धार~वेस्ट डी कम्पोजर इकाई जिले के प्रत्येक विकास खण्ड में सात कृषकों के यहाँ स्थापना की~~

( डाँ. अशोक शास्त्री धार )

सबमिशन ऑन एग्रिकल्चर एक्सटेंशन आत्मा योजना अन्तर्गत कलेक्टर अलोक कुमार सिंह के मार्गदर्शन में आत्मा योजना अन्तर्गत नवाचार घटक में वेस्ट डी कम्पोजर इकाई जिले के प्रत्येक विकास खण्ड में सात कृषकों के यहाँ स्थापना की गई। इस प्रकार जिले में कुल 91 वेस्ट डी कम्पोजर इकाई की स्थापना की गई। कृषको द्वारा विगत वर्ष एवं वर्तमान खरीफ वर्ष 2021 में भी वेस्ट डी कम्पोजर का उपयोग खेती में ड्रिप के माध्यम से विभिन्न फसलो में किया जा रहा है तथा निर्धारित मात्रा में छिडकाव के लिये भी उपयोग किया जा रहा है। जिसके बहुत ही अच्छे परिणाम कृषकों को प्राप्त हो रहे हैं।
     परियोजना संचालक आत्मा कैलाश मगर ने बताया कि कृषकों को वेस्ट डी कम्पोजर तैयार करने की सामग्री में 200 लीटर क्षमता का प्लास्टिक ड्रम, एक प्लास्टिक बाल्टी 20 लीटर, 2 किलोग्राम गुड़ ,वेस्ट डी कम्पोजर कल्चर या तैयार 20 लीटर घोल वेस्ट डी कम्पोजर शामिल है। वेस्ट डी कम्पोजर तैयार करने के लिए सबसे पहले 200 लीटर में प्लास्टिक ड्रम में 180 लीटर शुद्ध/साफ-जल से भरते हैं। दो किलो ग्राम गुड को प्लास्टिक की बाल्टी में पानी के साथ घोल तैयार कर लेते है। गुड के घोल को 200 लीटर क्षमता वाले प्लास्टिक के ड्रम में 100 लीटर पानी में मिलाते है। इसके पश्चात वेस्ट डी कम्पोजर कल्चर या 20 लीटर तैयार वेस्ट की कम्पोजर घोल को इसमें मिलाकर प्रति दिन सुबह शाम बाँस की लकड़ी की सहायता से घड़ी की दिशा एवं विपरित दिशा में 2-5 मिनट तक हिलाते/घोलते हैं, पश्चात ढक्कन की सहायता से ढक देते हैं। डी कम्पोजर का घोल वर्षा, ठण्ड के मौसम 6-7 दिन में घोल तैयार होता है तथा गर्मी में 2-3 दिनों में घोल तैयार हो जाता है। इसका उपयोग करने के लिए तैयार वेस्ट डी कम्पोजर घोल को 200 लीटर प्रति एकड प्रति सप्ताह में उपयोग करने से कम मात्रा में फसलों को एन.पी. के तथा अन्य जीवाणु उपलब्ध होते है। जिससे फसलों की बढ़ावार अच्छी होती है तथा फूल व फल अधिक संख्या लगते है। साथ ही जमीन की भौतिक व रासायनिक दशा में सुधार होता है। उन्होने बताया कि वेस्ट डी कम्पोजर उपयोग करने से कम लागत एवं कम समय एकत्रित फसल अवशेष को अपघटित करता है। जैविक खाद में परिवर्तित कर देता है। किट एवं रोग नियंत्रण में सहायक  जैसे व्हाईट मिलीबग को वेस्ट डी कम्पोजर घोल का 100 प्रतिशत छिड़काव से पूर्णत नष्ट किया जा सकता है। मृदा की भौतिक एवं रासायनिक दशा में सुधार होता है, तथा भूमि नरम व मुलायम होती है। जैविक गुणवत्ता युक्त फल एवं सब्जिया की प्राप्ति होती है। रासायनिक उर्वरकों के विकल्प के रूप में उपयोग कर उर्वरकों पर निर्भरता कम की जा सकती है तथा खेती की लागत में कमी आती है। वेस्ट डी कम्पोजर के लगातार उपयोग करने से मृदा में लाभकारी सूक्ष्म जीवों की संख्या में वृद्धि होती है ।


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