झाबुआ~ रक्षाबंधन-पीला,सफेद रक्षा सूत्र बांधने से होगा स्वास्थ्य लाभ~~

झाबुआसंजय जैन~~

भाई-बहन के स्नेह का प्रतीक रक्षाबंधन पर्व श्रावण शुक्ल पक्ष की पूर्णिमा 22 अगस्त को मनेगा। इस दिन भद्रा नहीं होने से पूरे दिन पर्व रहेगा। ज्योतिषियों के अनुसार इस दिन सुबह 7.52 बजे से गुरु-चंद्र योग प्रारंभ हो जाएगा। गुरु-चंद्र की यह युति गजकेशरी योग बना रही है। इस दिन गजकेशरी योग और धनिष्ठा नक्षत्र में रक्षाबंधन पर्व आया है। इस दिन शुभ फल देने वाले ग्रह योग रहेंगे। लोक जीवन में यह भाई.बहन का त्योहार है। शास्त्रीय परंपरा में इसमें रक्षासूत्र का बंधन होता है। यह रक्षासूत्र पहनने वाले की रक्षा के लिए होता ह, न कि पहनाने वाले की रक्षा के लिए। इस रक्षासूत्र को घर पर ही तैयार किया जाता है।
भद्रा 22 अगस्त की सुबह 5.40 बजे  होगी समाप्त ......
ज्योतिषाचार्य पं.उपाध्याय ने बताया कि रक्षाबंधन के लिए परा व्यापिनी तिथि ली जाती है। यदि वह दो दिन हो,या दोनों दिन न हो,तो पूर्वा लेनी चाहिए। यदि इसमें भद्रा आ जाए तो उसका त्याग किया जाता है। भद्रा में श्रावणी एवं फाल्गुनी दोनों वर्जित है,क्योंकि श्रावणी में राजा का एवं फाल्गुनी में प्रजा का नाश होता है। भद्रा 22 अगस्त की सुबह 5.40 बजे ही समाप्त हो जाएगी। इस दिन पंचक रहेगा,लेकिन इस पर्व पर पंचक होना कोई बाधा नहीं है। इस दिन पीला व सफेद से स्वास्थ्य लाभ और शिक्षा में प्रगति,संतान सुख,गुरुजनों से सहयोग मिलेगा।
गुरु के साथ चंद्र का गोचर शुभ संयोग........
इस वर्ष रक्षाबंधन पर्व पर धनिष्ठा नक्षत्र रहेगा। सामान्यत यह त्योहार श्रवण नक्षत्र में मनता है। गुरु कुंभ राशि में वक्री है,उसके साथ में चंद्र का गोचर गजकेसरी योग का निर्माण कर रहा है। सूर्य,बुध एवं मंगल सिंह राशि में रहेंगे। सिंह सूर्य के स्वयं के स्वामित्व वाली राशि है, साथ में मंगल उसका मित्र है। शुक्र मिथुन राशि में रहेगा। यह पर्व शुभ फल प्रदान करने वाला होगा।
रक्षाबंधन की कथा........
देवासुर संग्राम में देवताओं को पराजित होना पड़ा। इंद्र व अन्य देवता दुरूखी एवं चिंतित हो देव गुरु बृहस्पति के पास गए। इंद्र ने कहा न तो मैं यहां सुरक्षित हूं ना यहां से जा सकता हूं। ऐसी दशा में मेरा युद्ध करना भी अनिवार्य है,जबकि हमारी लगातार हार हो रही है। यह बातें इंद्राणी ने भी सुनी,तब उसने कहा कल श्रावण शुक्ल पक्ष की पूर्णिमा है।मैं विधि-विधान से रक्षा सूत्र तैयार करूंगी,उसे आप ब्राह्मणों से बंधवा लेना इससे आप की विजयी होगी। दूसरे दिन इंद्र ने विधि-विधान से उस रक्षा सूत्र को धारण किया, जिसके प्रभाव से उसकी विजयी हुई। तब से यह पर्व मनाया जाने लगा। इस दिन बहनें भाइयों को रक्षासूत्र बांधती है।
राखी बांधने के शुभ मुहूर्त......
1-सुबह 9 से 10 बजे तक                 लाभ
2-सुबह 10.37 से दोप 12.13 तक     अमृत
3-दोपहर 1.49 से 3.25 तक              शुभ रहेगा


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