धार~मांग अनुसार जिले में उर्वरक लगातार प्राप्त हो रहा हैं~~

किसान बंधु डी.ए.पी. के स्थान पर सिंगल सुपर फास्फेट का उपयोग करे~~

धार डाँ.अशोक शास्त्री )।

उप संचालक कृषि ने बताया गया कि जिले में डी.ए.पी. एन.पी.के. एवं यूरिया उर्वरक लगातार प्राप्त हो रहा हैं। 27 अक्टूबर को डी.ए.पी. रतलाम रेक पाईन्ट से लगभग 250 मेट्रिक टन, एन.पी.के इन्दौर मांगलिया रेक पाईन्ट से लगभग 600 मेट्रिक टन तथा मेघनगर रेक पाईन्ट से यूरिया लगभग 1100 मेट्रिक टन प्राप्त हो रहा हैं। कई वर्षो से यह देखने में आया है कि किसानों द्वारा एक ही प्रकार के उर्वरक जैसे यूरिया, डी.ए.पी. का ही अधिक प्रयोग किया जा रहा है। इसकी जगह मिश्रित उर्वरक एवं सिंगल सुपर फॉस्फेट उर्वरकों का प्रयोग कर किसान भाई डी.ए.पी. और यूरिया पर निर्भरता कम कर सकते है। मिश्रित उर्वरक निजी पंजीकृत विक्रेता एवं सहकारी समितियों में पर्याप्त मात्रा में उपलब्ध है। उन्होंने बताया कि किसान भाई गेहूॅ फसल के लिए प्रति हेक्टेयर 120ः60ः40 किलो ग्राम पोषक तत्व नाईट्रोजन, सुपर, पोटाश की आवश्यकता होती है। इन पोषक तत्वों की पूर्ति हेतु किसान भाई पहले विकल्प के रूप में 260 किलो ग्राम यूरिया, 375 किलो ग्राम सिंगल सुपर फॉस्फेट एवं 67 किलो ग्राम पोटाश प्रति हेक्टेयर उपयोग कर सकते है या गेहूॅ फसल हेतु तीसरे विकल्प के रूप में किसान भाई 241 किलो ग्राम यूरिया, 180 किलो ग्राम मिश्रित उर्वरक (12ः32ः16) एवं 17 किलो ग्राम पोटाश प्रति हेक्टेयर उर्वरक इन दोनो विकल्पो में से किसी एक विकल्प का उर्वरक की उपलब्धता अनुसार उपयोग कर सकते है। इस प्रकार चना फसल हेतु प्रति हेक्टेयर 20ः60ः00 किलो ग्राम पोषक तत्वों नाईट्रोजन, सुपर की आवश्यकता होती है। इसकी पूर्ति हेतु विकल्प के रूप में 45 किलो ग्राम यूरिया के साथ 375 किलो ग्राम सिंगल सुपर फॉस्फेट का प्रयोग किया जा सकता है या अन्य विकल्प के रूप में किसान भाई 170 किलो ग्राम मिश्रित उर्वरक 12ः32ः16 का उपयोग कर सकते है। उन्होंने बताया कि जिले में वर्तमान में निजी, मार्कफेड एवं सहकारी समितियों में यूरिया 10108 मेट्रिक टन, डी.ए.पी. 2627 मेट्रिक टन, कॉम्प्लेक्स 2510 मेट्रिक टन, पोटाश 2270 मेट्रिक टन एवं सिंगल सुपर फॉस्फेट 13377 मेट्रिक टन उपलब्ध है। जिले में कृषकों द्वारा यूरिया 9104 मे.टन, डी.ए.पी. 3765 मे.टन, काम्पलेक्स 4260 मे.टन, पोटाश 564 मे.टन, एवं सिंगल सुपर फॉस्फेट 7150 मे.टन का उठाव किसानों द्वारा सहकारिता एवं निजी क्षेत्र से किया गया हैं।


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