भोपाल~300000 वोट वाले मुस्लिम समुदाय की ओर खंडवा लोकसभा उपचुनाव में भाजपा कांग्रेस दोनों का ध्यान नहीं~~

दोनों पार्टियों को उपेक्षा भारी न पड़ जाए आइंदा में पूरे प्रदेश के विधानसभा चुनाव में~~

भोपाल (सैयद रिजवान अली)~~

उपचुनाव की नैया पार लगाने के लिए रणनीति बनाने वाले खंडवा लोकसभा की एक बड़ी वोटर जमात से आंखें घुमाए बैठे हैं। करीब तीन लाख वोटों वाले मुस्लिम समुदाय से भाजपा और कांग्रेस की अनदेखी चुनाव परिणामों को बड़ा झटका दे सकते हैं।

जानकारी के मुताबिक खंडवा लोकसभा के खंडवा, बुरहानपुर, बड़वाह, सतवास बेड़िया देशगांव सनावद खिराला शरीफ समेत छोटे बड़े ग्रामीण इलाकों में मुस्लिम बहुलता है। आंकड़ों के मुताबिक यहां करीब 2 लाख 87 हजार मुस्लिम वोटर मौजूद हैं। बताया जाता है कि यहां हुए पिछले चुनावों में अरुण यादव या नंदकुमार सिंह चौहान को इन्हीं वोटों की एक तरफा मदद ने जीत का सेहरा पहनाया था। लेकिन बताया जा रहा है कम समय में हुई चुनाव तैयारियों के बीच भाजपा और कांग्रेस इस बड़े वोट बैंक को लेकर कोई ठोस रणनीति तैयार नहीं कर पाया है। जबकि अन्य छोटे समाजों को लेकर दोनों ही दलों ने अपनी कार्यकर्ता टीम मैदान में उतार रखी है।अरुण की थी बड़ी तैयारी

खंडवा लोकसभा से कांग्रेस के प्रत्याशी माने जा रहे अरुण यादव यहां पिछले कई महीनों से क्षेत्र में सक्रिय थे। उन्होंने क्षेत्र में मौजूद सभी धर्मों, जाति और समाजों के बीच जाने की रणनीति पर कड़ी मेहनत कर ली थी। विधानसभा से लेकर बूथ स्तर तक जाने के लिए उनकी पुख्ता तैयारी हो चुकी थी। लेकिन ऐन मौके पर चुनाव लडने से इंकार करने के बाद यहां आए कांग्रेस प्रत्याशी राज नारायण सिंह इन तैयारियों का फायदा नहीं उठा पा रहे हैं। सूत्रों का कहना है राजनारायण को सहयोग करने के लिए बतौर पार्टी सहयोगी अरुण यादव मैदान में जरूर मौजूद हैं लेकिन राजनरायण ने उनकी बनाई रणनीति को दरकिनार रखकर अपने बनाए मसौदे से चुनाव की तैयारियों को आगे बढ़ाया है। इस बीच हमेशा अरुण यादव को सहयोग करने वाला मुस्लिम वोटर हाथों से फिसलता नजर आ रहा है।

भाजपा को नहीं मुस्लिम वोट की उम्मीद

जहां खंडवा लोकसभा के पिछले सांसद नंद कुमार सिंह चौहान अपनी चुनाव रणनीति में मुस्लिम वोटर को शामिल रखते थे, वहीं इस चुनाव में भाजपा प्रत्याशी ज्ञानेश्वर पाटिल इस वोट गणित से अनभिज्ञ हैं। सूत्रों का कहना है कि भाजपा के भोपाल मुख्यालय से संचालित चुनाव मैनेजमेंट में मंत्री, विधायकों, वरिष्ठ नेताओं की मौजूदगी जरूर है। लेकिन स्थानीय नेताओं की उपेक्षा और क्षेत्रीय वोट समीकरण की इनकी अनभिज्ञता प्रत्याशी को बड़ा नुकसान पहुंचा सकती है। दोनों पार्टियों को भाजपा और कांग्रेस को आइंदा पूरे प्रदेश के विधानसभा चुनाव में भारी ना पड़ जाए उपेक्षा अन्य पार्टियों को न्योता दे रही है मध्य प्रदेश में


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