झाबुआ~सार्वजनिक गणेश उत्सव पर फैसला नहीं,मूर्तिकारों में असमंजस-पीओपी की मूर्ति पर रोक,बनाते मिले तो होगी कार्रवाई~~


झाबुआसंजय जैन~~

गणेशोत्सव को 15 दिन ही है। 10 सितंबर से गणेश उत्सव शुरू होना है। लेकिन अब तक प्रतिमाओं की ऊंचाई और सार्वजनिक गणेश प्रतिमा स्थापना को लेकर अभी तक कोई फैसला नहीं हुआ है। हालांकि ज्यादातर मूर्तिकारों ने पिछले साल की सख्ती को देखते हुए बडी प्रतिमाएं नहीं बनाई हैं। छोटी प्रतिमाएं बनाना शुरू की हैं। इनकी संख्या भी कम है। सार्वजनिक गणेशोत्सव समिति सदस्यों को प्रशासन की ओर से प्रतिमा स्थापित करने की अनुमति के इंतजार में हैं।






पीओपी की प्रतिमा बनाने पर प्रतिबंध......
मप्र प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड ने गणेश एवं दुर्गा उत्सव के लिए पीओपी की प्रतिमा बनाने पर प्रतिबंध लगा दिया है। मप्र प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड के क्षेत्रीय कार्यालय ने आदेश जारी किए हैं। इसमें कहा है कि कारीगर व मूर्तिकार पीओपी की प्रतिमाएं नहीं बनाएं। यह प्रतिबंधित है। इनकी बजाय मिट्?टी की प्रतिमाएं बनाई जाएं। पीओपी की मूर्ति बनाते मिलने पर मूर्तिकार पर दो साल का प्रतिबंध लगाया जाएगा।






नगरीय निकायों में पंजीकृत होना चाहिए......
 मूर्ति बनाने वाले शिल्पकारों व कारीगरों को नगरीय निकायों में पंजीकृत होना चाहिए। पंजीकरण शर्तों का उल्लंघन करने और जारी निर्देशों का पालन नहीं करने पर मूर्ति निर्माता के खिलाफ  कम से कम दो वर्ष के लिए प्रतिबंधित करने की कार्रवाई की जाएगी। बोर्ड के अनुसार प्लास्टर ऑफ  पेरिस-पीओपी से निर्मित मूर्तियों पर पूर्णत प्रतिबंध लगाया है। पीओपी से प्राकृतिक जलस्रोतों की गुणवत्ता खराब होती है।






समिति के सदस्यों को गाइड लाइन का इंतजार ......
गणेशोत्सव में जिले में 300 अधिक स्थानों पर सार्वजनिक समितियां भगवान गणेश की प्रतिमाएं स्थापित करती हैं। इसके अलावा घरों में भी भगवान गणेश का पूजन होता है। 10 दिवसीय गणेश उत्सव के लिए एक माह पहले से तैयारियां शुरू हो जाती हैं। लेकिन इस बार अब तक स्पष्ट नहीं है कि प्रतिमाएं स्थापित होगी या नहीं। इसके पीछे कारण है कि पिछले साल कोरोना संक्रमण के कारण सार्वजनिक गणेश प्रतिमाओं की ऊंचाई भी चार फीट निर्धारित कर दी थी। धार्मिक व सांस्कृतिक कार्यक्रमों पर रोक थी। प्रशासन की सख्ती के कारण कलाकार भी बड़ी प्रतिमाएं नहीं बना रहे हैं। गणेश उत्सव समिति के सदस्यों को गाइड लाइन का इंतजार है। समितियों के सदस्य शीघ्र गाइड लाइन जारी करने की मांग को लेकर प्रशासन के अधिकारियों से मिलने का मन बना रहे हैं।






रक्षाबंधन के बाद सजती है गणेश प्रतिमाओं की दुकानें.....
10 सितंबर से 10 दिनी गणेशोत्सव की शुरुआत होगी। इसको लेकर कलाकार प्रतिमाओं को अंतिम रूप देने में लगे हैं। रक्षाबंधन के बाद मुख्य बाजार क्षेत्र में गणेश प्रतिमाओं की दुकानें सजने लगेंगी। मूर्तिकारों ने अब तक बड़ी प्रतिमाओं को आकार देना शुरू नहीं किया है।





 
प्रतिमा निर्माण पर हो निकाय की निगरानी......
नगर पालिकाओं और नगर परिषदों को पीओपी बनाने वालों पर कार्रवाई की जिम्मेदारी है। मूर्ति निर्माताओं को स्पष्ट किया है कि मूर्तियों का निर्माण पीओपी के स्थान पर मिट्टी से करें। साथ ही मूर्ति निर्माण में कैमिकल रंग के स्थान पर प्राकृतिक रंगों का उपयोग करें। प्राकृतिक रंग जैसे पत्तियों,फूलों,सफेद,लाल मिट्टी और मसालों में काम आने वाली सामग्रियों का उपयोग किया जा सकता है।






कलाकार ऐसे बनाएं मूर्तियां.......
-मूर्तियों को केवल प्राकृतिक,जैव निम्नीकरण योग्य,विषाक्तहीन,अकार्बनिक कच्चे माल जैसे पीओपी,प्लास्टिक,थर्माकोल से मुक्त पवित्र और चिकनी मिट्टी से बनाया जाएं।
-मूर्तियों में आभूषण बनाने के लिए सूखे फूल,पुवाल का उपयोग करें।
-मूर्तियों को आकर्षक बनाने के लिए प्राकृतिक रेजिन का एक चमकदार सामग्री के रूप में उपयोग किया जा सकता है।
-मूर्तियों और पंडालों की सजावट के लिए पुवाल का प्रयोग किया जाए,ताकि जल प्रदूषण रुक सके।
-मूर्तियों में पर्यावरण अनुकूल प्राकृतिक रंगों का उपयोग किया जाए।
-पीओपी से बनीं मूर्तियां पर्यावरण के लिए नुकसानदायक हैं। पानी में नहीं घुलती।




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