब 11 फीसदी है।


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