*पुष्य नक्षत्र के चलते 60 साल बाद कार्तिक मास में बन रहा है विशेष संयोग( डाँ.अशोक शास्त्री )*~~

 शास्त्रों में कार्तिक मास का अत्यंत महत्व है । कहा जाता है ये मास विष्णु भगवान को बहुत प्रिय है । इसी मास में विष्णु जी शालिग्राम के रूप में तुलसी माता से विवाह करते है । तो वही इस मास में दीपदान करने की भी परंपरा है । इस संदर्भ मे मालवा के प्रसिद्ध ज्योतिषाचार्य डाँ.अशोक शास्त्री ने इस विषय पर विशेष चर्चा मे बताया की इन्हीं तमाम कारणों के चलते कार्तिक मास अधिक महत्व रखता है । इस वर्ष कार्तिक मास 21 अक्टूबर से शुरू होकर 19 नवंबर को समाप्त होने वाला है । डाँ.अशोक शास्त्री के अनुसार इस मास यानि कार्तिक मास में पड़ने वाला पुष्य नक्षत्र के दौरान कई शुभ संयोग लगभग 60 साल बाद बन रहा है । जिससै इस मास का महत्व अधिक बढ़ रहा है । पुष्य नक्षत्र सभी नक्षत्रों का राजा होता है । तमाम तरह के शुभ कार्यों को करने के लिए इस नक्षत्र को सबसे सर्वश्रेष्ठ माना जाता है । इस बार लगभग 60 साल बाद इस नक्षत्र में खास संयोग बन रहा है । ज्योतिष शास्त्र में कुल 27 नक्षत्र हैं , जिनमें से आठवां पुष्य नक्षत्र है , जिसे तिष्य और अमरेज्य के नाम से भी जाना जाता है । बता दें तिष्य का अर्थ मंगल प्रदान करने वाला नक्षत्र तथा अमरेज्य का अर्थ देवताओं द्वारा पूजा जाने वाला नक्षत्र , कहने का भाव है जिस नक्षत्र की पूजा देवी - देवता भी करते हैं। इस नक्षत्र को इतना शुभ माना जाता है कि मान्यता है कि शादी विवाह आदि को छोड़कर किसी भी शुभ कार्य को करने के लिए इस नक्षत्र के दौरान पंचांग देखने को आवश्यकता नहीं होती ।  
          ज्योतिषाचार्य डाँ.अशोक शास्त्री के अनुसार कार्तिक मास में पुष्य नक्षत्र का महत्व धार्मिक दृष्टि से देखा जाए तो हिंदू धर्म में कार्तिक मास को बहुत खास माना जाता है । इस मास में विशेष रूप से देवी लक्ष्मी जी और भगवान विष्णु की पूजा करनी फलदायी होती है । यही कारण है कि लोग बढ़ चढ़़कर इस दौरान विष्णु - लक्ष्मी की आराधना करते हैं । पुष्य नक्षत्र- 28 अक्टूबर 2021 , गुरुवार को कार्तिक मास की कृष्ण पक्ष की सप्तमी तिथि को पुष्य नक्षत्र रहेगा । इसके अलावा दिन चंद्रमा कर्क राशि में रहेंगे । 
28 अक्टूबर को पुष्य नक्षत्र प्रात: 09: 38 मिनट से आरंभ होगा जो 29 अक्टूबर को प्रात: 11 बजकर 34 मिनट तक रहेगा । 
            ज्योतिषाचार्य डाँ.अशोक शास्त्री के अनुसार शनि देव और देवता देव गुरु बृहस्पति पुष्य नक्षत्र के स्वामी हैं । सबसे खास बात ये है कि वर्तमान समय में ये दोनों ही ग्रह मकर राशि में विराजमान हैं । अर्थात मकर राशि में शनि और गुरु की युति बनी हुई है । तो वहीं पुष्य नक्षत्र गुरुवार के दिन पड़ रहा है , अतः इसे गुरु पुष्य नक्षत्र के नाम से जाना जाता है । चूंकि माना जा रहा है कि 60 साल बाद ये खास संयोग बना है , इसलिए खरीदारी करने के लिए ये विशेष योग बहुत शुभ है ।।  जय  हो  ।।

                  *ज्योतिषाचार्य*
          डाँ. पं. अशोक नारायण शास्त्री
          श्रीमंगलप्रद् ज्योतिष कार्यालय
245 , एम. जी. रोड ( आनंद चौपाटी ) धार , एम. पी.
                  मो. नं.  9425491351

          *~~:  शुभम्  भवत  :~~*


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