बाकानेर~क्यूं दहन करूं उस रावण का
जिसने सीता को छुआ नहीं--- पल्लवीश्री जोशी~~

दशहरा मिलन काव्य समारोह सम्पन्न~~

बाकानेर--( सैयद अखलाक अली)

परिंदा की पाठशाला परिवार का ऑनलाइन दशहरा मिलन समारोह शनिवार को सम्पन्न हुआ । मिलन समारोह में देश के कवि व साहित्यकारों ने भाग लेकर काव्य पाठ भी किया । आयोजन की शुरुआत इंदौर की कवियित्री अचला शर्मा ने सरस्वती वंदना से की । पटल संस्थापक मनावर के कवि राम शर्मा परिंदा ने समसामयिक रचना पाठ करते हुए कहा कि बिगड़े हुए काम बना दो, पक्ष में परिणाम बना दो, रावण तो हर वर्ष बनाते , एक बार तो राम बना दो । उज्जैन की कवियित्री पल्लवीश्री जोशी ने अपनी व्यंग्य रचना में कहा कि क्यों दहन करूं उस रावण का जिसने सीता को छुआ नहीं , क्यों दहन करूं उस रावण का जो कर्त्तव्य विमुख कभी हुआ नहीं । छतरपुर के कवि बलराम यादव ने मन को रावण की उपमा देते हुए कहा कि बिरथा में रावण न जारौ,मन को रावण मारौ । टिमरनी की कवियित्री ममता रिछारिया ने काव्य की महत्ता बताते हुए कहा कि श्रीराम के संस्कार बसे हैं कविता में, सीता का शृंगार छिपा है कविता में । इंदौर के वरिष्ठ साहित्यकार अनिल ओझा ने जीवन की क्षणभंगुरता पर गीत पढ़ते हुए कहा कि सबको छोटा सा जीवन मिला है यहाँ,इस धरा पर न कोई अमर है यहाँ । इंदौर की साहित्यकार डॉ रजनी पांडेय ने रामजी के गुण गाते हुए कहा कि रामजी के गुण गायें आओ , दशहरा पर्व मनायें । इंदौर की साहित्यकार डॉ कृष्णा जोशी ने भारत की सांस्कृतिक विविधता पर रचना पाठ करते हुए कहा कि भारत त्योहारों का देश, विजयादशमी पर्व विशेष । इंदौर की साहित्यकार बृजबाला गुप्ता ने कुलदेवी फलोदी माता की वंदना प्रस्तुत की । खरगोन के ओज कवि वीरेंद्र दसौंधी वीर ने हिंदुस्तान की महत्ता बताते हुए अपने गीत में कहा कि हिंदुस्तान हमारा ये सब मुल्कों से न्यारा है ।‌ आयोजन का संचालन इंदौर के युवा कवि विनोद कुमार सोनगीर ने तथा आभार  बड़वानी के रघुवीर सोलंकी ने जताया । आयोजन में हंसा पाटीदार, तुलसी चौहान, तेजालाल पंवार, शांतिलाल चौहान आदि उपस्थित थे ।


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