झाबुआ~प्रतिपदा के बाद दूज व अष्टमी के बाद नहीं आएगी नवमी तिथि~~


झाबुआ। संजय जैन~~

इस साल 25 जुलाई से शुरू हो रहा श्रावण मास 29 दिन का है। यह 22 अगस्त तक रहेगा। चार सोमवार का योग है। इस श्रावण की खूबी होगी कि तिथि पर तिथि होगी। सप्तमी के अगले दिन सप्तमी होगी। जबकि कृष्ण पक्ष में पड़वा के बाद द्वितिया व शुक्ल पक्ष की अष्टमी के बाद नवमी तिथि नहीं आएगी। ऐसा चंद्रमा के कोणीय चलन से होगा। इस वजह से तिथि की वृद्धि या क्षय होगा। नेशनल अवॉर्ड प्राप्त विज्ञान प्रसारक सारिका घारू ने बताया अमावस्या के दिन सूर्य और चंद्रमा के बीच अंतर जीरो डिग्री होता है। अगले लगभग 24 घंटे में चंद्रमा आगे बढ़ जाता है और यह अंतर 12 डिग्री हो जाता है। 12 डिग्री होने के लिए जो अवधि लगती है उसे तिथि कहते हैं।






 तिथि वृद्धि व तिथि का क्षय से बदलाव.......
सूर्योदय के समय उदया तिथि होती है उसे ही पूरे दिन माना जाता है। भले ही सूर्योदय के कुछ समय बाद ही अगली तिथि आ रही हो। ऐसा ही श्रावण मास के कृष्ण पक्ष की सप्तमी तिथि 30 व 31 जुलाई को दो दिन रहेगी। इसे तिथि वृद्धि कहते हैं।






कारण -चंद्रमा के अंडाकार पथ पर परिक्रमा......
चंद्रमा,पृथ्वी की परिक्रमा अंडाकार पथ में करता है। इस कारण चंद्रमाए पृथ्वी से हमेशा समान दूरी पर नहीं रहता है। इस कारण 12 डिग्री का कोण बनाने के लिए चंद्रमा को कभी ज्यादा चलना पड़ता है तो कभी कम। इसलिए तिथि की अवधि कभी 24 घंटे से अधिक होती है कभी 24 घंटे से कम। यह लगभग अवधि 26 घंटे और 19 घंटे के बीच हो सकती है।






-अगर किसी तिथि की अवधि 24 घंटे से कम है और वह सूर्योदय के बाद आरंभ हुई और अगले सूर्योदय के पहले ही खत्म हो गई तो यह तिथि क्षय कहलाता है। कृष्ण पक्ष की दूज व शुक्ल पक्ष की नवमी का क्षय है। 25 जुलाई को पड़वा के बाद 26 को दूज की बजाय सीधे तीज तिथि आएगी। 16 अगस्त को अष्टमी के बाद 17 को नवमी की बजाय दसमी तिथि आएगी।




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