धार~घर लेट आने के सवाल पर दंपत्ति हुए अलग
कोर्ट में दी गई समझाईश तो मतभेद भुलाकर साथ में रहने के लिए हुए राजी ~~

नेशनल लोक अदालत का हुआ आयोजन ~~

धार (डाँ. अशोक शास्त्री )

शादी के तीसरे साल से शुरू हुआ पति व पत्नी का विवाद कुछ दिनों पूर्व कोर्ट तक पहुँच गया था, पति तलाक चाहता था। जिसके लिए कोर्ट पहुँचा व न्यायालय की शरण लेकर नोटिस जारी किया। किंतु 2 बच्चों व परिवार के मान सम्मान को देखकर पत्नी ने कोर्ट के समक्ष लड़ाई झगड़े नही करने की बात कही, तथा पति के साथ आजीवन साथ रहने की बात कही।
दरअसल नेशनल लोक अदालत में शनिवार को तलाक का एक प्रकरण रखा गया था, कुटुंब न्यायालय(फेमेली कोर्ट) में पीथमपुर निवासी दंपत्ति का तलाक के मामले को लेकर आज दोनों पक्षों को बुलाया गया था। पति की ओर से प्रकरण में नोटिस जारी होने के बाद पत्नी को कोर्ट बुलाया था। जानकारी के अनुसार वर्ष 2011 में हिन्दू रीति रिवाज से शादी हुई थी, इसी बीच वर्ष 2013 के बाद से दोनों में पारिवारिक बातों को लेकर प्रतिदिन झगड़े होते थे। हालांकि परिवार के लोगों ने समझने की कोशिश की, किंतु पति के घर लेट आने के सवाल-जवाब पर शुरु हुआ विवाद आए दिन बढता ही गया। इसके कारण दोनों में विवाद बढ़ गया व कुछ माह पूर्व दोनों अलग रहने लगे। इसके बाद कुटूंब न्यायालय में प्रधान न्यायाधीश केजी सुरेका द्वारा दंपत्ति से चर्चा की गई। श्री सुरेका द्वारा दोनों पक्षों को समझाईश दी गई तथा विवाह-विच्छेद के पश्चात् आने वाले विकट समय के परिदृश्य से अवगत कराया तब दोनों पक्ष आपसी मन मुटाव को भूलकर राजी-मर्जी से साथ-साथ रहने के लिए सहमत हो गए।
समझाईश के बाद घर की ओर चल पडे
इसी प्रकार कुटुम्ब न्यायालय के एक और प्रकरण में जिसमें पत्नि द्वारा पति के विरूद्ध मुख्य आक्षेप शिकायत यह थी कि सास-बहु के झगड़े में उनके पति कभी अपनी पत्नि का साथ नहीं देतेथे। इस प्रकरण में भी समझौता-वार्ता सफल रही तथा दोनोंपक्ष जो कई वर्षाें से अलग रह रहे थे, शनिवार को राजी-खुशी दोनों साथ-साथ अपने घर की ओर चल पड़े। राष्ट्रीय विधिक सेवा प्राधिकरण नई दिल्ली द्वारा अनुमोदित केलेण्डर अनुसार तथा राज्य विधिक सेवा प्राधिकरण जबलपुर के निर्देशानुसार शनिवार को संपूर्ण देश में नेशनल लोक अदालत आयोजित की गई। इसी कड़ी में जिला मुख्यालय धार व तहसील के समस्त न्यायालयों में भी लोक अदालत का आयोजन किया गया। जिला न्यायालय धार में  प्रधान जिला न्यायाधीश अखिलेश जोशी द्वारा दीप प्रज्वलित कर लोक-अदालत का शुभारंभ किया गया। इसी प्रकार तहसील न्यायालय बदनावर ,सरदारपुर, कुक्षी, मनावर एवं धरमपुरी में भी लोक अदालत का शुभारंभ किया गया।शुभारंभ अवसर पर प्रधान जिला न्यायाधीश श्री जोशी द्वारा उपस्थित न्यायिक अधिकारी, अभिभाषकगण, विद्युत विभाग, बैंक, नगरपालिका, वन-विभाग आदि के पदाधिकारी उपस्थित थे। 
8 करोड रुपए का अवार्ड पारित
श्री जोशी ने संबोधित करते हुए कहा कि लोक-अदालत एक न्यायालयीन महापर्व की तरह आयोजित किया जाता है। इस लोक-अदालत को सफल बनाने हेतु अर्थात् अधिक से अधिक समझौता योग्य प्रकरणों के निराकरण हेतु समस्त अधिकारीगण द्वारा काफी मेहनत की गई। लोक-अदालत का सफल आयोजन हेतु जिला अभिभाषक संघ की ओर से भी प्रशंसनीय सहयोग प्रदान किया जाता रहा है । समस्त अधिकारीगण अपने-अपने न्यायालय के लंबित समझौता योग्य प्रकरणों के निराकरण हेतु भरसक प्रयास करेंगे। नेशनल लोक अदालत में न्यायालय के समझौता योग्य कुल लंबित 24,867 प्रकरणों में से लोक अदालत में निराकरण हेतु 7285 प्रकरण रैफर किए गए। जिनमें से 735 प्रकरणों का निराकरण सुलह-समझौता के आधार पर किया गया एवं कुल 8 करोड 33 हजार रुपए के अवार्ड पारित किए गए। साथ ही लोक अदालत से निराकृत प्रकरणों के पक्षकारों को न्याय वृक्ष के रूप में फलदार पौधे वितरित भी किए।


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