धार~~परंपरागत तरीके से निकलेगा बाबा धारनाथ का छबीना ~~

देश की आजादी के समय से परंपरा निभा रहा धर्म स्थान रक्षक मंडल ~~

प्रदेश में उज्जैन के बाद धार में दिया जा रहा गॉर्ड ऑफ ऑर्नर ~~

प्रशासन की बैठक के बाद हुआ अंतिम निर्णय
छबीने के साथ होंगे 50 लोग-कलेक्टर श्री सिंह ~~

6 सितंबर के दिन जनता को दर्शन देंगे धारनाथ
जूलूस, चल समारोह पर रहेगा प्रतिबंध ~~

स्टेट कालीन परंपरा को निभा रहे ठाकुर परिवार की चौथी पीढ़ी मंडल से जुड़कर दे रही सेवा ~~

( धार से डाँ. अशोक शास्त्री )

धार। अपनी वर्षों पुरानी परंपरा निभाते हुए धार के नाथ बाबा धारनाथ अपनी प्रजा का हाल जानने व उन्हें दर्शन देने के लिए 6 सितंबर को छबीने के रुप में शहर में निकलेंगे, पिछले साल कोरोना गाईड लाईन के चलते छोटे स्वरुप में निकलते हुए शासकीय वाहन में विराजित होकर धारनाथ निकले थे। किंतु इस मर्तबा प्रशासन व धर्म रक्षक मंडल के बीच हुई चर्चा के बाद सालों की परंपरा को जारी रखते हुए इस मर्तबा पुन: मांझी समाज के युवाओं द्वारा अपने कंधे पर उठाकर शहर का भ्रमण छबीने के रुप में करवाया जाएगा। हालांकि कोरोना को लेकर जारी हुई नई गाईड लाईन के तहत जुलूस, चल समारोह पर प्रतिबंध रहेगा। ऐसे में सिर्फ शहर में बाबा का ही छबीना निकलेगा। मध्य प्रदेश में उज्जैन के बाद धार के धारनाथ ही एक ऐसा मंदिर हैं, जहां पर गॉर्ड ऑफ ऑनर दिया जाता है। मंगलवार को जिला प्रशासन की ओर से छबीने की कार्यवाही का विवरण तैयार करते हुए विभागों को जिम्मेदारी सौंपी गई है।
इस प्रकार हैं छबीने का इतिहास
राजा भोज के शासन काल में धारनाथ मंदिर की स्थापना हुई थी, करीब 1200 वर्ष पहले से आज तक मंदिर स्थापित है। तथा राजा भोज यहां पर अपने समय पूजा अर्चना करते थे, साथ ही प्रजा का हाल जानने के लिए बाबा धारनाथ नगर भ्रमण पर जाते थे। कई सालों पहले धार एक छोटे से हिस्से में ही बसा हुआ था, ऐसे में मात्र दो घंटे में छबीना समाप्त हो जाया करता था। किंतु जैसे-जैसे धार बड़ा हुआ, वैसे-वैसे छबीने के मार्ग का विस्तार होते हुए करीब 6 घंटे शहर में भ्रमण करता है। धर्म रक्षक मंडल के सचिव अजयसिंह ठाकुर बताते हैं, कि भोज शासन के समय के बाद आजादी के शुरुआती समय से ही धर्म रक्षक मंडल छबीना निकालने की अपनी परंपरा को निभा रहा हैं, तथा 75 सालों से बगैर कोई बड़ी बाधा के छबीन निकला है। पिछले साल छबीना जरुर निकला, किंतु शासन के वाहन का उपयोग किया गया। साथ ही छबीने की व्यवस्था पूरी धर्म रक्षक मंडल के हाथों में होती हैं, इसके लिए बकायदा शहर की जनता से चंदा एकञित किया जाता है। तथा प्रशासन अपनी ओर से कानून व्यवस्था सहित अन्य व्यवस्थाओं को संभालता है।
धार महाराज के घर से आती हैं पालकी
धारेश्वर मंदिर के पुजारी पं. अविनाश दुबे ने बताया कि भोज शासन काल में महारानी के राजवाडा स्थित निवास से पालकी आती थी, अब धार महाराज के निवास से पालकी धारेश्वर मंदिर आती है। सुबह से पूजा अर्चना का क्रार्यक्रम शुरु होता हैं, इसके बाद पालकी को सजाया जाता है। मंदिर के प्रांगण में बाबा धारनाथ के मुखौटे की पूजा व आरती होती हैं, इसके बाद बाबा को सलामी परंपरा के अनुसार दी जाती है। इन सभी कार्यक्रमों के बाद धारनाथ प्रजा का हाल जानने व उन्हें दर्शन देने के लिए नगर भ्रमण पर निकलते है। श्री दुबे के अनुसार पहले केले के पत्तों से व फुलों से पालकी को सजाया जाता था, तथा रात्रि में 11 बजे तक पालकी पुन मंदिर आती है। रात्रि में आरती के बाद छबीना समाप्त होता है। भोज शासन काल में पालकी को उठाने के लिए भी राजा अपनी ओर से सेवकों को भेजते थे, तथा कैंडल की रोशनी में भ्रमण करवाया जाता था। जिले सहित प्रदेश में कई स्थानों पर भगवान की पालकी यात्रा जरुर निकलती हैं, किंतु सिर्फ धार में ही धारनाथ का छबीना निकलता है।
चार पीढ़ी से जुड़ा परिवार
सचिव श्री ठाकुर ने बताया कि करीब 75 साल पहले स्व. लक्षमणसिंह ठाकुर ने शहर के अन्य वरिष्ठों के साथ मिलकर धर्म स्थान रक्षक मंडल की स्थापना करते हुए छबीना निकालने का क्रम शुरु किया, जिसके बाद पिता मनोहर सिंह ठाकुर ने इस परंपरा में शामिल हुए। तथा अब स्वयं अजय ठाकुर व उनके पुत्र प्रखर ठाकुर धर्म रक्षक समिति से जुड़े हुए है। नवनीत जैन ने बताया कि परंपरा को निभाना ही धर्म रक्षक मंडल का प्रयास हैं, इसके लिए शहर की जनता से अपील की जा रहा हैं, कि शासन के नियमों का पालन करते हुए सभी को बाबा धारनाथ के दर्शन करना हैं।
1- बाॅक्स खबर...
वाद्ययंत्र व़ मंजिरे का होगा उपयोग
कलेक्टर श्री सिंह ने बैठक में आगामी छः सितम्बर को निकलने वाले धारनाथ बाबा के छबीने के सम्बंध में निर्देश दिए कि छबीना समिति के तत्वाधान में मांझी समाज के युवाओं द्वारा कंधे पर पालकी उठाकर परम्परागत मार्ग से नगर भ्रमण कराया जाएगा। धारनाथ के छबीने का स्वरूप परंपरागत रूप अनुसार ही रहेगा। छबीने में 50 लोग साथ रहेंगे एवं परंपरागत मार्ग के रास्ते में छबीने के अतिरिक्त अन्य कोई जुलूस, झांकी, अखाड़े इत्यादि निकालने की अनुमति नहीं होगी। छबीने में वाद्ययंत्र यथा बैंड, ढोल, मंजिरे का उपयोग किया जा सकेगा, साथ ही डीजे का उपयोग पूर्णतः प्रतिबंधित रहेगा। परंपरागत मार्ग में कहीं भी स्वागत मंच इत्यादि नहीं लगाये जायेंगे। कोविड 19 के संक्रमण को दृष्टिगत रखते हुए सम्मिलित व्यक्तियों द्वारा फेस मास्क, सेनेटाईजर का उपयोग एवं सोशल डिस्टेंसिंग का पालन सुनिश्चित किया जावे। कोविड 19 के प्रोटकॉल के अनुसार ही छबीने के दर्शन किये जावे, यह सुनिश्चित किया जावे। धारेश्वर महादेव छबीना समिति के सदस्यों एवं पालकी उठाने वाले मांझी समाज के लोगों को अनुविभागीय दण्डाधिकारी, धार द्वारा परिचय पास जारी किये जायेंगे।
2- बाॅक्स खबर...
निमंञण तक देने आते हैं लोग
धार सहित आसपास के गांवों में लोगों के घर किसी भी प्रकार के आयोजन होने पर उसका निमंञण देने के लिए धारेश्वर मंदिर पहुंचते है। साथ ही इस शहर के ‘राजा’ के सामने मत्था टेकने के बाद ही कलेक्टर-एसपी लेते हैं ज्वाइनिंग ऐसी मान्यता है कि भगवान धारनाथ की आज्ञा के बिना यहां कुछ नहीं होता है। धार में जब भी कोई नया कलेक्टर या एसपी धार में ट्रांसफर होकर आता है तो अपनी ज्वाइनिंग से पहले धारेश्वर भगवान के मंदिर में मत्था टेककर ही अपना कार्यभार संभालता है। धार से जाने वाले अधिकारी भी भगवान धारनाथ को नमन करने के बाद ही यहां से रवाना होते है। माना जाता है कि ये धार के राजा है और प्रजा का हाल जानने के लिए वर्ष में एक बार नगर भ्रमण पर निकलते है। यह परंपरा राजा भोज के समय से चली आ रही है। प्राचीनकाल में राजा व़ उनके परिवार के लोग भी शामिल होते थे


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