खिलेडी/बिडवाल~~स्थानीय मां गायत्री प्रज्ञा पीठ बिडवाल पर शरदोत्सव का आयोजन किया गया~~

मान्यता है कि इस दिन चन्द्रमा 16 कलाओं से परिपूर्ण होकर अमृत की बरसात करता है~~

महोत्सव में पीठ की महिलाओं द्वारा भजनों कि आराधना कर उत्सव में अपनी सहभागिता निहित की~~

देर रात तक भजनों का सिलसिला चलता रहा ~~

रात्रि 12 बजे पीठ के अध्यक्ष रमेश लक्कड़ द्वारा आरती उतारी गई व प्रसादी का वितरण युवा साथियों द्वारा किया गया ~~

जगदीश चौधरी खिलेडी 6261395702~~


प्रज्ञा पीठ के कोषाध्यक्ष कैलाश तारोदिया ने बताया कि शरद पूर्णिमा की  रात में खीर को खुले आसमान में पकाया जाता है ओर खीर तैयार होने के बाद सफेद कपड़े से ढक कर रखा जाता है और निर्मित खीर को प्रसाद का भोग भगवान को अर्पित कर वितरित किया जाता है। पीठ पर पुरुष वर्ग द्वारा खीर का निर्माण किया गया ।  दिलचस्प बात है कि शरद पूर्णिमा की रात चंद्रमा पृथ्वी के सबसे पास होता है ओर मनमोहक नजर आता है ।
          प्रज्ञा पीठ के ट्रस्टी सदस्य सुरेन्द्र पंवार ने बताया कि इस दिन अगर अनुष्ठान किया जाए तो ये सफल होता है। मान्यता है कि इस दिन भगवान श्री कृष्ण ने गोपियों के साथ महारास रचा था। वहीं शास्त्रों के अनुसार देवी लक्ष्मी का जन्म शरद पूर्णिमा के दिन हुआ था। माना जाता है कि इस दिन देवी लक्ष्मी अपनी सवारी उल्लू पर बैठकर भगवान विष्णु के साथ पृथ्वी का भ्रमण करने आती हैं। इसलिए आसमान पर चंद्रमा भी सोलह कलाओं से चमकता है।


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