*बाकानेर~रिश्ते में तो वह सबके दोस्त होते हैं, नाम है सैयद रिज़वान~~

बाकानेर ~ राष्ट्रीय प्रेस दिवस 17 नवंबर 1989.  से ... 32 बरस का वक्फा कम नहीं होता। पत्रकारिता प्रारंभ करने वाले बहुत कुछ बदला, नहीं बदला तो उस शख्स का व्यवहार, अपनापन, दोस्ती, मुहब्बत, मदद के लिए हमेशा तत्पर रहने वाला सरल स्वभाव। लंबे दोस्ती के रिश्ते के सफर में अहसास ये भी हुआ कि उनका ये व्यवहार किसी एक मखसूस व्यक्ति के लिए नहीं है, ये अखलाक वे अपने खून की रवानी में, दिल की हर धड़कन में, अपनी हर एक सांस में लेकर चलते हैं और इसमें सराबोर होने वाला हर वह व्यक्ति होता है, जो प्रत्यक्ष या अप्रत्यक्ष रूप से उनके संपर्क में आता है...।
नाम सैयद रिज़वान अली है... काज़ी साहब, सैयद साहब,  साहब के नाम से पहचाने और पुकारे जाते हैं....। पत्रकारिता का उनका लंबा सफर एक दौर के रूप में याद रखा जाना चाहिए। हर बड़े या छोटे अखबार से उनका नाम जुड़ा, समाज की हर अच्छी बुरी खबर के लिए उनकी कलम ने हरकत पाई।
रिज़वान अच्छे पत्रकार हैं, अच्छे समाजसेवी हैं, अच्छे शिक्षक हैं या अच्छे इंसान... आसानी से तय नहीं किया जा सकता। उनसे जो एक बार मिल लिया, उनका मुरीद होकर रह गया... उनके मुरीदों की लंबी फेहरिस्त में एक अदना सा व्यक्ति मैं भी हूं...।
आज सैयद साहब की *योम ए पैदाइश* का दिन है। अल्लाह से दुआ है, जिस तरह 24 जुलाई 2021 को 48 का सफर उन्होंने दम के साथ पूरा किया है, 84 में भी उनकी ये ऊर्जा बनी रहे। अल्लाह सैयद साहब को सेहत, तंदुरुस्ती, इज्जत, शोहरत, कामयाबी, कामरानी की दौलत से हमेशा मालामाल रखें। पत्रकारिता में उन्हें वाकानेर धार जिले से लेकर भोपाल और देश की राजधानी दिल्ली सभी पार्टी के राजनेता और प्रशासनिक अधिकारी उन्हें नाम से जानते हैं और यह बहुत कम पत्रकारों को नसीब होता है हम तो इतना कहेंगे कलम के लिए जौहर दिखाने वाले निष्पक्ष न्यायिक कलम चलाने वाले पत्रकार को साधुवाद शुभकामना दिली मुबारकबाद*


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